देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले वीर सैनिकों और अधिकारियों को सम्मानित करना राष्ट्र का कर्तव्य है। इसी क्रम में श्रीनगर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में तैनात उप महानिरीक्षक प्रशांत जाम्भोलकर को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है। यह सम्मान उनकी अद्वितीय वीरता, अटूट समर्पण और राष्ट्र की सेवा में उत्कृष्ट योगदान का प्रतीक है।
वीरता की अनुकरणीय मिसाल
प्रशांत जाम्भोलकर का करियर साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की जीवंत कहानी है। उन्होंने देश के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दी हैं। जम्मू-कश्मीर, उत्तर पूर्व के विद्रोह प्रभावित इलाके और छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों का सफल नेतृत्व किया है।
ये वो क्षेत्र हैं जहां हर पल जान जोखिम में रहती है, जहां अधिकारियों को न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी अत्यंत मजबूत होना पड़ता है। ऐसे कठिन परिस्थितियों में प्रशांत जाम्भोलकर ने अपनी रणनीतिक सूझबूझ, नेतृत्व क्षमता और अदम्य साहस का परिचय दिया।
एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो की विरासत
प्रशांत जाम्भोलकर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि वे एलीट नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के प्रमुख सदस्य रहे हैं। एनएसजी, जिसे ब्लैक कैट कमांडो के नाम से जाना जाता है, भारत की सबसे कुशल और प्रशिक्षित विशेष बल इकाई है। यह बल आतंकवाद विरोधी अभियानों, बंधक मुक्ति और उच्च जोखिम वाले सुरक्षा अभियानों के लिए प्रसिद्ध है।
एनएसजी में चयन होना ही अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, और वहां सफलतापूर्वक सेवा देना और भी महत्वपूर्ण है। प्रशांत जाम्भोलकर ने एनएसजी में रहते हुए अपनी विशेष क्षमताओं और साहस का लोहा मनवाया।
रैपिड एक्शन फोर्स और कोबरा बटालियन में योगदान
प्रशांत जाम्भोलकर ने रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आरएएफ सांप्रदायिक दंगों और सामाजिक अशांति को नियंत्रित करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित बल है। इस बल में काम करना अत्यंत संवेदनशील होता है क्योंकि यहां न केवल सुरक्षा बल्कि सामाजिक संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होता है।
इसके अलावा, उन्होंने कोबरा बटालियन में भी सेवा दी है। कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन) सीआरपीएफ की विशेष इकाई है जो नक्सल विरोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित है। यह बटालियन जंगलों और कठिन इलाकों में गुरिल्ला युद्ध के लिए तैयार की गई है।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भारत का प्रतिनिधित्व
प्रशांत जाम्भोलकर ने केवल भारत में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कोसोवो में संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह मिशन अत्यंत महत्वपूर्ण था और उन्होंने वहां भी अपनी कुशलता और नेतृत्व का परिचय दिया।
संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भाग लेना न केवल एक सम्मान है बल्कि यह भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को भी बढ़ाता है। प्रशांत जाम्भोलकर ने इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।
अनेक सम्मानों से अलंकृत
राष्ट्रपति पुलिस पदक से पहले भी प्रशांत जाम्भोलकर को कई महत्वपूर्ण सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें पुलिस पदक (उत्कृष्ट सेवा), कठिन सेवा पदक, अंटार्कटिक सुरक्षा पदक और संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना पदक से सम्मानित किया जा चुका है।
ये सभी पदक उनकी विविध सेवाओं और उत्कृष्टता को दर्शाते हैं। अंटार्कटिक सुरक्षा पदक यह दिखाता है कि उन्होंने अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी सेवा दी है। संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना पदक उनके अंतरराष्ट्रीय योगदान को मान्यता देता है।
अब राष्ट्रपति पुलिस पदक इन सभी सम्मानों के शिखर पर मुहर लगाता है और उनकी जीवनभर की सेवा को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देता है।
‘स्पेशल ऑफिसर’ के नाम से विख्यात
सीआरपीएफ में प्रशांत जाम्भोलकर को ‘स्पेशल ऑफिसर’ के नाम से जाना जाता है। यह उपनाम उन्हें उनकी फ्रंटलाइन साहसिकता, अखंडता और नवीन रणनीतियों के कारण मिला है। वे अपने सहयोगियों और जूनियर अधिकारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
एक अधिकारी जो न केवल आदेश देता है बल्कि खुद मोर्चे पर लड़ता है, जो नवीन रणनीतियां विकसित करता है और अपनी टीम का मनोबल बढ़ाता है – ऐसे अधिकारी ही सच्चे नेता होते हैं। प्रशांत जाम्भोलकर इसी श्रेणी के अधिकारी हैं।
राष्ट्रव्यापी बधाइयों की बौछार
राष्ट्रपति पुलिस पदक की घोषणा के बाद प्रशांत जाम्भोलकर को पूरे देश से बधाइयां मिल रही हैं। सीआरपीएफ परिवार, सुरक्षा बलों, पूर्व सैनिकों और आम नागरिकों ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उन्हें बधाई दी है।
“हमारे राष्ट्रीय नायक को हार्दिक बधाई!”, “हर भारतीय के लिए गौरव का क्षण”, “वीरों के पंथ में स्वागत!” जैसे संदेशों की बाढ़ आ गई है। यह उत्साह और प्रशंसा दर्शाता है कि देश अपने सुरक्षा बलों का कितना सम्मान करता है।
राष्ट्र के लिए प्रेरणा
प्रशांत जाम्भोलकर की यात्रा युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने दिखाया है कि समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। सीआरपीएफ परिवार को उन पर गर्व है और पूरा राष्ट्र उनकी सेवाओं का आभारी है।