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गोंडा में 1.48 लाख नो मैपिंग वाले मतदाताओं को नोटिस जारी, 79 हजार से अधिक दावा-आपत्तियां प्राप्त

SIR in UP: गोंडा में 1.48 लाख मतदाताओं को नोटिस, विशेष पुनरीक्षण अभियान जारी
SIR in UP: गोंडा में 1.48 लाख मतदाताओं को नोटिस, विशेष पुनरीक्षण अभियान जारी (File Photo)

SIR in UP: गोंडा में विधानसभा मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में 1.48 लाख नो मैपिंग वाले मतदाताओं को नोटिस जारी। 2978 बूथों पर 79 हजार से अधिक दावा-आपत्तियां प्राप्त हुईं। 4.69 लाख मतदाता सूची से हटे। डीएम प्रियंका निरंजन ने निरीक्षण कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 13 हजार से अधिक नोटिसों की सुनवाई पूरी हो चुकी है।

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SIR in UP: गोंडा जिले में विधानसभा निर्वाचक नामावली के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रशासन ने नो मैपिंग वाले 1.48 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी की है। यह कदम मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जिले के 2978 बूथों पर चलाए गए इस विशेष अभियान में 79 हजार से अधिक दावा और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं।

गोंडा के जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने स्वयं सदर तहसील के विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण करते हुए इस अभियान की प्रगति का जायजा लिया है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से छूटने न पाए।

मतदाता सूची में बड़े बदलाव

विशेष पुनरीक्षण अभियान शुरू होने से पहले गोंडा जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में कुल 25.52 लाख मतदाता पंजीकृत थे। लेकिन इस व्यापक सफाई अभियान के बाद मतदाताओं की संख्या घटकर 20.82 लाख रह गई है। इस प्रक्रिया में कुल 4.69 लाख मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो गए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि मतदाता सूची में कितनी बड़ी संख्या में अनियमितताएं मौजूद थीं।

जिले में नो मैपिंग वाले कुल 1.55 लाख मतदाता चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 1.48 लाख मतदाताओं को अब तक नोटिस जारी की जा चुकी है। नो मैपिंग का मतलब है कि ऐसे मतदाता जिनके निवास स्थान का सही पता या मानचित्र पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे मतदाताओं की पहचान करना और उनका सत्यापन करना चुनाव आयोग की प्राथमिकता है।

नोटिसों की सुनवाई में तेजी

जिले में नियुक्त सात निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और 123 सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) इस कार्य में पूरी तत्परता से जुटे हुए हैं। अब तक इन अधिकारियों ने 13 हजार से अधिक नोटिसों की सुनवाई पूरी कर ली है। यह प्रक्रिया लगातार जारी है और प्रशासन का प्रयास है कि सभी नोटिसों की सुनवाई समय पर पूरी हो जाए।

सुनवाई के दौरान मतदाताओं को अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने और अपनी पात्रता सिद्ध करने का पूरा अवसर दिया जा रहा है। जो मतदाता अपनी पात्रता सिद्ध कर देते हैं, उनके नाम सूची में बरकरार रखे जाते हैं।

बूथ स्तर पर विशेष शिविर

जिले के कुल 2978 मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा विशेष शिविर का आयोजन किया गया। इन शिविरों में मतदाताओं से नाम जोड़ने, हटाने या सूची में संशोधन के लिए आवेदन प्राप्त किए गए। कुल मिलाकर 79 हजार से अधिक दावे और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं।

ये शिविर मतदाताओं की सुविधा के लिए उनके निवास स्थान के पास ही आयोजित किए गए ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान का लाभ उठा सकें। बीएलओ ने घर-घर जाकर मतदाताओं को इस अभियान के बारे में जागरूक भी किया।

डीएम ने किया निरीक्षण

जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने सदर तहसील के कई मतदान केंद्रों का अचानक निरीक्षण किया। उन्होंने बीएलओ से मिलकर प्राप्त आवेदनों की स्थिति और उन पर की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी ली। डीएम ने इस बात पर जोर दिया कि सभी दावे और आपत्तियां भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निपटाई जाएं।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ है और इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या अनियमितता लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करती है। इसलिए यह जरूरी है कि सूची में केवल वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम ही शामिल हों।

विशेष श्रेणी के मतदाताओं पर फोकस

जिलाधिकारी ने बीएलओ को विशेष निर्देश दिए कि प्रथम बार मतदान करने वाले युवाओं, महिला मतदाताओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। इन वर्गों के लोगों को अभियान के बारे में जागरूक करने और उन्हें आवेदन प्रक्रिया में आवश्यक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।

डीएम ने स्वयं कई मतदाताओं से बातचीत की और जाना कि उन्हें आवेदन करने में किसी प्रकार की कठिनाई तो नहीं हो रही है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि जिन पात्र नागरिकों का नाम अभी तक मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, वे इस विशेष अभियान का लाभ उठाकर अपना नाम अवश्य जुड़वाएं।

पारदर्शिता पर जोर

प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। सभी आवेदनों और आपत्तियों का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा रहा है। मतदाता अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन भी देख सकते हैं।

जिलाधिकारी ने कहा कि यदि किसी मतदाता को सूची में कोई त्रुटि दिखाई देती है तो वह निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से आपत्ति दर्ज करा सकता है। सभी आपत्तियों की उचित जांच की जाएगी और सही पाए जाने पर उन्हें दूर किया जाएगा।

आगे की रणनीति

SIR in UP: अभी भी लगभग 1.35 लाख नोटिसों की सुनवाई शेष है। प्रशासन ने इस कार्य को शीघ्र पूरा करने के लिए अधिकारियों की संख्या बढ़ाने और सुनवाई के घंटे बढ़ाने का निर्णय लिया है। साथ ही मतदाताओं को अधिक से अधिक सुविधा देने के लिए सप्ताहांत में भी विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

यह पुनरीक्षण अभियान न केवल मतदाता सूची को साफ और सटीक बनाएगा बल्कि भविष्य के चुनावों को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। गोंडा प्रशासन का यह प्रयास लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।