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नासा ने चंद्रमा मिशन को टाला, अब मार्च में होगी आर्टेमिस-2 की लॉन्चिंग

नासा ने चंद्रमा मिशन को टाला, अब मार्च में होगी आर्टेमिस-2 की लॉन्चिंग
NASA Artemis || Delayed, Full Details: नासा ने चंद्रमा मिशन को किया स्थगित, जानें नई लॉन्च डेट (File Photo)

NASA Artemis || Delayed, Full Details: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने आर्टेमिस-2 चंद्रमा मिशन को फरवरी से टालकर मार्च में कर दिया है। परीक्षण के दौरान लॉन्च पैड पर हाइड्रोजन रिसाव, संचार खराबी और कैमरों में समस्या मिली। चार अंतरिक्ष यात्री 10 दिन की चंद्रमा यात्रा पर जाएंगे। यह 50 साल बाद चंद्रमा पर मानव भेजने का मिशन है।

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Asfi Shadab
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NASA Artemis || Delayed, Full Details: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने महत्वाकांक्षी चंद्रमा मिशन आर्टेमिस-2 को टाल दिया है। यह मिशन इस महीने फरवरी में होना था लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण इसे अब मार्च महीने में लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चक्कर लगाकर वापस धरती पर लौटेंगे।

क्या है आर्टेमिस-2 मिशन

आर्टेमिस-2 नासा का एक बेहद खास अंतरिक्ष मिशन है जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा कुल 10 दिन की होगी जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाकर वापस धरती पर लौटेंगे। यह मिशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले 50 साल में किसी भी देश ने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर नहीं भेजा है। आखिरी बार 1972 में अपोलो मिशन के दौरान मनुष्य चंद्रमा पर गए थे।

नासा की लंबी योजना है कि भविष्य में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर रह सकें। आर्टेमिस-2 इसी दिशा में एक अहम कदम है। इस मिशन के सफल होने के बाद नासा अगले चरण में अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारने की योजना बना रहा है।

लॉन्च क्यों हुआ टला

नासा ने अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से 8 फरवरी को इस मिशन को लॉन्च करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन लॉन्च से पहले की तैयारी के दौरान कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं। नासा ने रॉकेट लॉन्च की ड्रेस रिहर्सल की जिसे ‘वेट रिहर्सल’ कहा जाता है। इस परीक्षण के दौरान कुछ गंभीर खामियां मिलीं।

परीक्षण के दौरान लॉन्च पैड पर हाइड्रोजन का रिसाव पकड़ में आया। यह रिसाव परीक्षण खत्म होने से करीब पांच मिनट पहले मिला। हाइड्रोजन एक खतरनाक गैस है और इसका रिसाव किसी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। इसलिए नासा ने तुरंत काउंटडाउन रोक दिया।

और क्या समस्याएं आईं

हाइड्रोजन रिसाव के अलावा कुछ और तकनीकी दिक्कतें भी सामने आईं। परीक्षण के दौरान ऑडियो संचार प्रणाली में खराबी आई। इसका मतलब है कि अंतरिक्ष यात्रियों और नियंत्रण केंद्र के बीच बातचीत में समस्या हो रही थी। यह एक गंभीर मामला है क्योंकि अंतरिक्ष में संचार बेहद जरूरी होता है।

इसके अलावा ठंडे मौसम का असर कुछ कैमरों पर भी पड़ा। ये कैमरे लॉन्च के दौरान रॉकेट की निगरानी के लिए जरूरी हैं। अगर कैमरे सही से काम नहीं करेंगे तो पूरी प्रक्रिया पर नजर रखना मुश्किल हो जाएगा।

नासा प्रमुख ने क्या कहा

नासा के प्रमुख जेरेड आइजैकमैन ने सोशल मीडिया पर इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ये परीक्षण इसीलिए किए जाते हैं ताकि असली उड़ान से पहले सभी समस्याओं का पता लग सके। उन्होंने कहा, “हम तभी लॉन्च करेंगे जब हमें लगेगा कि हम इस ऐतिहासिक मिशन के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

आइजैकमैन ने आगे कहा कि इस मिशन को सही तरीके से पूरा करने का मतलब है चंद्रमा पर स्थायी रूप से रहना और भविष्य में आर्टेमिस 100 तक और उससे आगे बढ़ना। उनके बयान से साफ है कि नासा जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहता।

कब होगी अब लॉन्चिंग

नासा ने अभी तक सही तारीख का ऐलान नहीं किया है। लेकिन एजेंसी ने कहा है कि आर्टेमिस-2 की लॉन्चिंग अब सबसे जल्द मार्च महीने में होगी। नासा आने वाले दिनों में और जानकारी देगी। इंजीनियर्स अभी सभी समस्याओं को ठीक करने में जुटे हुए हैं।

हाइड्रोजन रिसाव की समस्या को सुलझाना सबसे जरूरी है। इसके साथ ही संचार प्रणाली और कैमरों को भी पूरी तरह दुरुस्त किया जाएगा। नासा चाहता है कि जब रॉकेट लॉन्च हो तो सब कुछ बिल्कुल सही हो।

क्या है स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट

आर्टेमिस-2 मिशन के लिए नासा ने स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट बनाया है। यह अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है जिसे नासा ने तैयार किया है। इस रॉकेट में चार अंतरिक्ष यात्री सवार होकर चंद्रमा की यात्रा पर जाएंगे।

यह रॉकेट बेहद जटिल तकनीक से बना है। इसमें हजारों पुर्जे हैं और सभी को बिल्कुल सही तरीके से काम करना जरूरी है। एक छोटी सी गलती भी पूरे मिशन को खतरे में डाल सकती है। इसीलिए नासा इतनी सावधानी बरत रहा है।

चंद्रमा पर रहने की योजना

नासा का लक्ष्य सिर्फ चंद्रमा तक जाना और वापस आना नहीं है। एजेंसी चाहती है कि भविष्य में लोग चंद्रमा पर रह सकें। इसके लिए वहां एक स्थायी बेस बनाया जाएगा जहां अंतरिक्ष यात्री महीनों तक रह सकेंगे।

यह योजना कई चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएंगे। दूसरे चरण में वे चंद्रमा की सतह पर उतरेंगे। तीसरे चरण में वहां रहने की व्यवस्था बनाई जाएगी। आर्टेमिस-2 इस बड़ी योजना का पहला कदम है।

अंतरिक्ष अन्वेषण का नया दौर

NASA Artemis || Delayed, Full Details: पिछले 50 सालों में अंतरिक्ष विज्ञान में बहुत तरक्की हुई है। आज की तकनीक 1970 के दशक से कहीं ज्यादा विकसित है। नासा इस नई तकनीक का इस्तेमाल करके चंद्रमा पर एक बार फिर मनुष्य भेजने जा रहा है।

इस बार का मिशन पहले से अलग होगा। इसमें महिला अंतरिक्ष यात्री भी शामिल होंगी। नासा ने कहा है कि वह पहली महिला और पहले अश्वेत व्यक्ति को भी चंद्रमा पर भेजेगा। यह अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय होगा।

सुरक्षा सबसे पहले

नासा के लिए अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। इसीलिए एजेंसी हर छोटी से छोटी समस्या को गंभीरता से लेती है। हाइड्रोजन रिसाव जैसी किसी भी खराबी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

परीक्षण के दौरान मिली समस्याओं की वजह से मिशन टलना निराशाजनक जरूर है लेकिन यह सही फैसला है। अंतरिक्ष यात्रा में जल्दबाजी घातक साबित हो सकती है। इतिहास में ऐसी कई दुर्घटनाएं हुई हैं जहां छोटी गलतियों ने बड़ी त्रासदी को जन्म दिया।

आर्टेमिस-2 मिशन सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है। यह मिशन भविष्य में चंद्रमा और फिर मंगल ग्रह पर मनुष्य के पहुंचने का रास्ता खोलेगा। इसलिए नासा इसे पूरी तैयारी के साथ अंजाम देना चाहता है। मार्च महीने में जब यह रॉकेट लॉन्च होगा तो पूरी दुनिया की निगाहें इस पर टिकी होंगी।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।