Budget 2026 Income Tax: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में आम बजट 2026 पेश किया। जैसे ही उन्होंने अपने भाषण में आयकर का जिक्र शुरू किया, मिडिल क्लास, नौकरीपेशा और टैक्स देने वाले करोड़ों लोगों की निगाहें एकटक टीवी स्क्रीन पर टिक गईं। हर साल की तरह इस बार भी लोगों को उम्मीद थी कि सरकार उनकी जेब पर पड़ने वाले बोझ को कुछ हल्का करेगी, लेकिन बजट भाषण के खत्म होते-होते यह साफ हो गया कि आयकर के मोर्चे पर आम आदमी को कोई सीधी राहत नहीं मिलने वाली है।
सरकार की ओर से आयकर स्लैब में किसी तरह की कटौती या छूट का ऐलान नहीं किया गया। उल्टा, टैक्स से जुड़े दो ऐसे फैसले सामने आए, जिन्होंने न सिर्फ करदाताओं को निराश किया, बल्कि शेयर बाजार पर भी तुरंत असर डाल दिया।
आयकर को लेकर सरकार के दो बड़े फैसले
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में आयकर से जुड़े दो अहम ऐलान किए। पहला, नया इनकम टैक्स सिस्टम 1 अप्रैल से पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। इसके तहत सभी आयकर रिटर्न फॉर्म में बदलाव किया जाएगा और जल्द ही नए फॉर्म को अधिसूचित किया जाएगा। इसका मतलब साफ है कि अब करदाताओं को नए नियमों के अनुसार ही अपनी आय का विवरण देना होगा।
दूसरा और ज्यादा चर्चा में रहने वाला फैसला शेयर बाजार से जुड़े टैक्स को लेकर रहा। सरकार ने शेयर बाजार में होने वाले कुछ ट्रांजेक्शनों पर टैक्स की दर बढ़ा दी, जिससे निवेशकों और ट्रेडर्स की चिंता बढ़ गई।
[read_more title=”Budget 2026: क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा ? एक क्लिक में जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर” url=”https://rashtrabharat.com/business-news/union-budget-2026-cheap-expensive-items-custom-duty/”]
आयकर में राहत क्यों नहीं मिली
पिछले कुछ वर्षों से महंगाई लगातार बढ़ रही है। खाने-पीने की चीजों से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और घर के खर्च तक हर चीज महंगी हो चुकी है। ऐसे में नौकरीपेशा वर्ग को उम्मीद थी कि सरकार आयकर स्लैब में बदलाव करेगी या कम से कम कुछ अतिरिक्त छूट देगी। लेकिन बजट 2026 में ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला।
सरकार का तर्क है कि टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और अनुपालन बढ़ाने के लिए नए टैक्स ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि आम करदाता के लिए यह बात फिलहाल राहत से ज्यादा असमंजस पैदा करने वाली है।
शेयर बाजार पर टैक्स बढ़ने का असर
बजट का सबसे बड़ा झटका शेयर बाजार को लगा। वित्त मंत्री ने फ्यूचर ट्रेडिंग से जुड़े ट्रांजेक्शन टैक्स को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया। यह बढ़ोतरी भले ही आंकड़ों में छोटी लगे, लेकिन बड़े पैमाने पर ट्रेड करने वालों के लिए यह सीधा मुनाफा कम करने वाला फैसला है।
इसी ऐलान का असर था कि बजट भाषण खत्म होते ही शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई और कुछ ही देर में बाजार हजार अंकों तक फिसल गया। खासकर बैंकिंग, आईटी और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों में दबाव साफ नजर आया।
मिडिल क्लास की बढ़ती चिंता
इस बजट से मिडिल क्लास को सबसे ज्यादा निराशा हाथ लगी है। एक तरफ महंगाई का दबाव लगातार बना हुआ है, दूसरी तरफ आयकर में कोई राहत नहीं दी गई। ऊपर से शेयर बाजार में टैक्स बढ़ने से उन लोगों को भी झटका लगा है, जो अपनी बचत का कुछ हिस्सा निवेश के जरिए बढ़ाने की कोशिश करते हैं।
नौकरीपेशा लोगों का मानना है कि सरकार को कम से कम टैक्स स्लैब में संशोधन करना चाहिए था, ताकि बढ़ती महंगाई का कुछ असर कम किया जा सके।
सरकार का फोकस किस पर रहा
बजट 2026 में सरकार का फोकस टैक्स राहत देने से ज्यादा टैक्स सिस्टम को स्थिर और सख्त बनाने पर नजर आया। नए इनकम टैक्स नियमों को लागू करने की तैयारी, आईटीआर फॉर्म में बदलाव और शेयर बाजार पर टैक्स बढ़ाना इसी दिशा की ओर इशारा करता है।
सरकार का दावा है कि इन फैसलों से लंबे समय में टैक्स बेस बढ़ेगा और राजस्व में स्थिरता आएगी, जिससे विकास योजनाओं को मजबूती मिलेगी। लेकिन फिलहाल आम आदमी को इसका फायदा तुरंत मिलता नजर नहीं आ रहा।