जरूर पढ़ें

भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता, नए दौर की शुरुआत

India EU Free Trade Agreement: भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक समझौता, व्यापार और रिश्तों में नई मजबूती
India EU Free Trade Agreement: भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक समझौता, व्यापार और रिश्तों में नई मजबूती (Image Source: AIR)

India EU Free Trade Agreement: भारत और यूरोपीय संघ ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय नेतृत्व ने इसे साझा समृद्धि का नया रास्ता बताया। यह समझौता व्यापार, निवेश, रोजगार और वैश्विक सहयोग को मजबूत करेगा और दोनों क्षेत्रों के रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।

Updated:

भारत और यूरोपीय संघ का ऐतिहासिक समझौता

भारत और यूरोपीय संघ ने आज एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद पूरा हुआ। इसे दोनों पक्षों ने आपसी रिश्तों में एक नया अध्याय बताया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह केवल व्यापार का समझौता नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि का एक नया रास्ता है। उन्होंने बताया कि इससे भारत और यूरोप दोनों को लंबे समय में बड़ा लाभ मिलेगा।

प्रतिनिधि स्तर की अहम बैठक

इस समझौते से पहले भारत और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के बीच विस्तार से बातचीत हुई। इस दौरान व्यापार, सुरक्षा, रक्षा सहयोग, लोगों की आवाजाही, आपदा प्रबंधन और हरित ऊर्जा जैसे विषयों पर सहमति बनी। कुल मिलाकर सात अलग-अलग समझौतों का आदान-प्रदान किया गया।

इन बैठकों में यह साफ दिखा कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ लंबे समय तक काम करना चाहते हैं। भारत और यूरोपीय संघ ने माना कि आज की बदलती दुनिया में मिलकर आगे बढ़ना जरूरी है।

सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है। यूरोपीय संघ में 27 देश शामिल हैं और इन सभी के साथ एक साथ व्यापार समझौता होना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि इस समझौते से भारत में निवेश बढ़ेगा, नए रोजगार बनेंगे और नई तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी मजबूत होगी। इससे भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और भी मजबूत बनेगी।

‘सभी समझौतों की जननी’

समझौते के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “सभी समझौतों की जननी” बताया। यह शब्द इस बात को दिखाता है कि यह समझौता कितना बड़ा और दूरगामी असर वाला है।

उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत ने बीते वर्षों में तेज प्रगति की है और यूरोप को इस पर गर्व है। उन्होंने कहा कि जब भारत आगे बढ़ता है, तो दुनिया ज्यादा सुरक्षित और स्थिर बनती है।

यूरोपीय परिषद की प्रतिक्रिया

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा ने इस समझौते को ऐतिहासिक पल बताया। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं।

उनका कहना था कि दोनों पक्षों को अब मिलकर समृद्धि और सुरक्षा के लिए काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता आने वाले समय में दोनों क्षेत्रों के लोगों के जीवन को बेहतर बनाएगा।

व्यापार के आंकड़े क्या कहते हैं

यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार करीब 136 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

इसमें भारत का निर्यात लगभग 76 अरब डॉलर और आयात करीब 60 अरब डॉलर रहा। ये आंकड़े दिखाते हैं कि दोनों के बीच पहले से ही मजबूत व्यापारिक रिश्ता है, जिसे यह नया समझौता और मजबूत करेगा।

भारत के लिए क्या होंगे फायदे

इस मुक्त व्यापार समझौते से भारत को कई स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी। छोटे और मध्यम उद्योगों को भी इसका सीधा फायदा होगा।

इसके साथ ही नई तकनीक, हरित ऊर्जा और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे।

वैश्विक स्तर पर असर

यह समझौता केवल भारत और यूरोपीय संघ तक सीमित नहीं है। इसका असर वैश्विक व्यापार और राजनीति पर भी पड़ेगा। दोनों पक्षों ने साफ किया है कि वे खुले, नियम आधारित और निष्पक्ष वैश्विक व्यापार का समर्थन करते हैं।

आज के समय में जब दुनिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है, यह समझौता सहयोग और भरोसे का मजबूत संदेश देता है।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।