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जनवरी 2026 में नागपुर की हवा सबसे ज्यादा खराब, जीपीओ क्षेत्र बना प्रदूषण का केंद्र

Nagpur Air Pollution January 2026
जनवरी 2026 में नागपुर की हवा सबसे ज्यादा खराब, जीपीओ क्षेत्र बना प्रदूषण का केंद्र

जनवरी 2026 में नागपुर का जीपीओ क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा, जहां 31 में से 30 दिन खराब हवा दर्ज हुई। PM2.5 का स्तर लगातार ऊंचा रहा। विशेषज्ञों ने बढ़ते प्रदूषण को स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया और सख्त कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया।

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Nagpur Air Pollution January 2026: पिछले कई वर्षों तक विदर्भ क्षेत्र में प्रदूषण की पहचान चंद्रपुर से जुड़ी रही, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। जनवरी 2026 के आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि नागपुर शहर अब इस क्षेत्र का सबसे प्रदूषित इलाका बनता जा रहा है। खासतौर पर नागपुर का जीपीओ (जनरल पोस्ट ऑफिस) क्षेत्र, जहां पूरे महीने लोगों को लगभग हर दिन खराब हवा में सांस लेनी पड़ी।

महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संयुक्त निरीक्षण में सामने आया है कि जनवरी 2026 में जीपीओ क्षेत्र में 31 में से 30 दिन वायु प्रदूषण दर्ज किया गया। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि शहर के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर मंडराते खतरे की चेतावनी है।

जनवरी 2026 में नागपुर की हवा का हाल

जनवरी के पूरे महीने में नागपुर की हवा सामान्य रहने का एक भी दिन दर्ज नहीं हुआ। AQI के पैमाने पर देखा जाए तो 0 से 50 की “अच्छी” श्रेणी में एक भी दिन नहीं रहा। यह स्थिति अपने आप में गंभीर संकेत देती है कि प्रदूषण अब अस्थायी नहीं, बल्कि लगातार बना रहने वाली समस्या बन चुका है।

जीपीओ क्षेत्र में 25 दिन हवा “प्रदूषित” श्रेणी में रही, जबकि 9 दिन “अत्यधिक प्रदूषित” श्रेणी में दर्ज किए गए। राहत की बात सिर्फ इतनी रही कि हवा “गंभीर” श्रेणी तक नहीं पहुंची, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यही रुझान जारी रहा तो आने वाले महीनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।

PM2.5 ने बढ़ाई सबसे ज्यादा चिंता

प्रदूषण के आंकड़ों में सबसे बड़ा खतरा PM2.5 कणों से सामने आया। ये बेहद सूक्ष्म कण होते हैं जो सीधे फेफड़ों और रक्त प्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं। जनवरी 2026 में जीपीओ क्षेत्र में 28 दिन PM2.5 का स्तर तय मानकों से ऊपर रहा।

पर्यावरण विशेषज्ञ प्रो. सुरेश चोपने के अनुसार, “PM2.5 का लगातार ऊंचा स्तर रहना श्वसन रोग, हृदय संबंधी बीमारियों और कमजोर इम्यूनिटी का बड़ा कारण बन सकता है। इसका असर बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा पड़ता है।”

महाल, रामनगर और अंबाझरी की भी हालत खराब

केवल जीपीओ ही नहीं, बल्कि महाल, रामनगर और अंबाझरी जैसे इलाकों में भी जनवरी के दौरान हवा की गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में बनी रही। इन क्षेत्रों में भी पूरे महीने साफ हवा के दिन गिनती में नहीं आए।

शहर के कई हिस्सों में सुबह और देर शाम धुंध की चादर नजर आई, जिसे अक्सर लोग कोहरा समझ बैठते हैं, जबकि असल में यह प्रदूषण का असर होता है।

क्यों बढ़ रहा है नागपुर में प्रदूषण

नागपुर में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे एक नहीं, बल्कि कई कारण जिम्मेदार हैं। सर्दियों के मौसम में हवा की गति धीमी हो जाती है, जिससे प्रदूषक तत्व वातावरण में ही फंसे रहते हैं।

इसके अलावा वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या, खुले में कचरा जलाना, निर्माण कार्य, थर्मल पावर प्लांट, औद्योगिक गतिविधियां और बायोमास जलाना भी प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं। कई इलाकों में नियमों के बावजूद कचरा जलाने की घटनाएं आम होती जा रही हैं।

स्वास्थ्य पर दिखने लगे हैं असर

नागपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। दमा, एलर्जी, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोग के मामले बढ़े हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक खराब हवा में रहने से बच्चों के फेफड़ों का विकास भी प्रभावित हो सकता है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।