जरूर पढ़ें

18 साल बाद ऐतिहासिक डील: जानिए ‘मदर ऑफ ऑल डील’ की पूरी कहानी, भारत को क्या-क्या होगा फायदा

जानिए ‘मदर ऑफ ऑल डील’ की पूरी कहानी
जानिए ‘मदर ऑफ ऑल डील’ की पूरी कहानी (Pic Credit- X @ansujeet)

भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच प्रस्तावित एफटीए 18 साल की बातचीत के बाद हकीकत बन सकता है। इससे लग्जरी कारें, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य यूरोपीय सामान सस्ते होंगे। साथ ही भारत के निर्यात, सेवाओं और रोजगार के अवसरों में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।

Updated:

India EU FTA: भारत और यूरोपियन यूनियन के रिश्तों में आज एक ऐतिहासिक मोड़ आ सकता है। दोनों पक्ष आज मुक्त व्यापार समझौते यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यह समझौता इसलिए भी खास है क्योंकि इस पर बातचीत साल 2007 से चल रही थी और करीब 18 साल बाद यह प्रयास सफल होता नजर आ रहा है। यही वजह है कि इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील’ कहा जा रहा है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, इस समझौते पर सहमति बन चुकी है और आज इसका औपचारिक एलान संभव है। यदि यह डील पूरी तरह लागू होती है, तो इसका असर आम आदमी से लेकर बड़े उद्योगों तक पर साफ दिखाई देगा। भारत में यूरोप से आने वाले कई महंगे उत्पाद सस्ते हो सकते हैं और भारतीय कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजार के दरवाजे और ज्यादा खुल जाएंगे।

भारत-यूरोपियन यूनियन एफटीए क्यों है इतना महत्वपूर्ण

18 साल की लंबी बातचीत के बाद बड़ी सफलता

भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच एफटीए पर चर्चा लंबे समय से चल रही थी। अलग-अलग आर्थिक हित, टैक्स संरचना और बाजार से जुड़े मुद्दों के कारण यह समझौता बार-बार अटकता रहा। अब जाकर दोनों पक्षों ने आपसी सहमति बनाई है, जो भारत की वैश्विक व्यापार नीति के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की साझेदारी

यूरोपियन यूनियन की कुल जीडीपी लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि भारत की जीडीपी 4.18 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है। आबादी के मामले में भारत जहां 140 करोड़ के साथ विशाल बाजार है, वहीं यूरोपियन यूनियन में करीब 45 करोड़ लोग रहते हैं। इन दोनों अर्थव्यवस्थाओं का आपस में जुड़ना वैश्विक व्यापार को नई दिशा दे सकता है।

आंकड़ों में भारत और यूरोपियन यूनियन की तुलना

यूरोपियन यूनियन का निर्यात 2.9 ट्रिलियन डॉलर और आयात 2.6 ट्रिलियन डॉलर का है, जबकि भारत का निर्यात 824.5 अरब डॉलर और आयात 915 अरब डॉलर का है। एफटीए के बाद भारत को अपने निर्यात बढ़ाने का बड़ा मौका मिलेगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां भारत पहले से मजबूत है।

भारत में क्या-क्या हो सकता है सस्ता

लग्जरी कारों की कीमतों में राहत

इस समझौते का सबसे ज्यादा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर में देखने को मिल सकता है। मर्सिडीज, BMW और पॉर्श जैसी लग्जरी कारों की कीमतों में कमी आने की संभावना है। 15,000 यूरो से अधिक कीमत वाली कारों पर टैरिफ घटकर 40 प्रतिशत रह सकता है, जिससे ये गाड़ियां पहले के मुकाबले सस्ती होंगी।

टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल सामान पर असर

विमान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, केमिकल्स, आधुनिक मेडिकल उपकरण और मेटल स्क्रैप जैसे उत्पाद भी सस्ते हो सकते हैं। इससे न सिर्फ उपभोक्ताओं को फायदा होगा, बल्कि भारतीय उद्योगों की लागत भी कम हो सकती है।

यूरोपीय शराब की कीमतों में गिरावट

भारतीय बाजार में यूरोप से आने वाली शराब पर टैक्स कम होने से इनकी कीमतों में भी कमी आ सकती है। यह बदलाव हॉस्पिटैलिटी और रिटेल सेक्टर पर असर डाल सकता है।

सेवा क्षेत्र में भारत को बड़ा फायदा

आईटी और प्रोफेशनल सेक्टर के लिए अवसर

एफटीए का फायदा सिर्फ सामान तक सीमित नहीं रहेगा। आईटी, इंजीनियरिंग, टेलीकॉम और बिजनेस सर्विस जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों के लिए यूरोप में काम करने के नए अवसर खुल सकते हैं। इससे स्किल्ड वर्कफोर्स को अंतरराष्ट्रीय मंच मिलेगा।

2031 तक कितना बढ़ सकता है व्यापार

एमके ग्लोबल की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच एफटीए लागू होने के बाद 2031 तक दोनों के बीच व्यापार 51 अरब डॉलर यानी करीब 4.68 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इससे भारत के निर्यात को मजबूत आधार मिलेगा और विदेशी निवेश भी बढ़ सकता है।

सस्ती चीजें और ज्यादा मौके

इस समझौते का सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ेगा। जहां एक ओर महंगे यूरोपीय उत्पाद सस्ते हो सकते हैं, वहीं दूसरी ओर रोजगार और बिजनेस के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह डील भारत को वैश्विक व्यापार में और मजबूत स्थिति में खड़ा कर सकती है।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।