नागपुर चुनाव में ईवीएम पर उठे सवाल
Nagpur Municipal Election 2026: महाराष्ट्र के नागपुर शहर में हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम चुनाव को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय देश क्रांति पार्टी ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम में धांधली का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि 16 जनवरी 2026 को जो चुनाव परिणाम घोषित किए गए, वे पूरी तरह से पारदर्शी नहीं थे और सत्ताधारी पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए मशीनों में हेराफेरी की गई। इस गंभीर आरोप के बाद पार्टी ने राज्य चुनाव आयोग और जिला चुनाव आयोग के सामने औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई है और पुराने तरीके से यानी बैलेट पेपर के जरिए दोबारा चुनाव कराने की मांग उठाई है।
30 जनवरी 2026 को भारतीय देश क्रांति पार्टी के प्रतिनिधियों ने एक विस्तृत लिखित निवेदन दोनों चुनाव आयोगों को सौंपा। इस निवेदन में चुनाव प्रक्रिया के दौरान हुई कई गड़बड़ियों का जिक्र किया गया है। पार्टी का मानना है कि लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत बनाए रखने के लिए चुनाव प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए, लेकिन नागपुर में जो कुछ हुआ वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
मतदान केंद्रों पर क्या हुई गड़बड़ी
भारतीय देश क्रांति पार्टी ने अपनी शिकायत में बताया है कि 15 जनवरी 2026 को जब नागपुर नगर निगम का चुनाव हुआ था, तब कई मतदान केंद्रों पर ईवीएम मशीनें ठीक से काम नहीं कर रही थीं। कुछ जगहों पर तो मशीनें पूरी तरह से बंद पड़ी रहीं और मतदाताओं को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। यह स्थिति लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डालने वाली मानी जा रही है।
इसके अलावा पार्टी ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि वीवीपैट यानी वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल का कहीं भी सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया गया। वीवीपैट की खासियत यह है कि इससे मतदाता को यह पुष्टि हो जाती है कि उसका वोट सही उम्मीदवार को गया है या नहीं। लेकिन नागपुर चुनाव में इसकी अनदेखी की गई, जिससे मतदाताओं में भ्रम और संदेह की स्थिति बनी रही।
वोट किसी और को, दर्ज किसी और के नाम
भारतीय देश क्रांति पार्टी के आरोपों में सबसे गंभीर बात यह है कि कई मतदाताओं ने शिकायत की है कि उन्होंने जिस उम्मीदवार के नाम पर बटन दबाया, वोट किसी और उम्मीदवार के नाम पर दर्ज हो गया। यह तकनीकी खामी या जानबूझकर की गई धांधली, दोनों ही स्थितियों में यह बेहद चिंताजनक है। लोकतंत्र में हर मतदाता का वोट अनमोल होता है और अगर वह सही तरीके से दर्ज नहीं होता तो पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवालिया निशान लग जाता है।
पार्टी ने कहा कि यह घटना एक या दो जगह नहीं बल्कि कई मतदान केंद्रों पर देखी गई। मतदाताओं ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि उन्हें अपने वोट की सही जानकारी नहीं मिल पाई। इससे उनका भरोसा चुनाव प्रक्रिया से उठ गया है।
चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पर सवाल
भारतीय देश क्रांति पार्टी ने अपने निवेदन में चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग का सबसे बड़ा कर्तव्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी, साफ सुथरा और भरोसेमंद तरीके से हो। लेकिन नागपुर में जो कुछ हुआ उससे साफ है कि आयोग इस जिम्मेदारी में विफल रहा है।
पार्टी का तर्क है कि जब मतदाता को ही यह विश्वास नहीं हो कि उसका वोट सही जगह पहुंचा है या नहीं, तो ऐसे चुनाव को किसी भी हालत में पारदर्शी या स्वतंत्र नहीं कहा जा सकता। यह लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करने वाली बात है और इसे गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है।
बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव की मांग
इन सभी आरोपों और गड़बड़ियों के चलते भारतीय देश क्रांति पार्टी ने एक बड़ी मांग रखी है। पार्टी ने नागपुर नगर निगम चुनाव को पूरी तरह से रद्द करने और पुराने तरीके यानी बैलेट पेपर के जरिए दोबारा चुनाव कराने की मांग की है। पार्टी का मानना है कि बैलेट पेपर से होने वाले चुनाव में किसी भी तरह की हेराफेरी की गुंजाइश नहीं होती और मतदाता को भी पूरा भरोसा रहता है कि उसका वोट सही उम्मीदवार को मिला है।
पार्टी ने साफ तौर पर कहा है कि वे ईवीएम मशीनों का विरोध करती है और लोकतंत्र में बैलेट पेपर आधारित चुनाव को ही सबसे विश्वसनीय और भरोसेमंद मानती है। उनका कहना है कि दुनिया के कई विकसित देशों में आज भी बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है और वहां की चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी मानी जाती है।
अगर मांग नहीं मानी गई तो आगे की रणनीति
भारतीय देश क्रांति पार्टी ने अपनी चेतावनी में यह भी साफ किया है कि अगर चुनाव आयोग उनकी मांग नहीं मानता और दोबारा चुनाव नहीं कराता, तो वे अपने स्तर पर कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे। पार्टी ने कहा है कि जिन जी प्रभागों में उनके उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था, वहां वे दावेदारी पेश करेंगे और बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव कराने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे।
पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि यह सिर्फ नागपुर का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे देश में ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। अगर एक शहर में इतनी गड़बड़ियां हो सकती हैं तो दूसरे शहरों में भी ऐसा हो सकता है। इसलिए चुनाव आयोग को गंभीरता से इस मामले की जांच करनी चाहिए और जल्द से जल्द फैसला लेना चाहिए।
ईवीएम बनाम बैलेट पेपर की बहस
Nagpur Municipal Election 2026: यह पहली बार नहीं है जब ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। देश के कई राजनीतिक दल और नागरिक संगठन पहले भी ईवीएम में हेराफेरी की आशंका जता चुके हैं। कुछ लोगों का मानना है कि ईवीएम में तकनीकी रूप से छेड़छाड़ की जा सकती है और परिणामों को प्रभावित किया जा सकता है, जबकि बैलेट पेपर में हर वोट भौतिक रूप से मौजूद होता है और उसकी दोबारा गिनती भी आसानी से हो सकती है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सरकार का मानना है कि ईवीएम पूरी तरह से सुरक्षित और भरोसेमंद हैं। उनका कहना है कि ईवीएम से मतदान प्रक्रिया तेज, आसान और कम खर्चीली हो जाती है। लेकिन जब तक मतदाताओं का भरोसा पूरी तरह से नहीं बनता, तब तक यह बहस जारी रहेगी।
जनता की राय और विश्वास बहाल करना जरूरी
नागपुर चुनाव विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। अगर मतदाता को यह भरोसा नहीं होगा कि उसका वोट सही तरीके से दर्ज हो रहा है, तो लोकतंत्र की नींव कमजोर हो जाएगी। ऐसे में चुनाव आयोग को इन आरोपों की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और जो भी कमियां हों, उन्हें दूर करना चाहिए।
भारतीय देश क्रांति पार्टी की मांग सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की सेहत से जुड़ा हुआ मामला है। अगर चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होगी तो जनता का भरोसा खत्म हो जाएगा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे।
चुनाव आयोग को अब यह तय करना होगा कि वे इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या कोई ठोस कदम उठाने की तैयारी है। नागपुर की जनता और पूरे देश की नजरें अब चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हुई हैं।