बांग्लादेश की जेल से रिहाई के बाद 14 भारतीय मछुआरे अपने घर लौट आए हैं। तीन महीने की लंबी कैद के बाद उनके परिवारों की चिंता खत्म हुई है। दक्षिण 24 परगना जिले के फ्रेजरगंज मछली बंदरगाह पर इन मछुआरों को उनके परिवार के हवाले किया गया। यह रिहाई दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के बाद संभव हो सकी है।
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले साल 13 अक्टूबर को ‘एफबी शुभयात्रा’ नाम की नाव में सवार होकर 14 मछुआरे कुलतली से गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए निकले थे। सब कुछ सामान्य था, लेकिन 19 अक्टूबर को समुद्र के बीच में उनकी नाव का इंजन खराब हो गया। इंजन बंद होने के कारण नाव लहरों के साथ बहती हुई बांग्लादेश की समुद्री सीमा में चली गई।
घुसपैठ का आरोप
जैसे ही नाव बांग्लादेशी सीमा में पहुंची, वहां की नौसेना ने इन मछुआरों को पकड़ लिया। उन पर अवैध रूप से सीमा में घुसने का आरोप लगाया गया। बागेरहाट जिला अदालत के आदेश पर इन सभी मछुआरों को जेल भेज दिया गया। यह खबर सुनकर भारत में उनके परिवार वाले बेहद चिंतित हो गए थे।
तीन महीने तक इन मछुआरों के परिवार वाले अपने प्रियजनों की रिहाई के लिए प्रार्थना करते रहे। उन्होंने सरकार से भी मदद की गुहार लगाई। भारत सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और बांग्लादेश सरकार के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत शुरू की।
कूटनीतिक प्रयासों का नतीजा
भारत और बांग्लादेश के बीच कई दौर की बातचीत हुई। दोनों देशों के अधिकारियों ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए मिलकर काम किया। आखिरकार कूटनीतिक प्रयासों को सफलता मिली। दोनों देशों ने अपने-अपने मछुआरों को छोड़ने पर सहमति बनाई।
कल भारत-बांग्लादेश समुद्री सीमा पर दोनों देशों के तटरक्षक बल की मौजूदगी में मछुआरों की अदला-बदली की प्रक्रिया पूरी हुई। इस प्रक्रिया में भारत को कुल 23 मछुआरे वापस मिले। इसके बदले में भारत ने 115 बांग्लादेशी मछुआरों को उनकी सरकार के हवाले किया।
कहां के हैं ये मछुआरे
23 भारतीय मछुआरों में से 14 मछुआरे पश्चिम बंगाल के रहने वाले हैं। ये काकद्वीप, कुलतली और हुगली जिले के निवासी हैं। बाकी 9 मछुआरे आंध्र प्रदेश राज्य के रहने वाले हैं। पश्चिम बंगाल के मछुआरों को फ्रेजरगंज बंदरगाह पर लाया गया, जबकि आंध्र प्रदेश के मछुआरों को उनके राज्य भेज दिया गया।
फ्रेजरगंज बंदरगाह पर भावुक मिलन
फ्रेजरगंज मछली बंदरगाह पर मछुआरों को उनके परिवार के हवाले करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में काकद्वीप के अनुमंडल अधिकारी प्रीतम साहा मौजूद थे। पुलिस और तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारी भी वहां उपस्थित थे।
जब मछुआरे अपने परिवार वालों से मिले तो वहां का दृश्य बेहद भावुक था। तीन महीने बाद अपने प्रियजनों को देखकर परिवार वालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। माताएं अपने बेटों से लिपट कर रो पड़ीं। पत्नियां अपने पतियों को देखकर भावुक हो गईं। बच्चे अपने पिता से मिलकर खुशी से झूम उठे।
मछुआरों के परिवारों में आज त्योहार जैसा माहौल है। जो लोग तीन महीने से चिंता में डूबे थे, आज उनके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई है। घरों में मिठाई बांटी जा रही है। पड़ोसी और रिश्तेदार भी इस खुशी में शामिल हो रहे हैं।
मछुआरों ने जताया आभार
जेल से रिहा होकर आए मछुआरे भी बेहद भावुक थे। उन्होंने कहा कि तीन महीने बहुत मुश्किल से गुजरे। विदेश की जेल में बंद रहना बेहद कठिन अनुभव था। लेकिन उन्हें विश्वास था कि भारत सरकार उन्हें जरूर छुड़ाएगी।
मछुआरों ने भारत सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने कूटनीतिक प्रयास नहीं किए होते तो शायद उन्हें और लंबे समय तक जेल में रहना पड़ता। उन्होंने तटरक्षक बल और स्थानीय प्रशासन का भी आभार व्यक्त किया।
सीमा पार मछुआरों की समस्या
भारत और बांग्लादेश की समुद्री सीमा पर मछुआरों की गिरफ्तारी की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। कई बार मछुआरे अनजाने में दूसरे देश की सीमा में चले जाते हैं। खराब मौसम, इंजन की खराबी या समुद्र की तेज धाराओं के कारण ऐसा होता है।
दोनों देशों की सरकारें इस समस्या को समझती हैं। इसलिए समय-समय पर ऐसे मछुआरों को रिहा करके उनके देश भेजा जाता है। लेकिन कई बार इस प्रक्रिया में महीनों लग जाते हैं। इस दौरान मछुआरों और उनके परिवारों को बहुत तकलीफ झेलनी पड़ती है।
आगे की राह
इस घटना ने एक बार फिर इस मुद्दे को सामने ला दिया है कि मछुआरों की सुरक्षा के लिए बेहतर व्यवस्था की जरूरत है। नावों में आधुनिक तकनीक लगाई जानी चाहिए ताकि वे समुद्री सीमा की सही जानकारी रख सकें। इंजन की नियमित जांच और मरम्मत की व्यवस्था होनी चाहिए।
साथ ही दोनों देशों को मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे अनजाने में सीमा पार करने वाले मछुआरों को जल्द से जल्द रिहा किया जा सके। इससे मछुआरों और उनके परिवारों को होने वाली परेशानी कम होगी।
फिलहाल 14 मछुआरों की घर वापसी से उनके परिवारों में खुशी की लहर है। वे अब अपने जीवन को फिर से सामान्य बनाने की कोशिश करेंगे। हालांकि यह अनुभव उनके लिए जीवन भर याद रहेगा।