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नागपुर रेलवे स्टेशन पर टैक्सी को लेकर हंगामा, ओला-उबर के लिए अलग ज़ोन की मांग

नागपुर रेलवे स्टेशन पर टैक्सी को लेकर हंगामा, ओला-उबर के लिए अलग ज़ोन की मांग
Nagpur Railway Station Ola Uber Taxi Problem: ओला-उबर टैक्सियों के लिए अलग पिकअप और ड्रॉप ज़ोन बनाने की मांग (Image Source: Wikipedia)

Nagpur Railway Station Ola Uber Taxi Problem: नागपुर रेलवे स्टेशन पर ओला-उबर टैक्सियों और ऑटो चालकों के बीच विवाद से यात्रियों को परेशानी हो रही है। ZRUCC सदस्य नितिन सोलंके ने टैक्सियों के लिए अलग पिकअप-ड्रॉप ज़ोन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रीपेड ऑटो सेवा फिर से शुरू करने की मांग की है।

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Asfi Shadab
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नागपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ा एक अहम मुद्दा इन दिनों चर्चा में है। स्टेशन परिसर में ओला-उबर टैक्सी चालकों और स्थानीय ऑटो रिक्शा चालकों के बीच लगातार हो रहे विवाद ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। इस स्थिति को देखते हुए मध्य रेलवे के ZRUCC सदस्य और ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष नितिन सोलंके ने रेलवे प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की है।

नागपुर, जो देश का एक प्रमुख रेलवे जंक्शन है, हर दिन हजारों यात्रियों का आना-जाना होता है। ऐसे में स्टेशन परिसर में अव्यवस्था और विवाद यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।

स्टेशन परिसर में बढ़ती अव्यवस्था

बीते कुछ समय से नागपुर रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार और संत्रा मार्केट की ओर टैक्सी और ऑटो चालकों के बीच झगड़े की घटनाएं बढ़ गई हैं। कई बार ये विवाद खुले झगड़े में बदल जाते हैं, जिससे स्टेशन परिसर में डर का माहौल बन जाता है। यात्रियों, खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह स्थिति काफी असुविधाजनक और असुरक्षित है।

यात्रियों का कहना है कि ट्रेन से उतरते ही उन्हें शांति और सुविधा मिलनी चाहिए, लेकिन स्टेशन के बाहर पहुंचते ही अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है।

प्रीपेड ऑटो सेवा बंद होने की परेशानी

नागपुर रेलवे स्टेशन पर पहले प्रीपेड ऑटो सेवा यात्रियों के लिए बड़ी राहत थी। लेकिन फिलहाल यह सेवा बंद है। इसके कारण कई ऑटो चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। नए शहर में आने वाले या पहली बार यात्रा करने वाले यात्री इस स्थिति में सबसे ज्यादा परेशान होते हैं।

प्रीपेड सेवा बंद होने के कारण यात्रियों को मजबूरी में ओला-उबर जैसी ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का सहारा लेना पड़ता है।

ओला-उबर टैक्सियों को रोकने की घटनाएं

जब ओला या उबर टैक्सी यात्री को लेने स्टेशन के पास आती है, तो कई बार स्थानीय ऑटो चालक उन्हें रोक देते हैं। इससे टैक्सी चालकों और ऑटो चालकों के बीच बहस और झगड़े हो जाते हैं। कई मामलों में टैक्सियों को स्टेशन के पास आने नहीं दिया जाता।

इस वजह से यात्रियों को भारी सामान के साथ काफी दूर पैदल चलना पड़ता है। बुजुर्ग और बीमार यात्रियों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो जाती है।

नितिन सोलंके की प्रमुख मांगें

इस गंभीर समस्या को लेकर नितिन सोलंके ने मध्य रेलवे के महाप्रबंधक, मुंबई और नागपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक को पत्र लिखकर समाधान की मांग की है। उन्होंने साफ कहा है कि यात्रियों की सुविधा रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

अलग पिकअप और ड्रॉप ज़ोन की जरूरत

नितिन सोलंके की सबसे प्रमुख मांग यह है कि नागपुर रेलवे स्टेशन के दोनों प्रवेश द्वारों पर ओला-उबर टैक्सियों के लिए अलग और तय पिकअप व ड्रॉप ज़ोन बनाए जाएं। इससे टैक्सी और ऑटो चालकों के बीच होने वाले विवाद को रोका जा सकता है।

यदि टैक्सियों के लिए तय जगह होगी तो यात्रियों को भी पता रहेगा कि उन्हें कहां जाना है।

सूचना बोर्ड और सुरक्षा व्यवस्था

उन्होंने यह भी मांग की है कि स्टेशन परिसर में साफ और स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाए जाएं, ताकि यात्रियों को किसी तरह की उलझन न हो। इसके साथ ही RPF या रेलवे पुलिस की तैनाती बढ़ाई जाए, ताकि झगड़े और अव्यवस्था पर तुरंत नियंत्रण किया जा सके।

सुरक्षा बलों की मौजूदगी से स्टेशन परिसर में अनुशासन बना रहेगा।

प्रीपेड ऑटो सेवा दोबारा शुरू हो

नितिन सोलंके ने प्रीपेड ऑटो सेवा को तुरंत फिर से शुरू करने की भी मांग की है। इससे यात्रियों को तय किराए पर सुविधा मिलेगी और ऑटो चालकों की मनमानी पर भी रोक लगेगी।

यात्रियों का अधिकार और प्रशासन की जिम्मेदारी

नागपुर जैसे बड़े रेलवे जंक्शन पर यात्रियों का सुरक्षित और आसान सफर करना उनका अधिकार है। स्टेशन परिसर में भय और अव्यवस्था किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती। रेलवे प्रशासन को चाहिए कि वह इस समस्या को गंभीरता से ले और जल्द समाधान निकाले।

यदि समय रहते सही कदम उठाए गए, तो न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि स्टेशन की छवि भी बेहतर होगी।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।