Union Budget 2026: संसद के बजट सत्र का औपचारिक आगाज हो चुका है और इसके साथ ही देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था के सबसे अहम दौर की शुरुआत मानी जा रही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुबह 11 बजे संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए सरकार की उपलब्धियों, प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा को सामने रखा। उनके संबोधन ने यह साफ कर दिया कि सरकार बुनियादी ढांचे, तकनीक और आर्थिक सुधारों को आने वाले समय में भी विकास का आधार मान रही है।
यह बजट सत्र ऐसे समय में शुरू हुआ है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता और डॉलर के मुकाबले रुपये का अब तक के सबसे निचले स्तर तक पहुंचना—ये सभी कारक इस बजट को सामान्य से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। ऐसे में बजट 2026 से सिर्फ घोषणाओं की नहीं, बल्कि ठोस दिशा और भरोसे की भी उम्मीद की जा रही है।
राष्ट्रपति के संबोधन में विकास और भरोसे का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि बीते वर्षों में देश ने इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। सड़क, रेल, बंदरगाह और हवाई अड्डों के विस्तार को उन्होंने आर्थिक मजबूती की रीढ़ बताया। उनके अनुसार, मजबूत बुनियादी ढांचा ही निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करता है।
स्पेस सेक्टर में भारत की बढ़ती पहचान
राष्ट्रपति ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत का स्पेस सेक्टर न केवल वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक है, बल्कि यह निजी निवेश और तकनीकी नवाचार के नए रास्ते भी खोल रहा है। इससे देश की वैश्विक छवि मजबूत हुई है।
जीएसटी सुधारों से अर्थव्यवस्था को गति
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने जीएसटी सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। टैक्स प्रणाली के सरलीकरण से व्यापार करना आसान हुआ है और राजस्व संग्रह में पारदर्शिता बढ़ी है।
आर्थिक सर्वेक्षण से मिलेगा दिशा संकेत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश करेंगी। यह दस्तावेज देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति, चुनौतियों और संभावनाओं का आईना माना जाता है। बजट से पहले यह संकेत देगा कि सरकार किन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देने वाली है।
1 फरवरी को आएगा आम बजट
एक फरवरी को पेश होने वाला बजट 2026 ऐसे समय में आएगा, जब सरकार को विकास और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाना होगा। बढ़ती महंगाई, वैश्विक दबाव और घरेलू मांग—इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसले लेने की जरूरत है।
अमेरिकी टैरिफ और निर्यात पर असर
अमेरिकी सरकार द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का असर भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है। खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग और आईटी से जुड़े सेक्टर इस दबाव को महसूस कर रहे हैं। बजट से इन क्षेत्रों को राहत देने की उम्मीद की जा रही है।
रुपये की कमजोरी और बढ़ती चिंता
डॉलर के मुकाबले रुपये का 92 के स्तर तक पहुंचना अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। इससे आयात महंगा होता है और महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। बजट में ऐसे उपायों की उम्मीद है, जो रुपये को स्थिरता दें।
आम बजट 2026 से देश की 10 बड़ी उम्मीदें
- डिफेंस और रेलवे में निवेश
- देश को मजबूत सुरक्षा और बेहतर परिवहन की जरूरत है। डिफेंस और रेलवे सेक्टर में बड़े निवेश से रोजगार और आत्मनिर्भरता दोनों को बढ़ावा मिल सकता है।
- इंफ्रा और एक्सपोर्ट सेक्टर पर फोकस
इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात को गति देना आर्थिक विकास के लिए अहम माना जा रहा है। उद्योग जगत को टैक्स राहत और प्रोत्साहन की उम्मीद है। - ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी
ऑटो सेक्टर सुस्ती से जूझ रहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए बजट में नई योजनाओं की मांग है। - सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स
तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर विशेष पैकेज की उम्मीद जताई जा रही है। - रियल एस्टेट और केमिकल फर्टिलाइजर
आवास और कृषि से जुड़े इन क्षेत्रों में राहत मिलने से आम लोगों को सीधा फायदा हो सकता है। - तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का दर्जा बनाए रखना
भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का दर्जा बनाए रखने के लिए बजट में संतुलित और दूरदर्शी फैसले लेने होंगे। - आम आदमी और उद्योग दोनों की उम्मीदें
यह बजट सिर्फ आंकड़ों का नहीं, बल्कि भरोसे का बजट होना चाहिए। आम आदमी को राहत और उद्योग को प्रोत्साहन—दोनों का संतुलन ही इसकी सफलता तय करेगा।