नई दिल्ली: देश के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह दिन देश को एक जीवंत गणराज्य के रूप में मनाने का अवसर है, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के शाश्वत आदर्शों पर स्थापित है।
उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि 26 जनवरी केवल संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता और सोच को श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को याद करने का भी दिन है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमें लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखना है जो हमारे संविधान में निहित हैं।
गणतंत्र दिवस की महत्वता पर जोर
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में लिखा कि देश की विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हमारी संस्थाओं की मजबूती को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे लोगों की लगन और समर्पण का प्रमाण है। साथ ही यह विकसित भारत 2047 की दिशा में हमारे सामूहिक संकल्प को भी दिखाता है।
उन्होंने आगे कहा कि इस गणतंत्र दिवस को हम सभी को एकता को मजबूत करने, समावेशिता को बढ़ावा देने और अपने प्यारे गणराज्य की प्रगति और समृद्धि के लिए अटूट प्रतिबद्धता के साथ काम करने की प्रेरणा लेनी चाहिए।
संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि
उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में संविधान निर्माताओं के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी 1950 को जब भारत का संविधान लागू हुआ था, तब से लेकर आज तक यह दिन हमारे लिए गौरव का प्रतीक रहा है। संविधान निर्माताओं ने जिस दूरदर्शिता और समझदारी से संविधान बनाया, वह आज भी प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि हमारा संविधान दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का आधार है। यह न केवल हमारे अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि हमें हमारे कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। संविधान में दिए गए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के सिद्धांत आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने 77 साल पहले थे।
नागरिकों के कर्तव्य और जिम्मेदारियां
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि गणतंत्र दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं है, बल्कि यह हमें अपनी जिम्मेदारियों के बारे में सोचने का भी अवसर देता है। प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखे और संविधान में निहित आदर्शों का पालन करे।
उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर देश की एकता और अखंडता को मजबूत करना होगा। हमें समाज में समानता और भाईचारे को बढ़ावा देना होगा। यह तभी संभव है जब हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी को समझे और उसका पालन करे।
विकसित भारत 2047 का संकल्प
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश ने विभिन्न क्षेत्रों में जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे हमारी संस्थाओं की मजबूती और लोगों की कड़ी मेहनत का परिणाम हैं। यह सामूहिक संकल्प 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हमारे देश ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में बेहतरीन प्रगति की है। यह सब हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत को दर्शाता है। हमें इसी तरह आगे बढ़ते रहना है और 2047 तक एक विकसित भारत के सपने को साकार करना है।
एकता और समावेशिता का संदेश
उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में एकता और समावेशिता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता हमारी ताकत है। हमें इस विविधता को बनाए रखते हुए एकता को मजबूत करना होगा। समाज के हर वर्ग को समान अवसर मिलना चाहिए और किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समावेशी विकास ही सच्चे अर्थों में देश की प्रगति है। जब तक समाज का हर व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ता, तब तक देश का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। इसलिए हमें सभी को साथ लेकर चलना होगा।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत हैं और यही हमारी ताकत है। न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका तीनों अपने-अपने दायरे में काम कर रही हैं। यह व्यवस्था दुनिया के लिए एक मिसाल है।
उन्होंने कहा कि हमारे लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात कहने की आजादी है। यह स्वतंत्रता हमारे संविधान की देन है। हमें इस स्वतंत्रता का जिम्मेदारी से उपयोग करना चाहिए और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखना चाहिए।
देशवासियों के प्रति आभार
उपराष्ट्रपति ने देश के नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में हर नागरिक का योगदान है। किसान, मजदूर, वैज्ञानिक, शिक्षक, डॉक्टर और अन्य सभी क्षेत्रों के लोग अपने-अपने तरीके से देश की सेवा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह सामूहिक प्रयास ही देश को आगे बढ़ाता है। हमें इस भावना को बनाए रखना होगा और मिलकर देश की समृद्धि के लिए काम करना होगा।
गणतंत्र दिवस के इस अवसर पर उपराष्ट्रपति का संदेश देशवासियों के लिए प्रेरणादायक है। उनके शब्द हमें याद दिलाते हैं कि हम सभी को मिलकर एक मजबूत, समृद्ध और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना है। यह केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश की प्रगति में अपना योगदान दे।
77वां गणतंत्र दिवस हमें फिर से संकल्पित करता है कि हम अपने संविधान के आदर्शों के अनुसार चलें और एक बेहतर भारत का निर्माण करें।