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मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा- कानूनी जागरूकता से ही बनेगा सशक्त समाज

Legal Services Camp In Bhiwapur Maharashtra: मुंबई उच्च न्यायालय ने कानूनी जागरूकता पर दिया जोर, नागपुर में हुआ विधि सेवा शिविर
Legal Services Camp In Bhiwapur Maharashtra: मुंबई उच्च न्यायालय ने कानूनी जागरूकता पर दिया जोर, नागपुर में हुआ विधि सेवा शिविर (File Photo)

Legal Services Camp In Bhiwapur Maharashtra: मुंबई उच्च न्यायालय नागपुर खंडपीठ के न्यायमूर्ति अनिल किलोर ने भिवापुर तहसील के नक्षी गांव में आयोजित विधि सेवा महाशिविर में कहा कि सशक्त समाज के लिए कानूनी जागरूकता जरूरी है। कार्यक्रम में 40 विभागों ने स्टॉल लगाए और ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ दिया गया।

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नक्षी गांव में लगा विधि सेवा महाशिविर

Legal Services Camp In Bhiwapur Maharashtra: महाराष्ट्र के नागपुर जिले के भिवापुर तहसील स्थित नक्षी गांव में एक खास आयोजन हुआ। यहां विधि सेवा महाशिविर और शासकीय योजनाओं का महामेला लगाया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में जागरूक करना था। साथ ही सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उनका सीधा लाभ पहुंचाना भी इस आयोजन का हिस्सा था। मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के न्यायमूर्ति अनिल किलोर इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे।

न्यायमूर्ति किलोर ने दिया जागरूकता का संदेश

न्यायमूर्ति अनिल किलोर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी समाज को सशक्त बनाने के लिए जरूरी है कि वहां के नागरिकों को कानून की जानकारी हो। उन्होंने कहा कि जब लोग अपने अधिकारों को जानते हैं तभी वे समाज में सही तरीके से अपनी भूमिका निभा सकते हैं। न्यायमूर्ति ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को याद करते हुए कहा कि उनके द्वारा दिए गए संविधान में हर नागरिक को बराबर के अधिकार दिए गए हैं। इन्हीं अधिकारों के आधार पर सरकार ने अलग-अलग योजनाएं बनाई हैं ताकि समाज के हर वर्ग को विकास का मौका मिल सके।

राष्ट्रीय और राज्य विधि सेवा प्राधिकरण की पहल

यह आयोजन राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और महाराष्ट्र राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के तहत किया गया था। इस तरह के शिविर देश के अलग-अलग हिस्सों में लगाए जाते हैं जिससे आम लोगों को कानूनी मदद मिल सके और वे अपनी समस्याओं का समाधान आसानी से कर सकें। विधि सेवा प्राधिकरण का मुख्य काम गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता देना है। इस शिविर में भी यही प्रयास किया गया कि ग्रामीणों को उनकी परेशानियों के हल मिल सकें।

कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मुंबई उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रफुल्ल खुबाळकर भी उपस्थित थे। स्थानीय विधायक संजय मेश्राम और जिलाधिकारी विपीन इटनकर सहित कई अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए। सभी ने मिलकर ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने अधिकारों का इस्तेमाल करें और सरकारी योजनाओं का भरपूर फायदा उठाएं। इन सभी की उपस्थिति से कार्यक्रम में खासा उत्साह देखने को मिला।

40 विभागों के स्टॉल से मिली जानकारी

मेले में लगभग 40 सरकारी विभागों ने अपने-अपने स्टॉल लगाए। इन स्टॉलों पर ग्रामीणों को विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला कल्याण और ग्रामीण विकास जैसे कई विभागों ने हिस्सा लिया। लोगों को बताया गया कि किस योजना का लाभ कैसे मिल सकता है और इसके लिए कौन-कौन से कागजात जरूरी हैं। कई लोगों ने मौके पर ही आवेदन भी किए। यह व्यवस्था इसलिए की गई थी ताकि लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

पात्र लाभार्थियों को मिले ट्रैक्टर, ड्रोन और साइकिल

इस कार्यक्रम में पात्र लाभार्थियों को कई तरह की चीजें सीधे बांटी गईं। किसानों को ट्रैक्टर और ड्रोन दिए गए जिससे वे आधुनिक खेती कर सकें। छात्रों को साइकिल दी गईं ताकि वे आसानी से स्कूल जा सकें। इसके अलावा जरूरी प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए। सबसे खास बात यह रही कि कई किसानों को उनकी जमीन के पट्टे भी दिए गए। यह उनके लिए बहुत बड़ी राहत थी क्योंकि अब वे कानूनी रूप से जमीन के मालिक बन गए हैं।

झाड़ी जंगल भूमि का मुद्दा हुआ साफ

अधिकारियों ने बताया कि झाड़ी जंगल भूमि से जुड़ा मुद्दा सुलझने की दिशा में काम चल रहा है। इस मामले में हजारों हेक्टेयर जमीन अटकी हुई है। जैसे-जैसे यह मुद्दा सुलझेगा, पात्र किसानों को उनकी जमीन का स्वामित्व मिलेगा। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे बिना किसी डर के खेती कर सकेंगे। यह कदम ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए बहुत जरूरी है।

ग्रामीणों ने दिखाया खूब उत्साह

Legal Services Camp In Bhiwapur Maharashtra: इस आयोजन में हजारों की संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। उन्होंने अलग-अलग स्टॉलों पर जाकर जानकारी ली और अपनी समस्याएं भी रखीं। कई लोगों का कहना था कि इस तरह के कार्यक्रम उनके गांव में पहली बार हुआ है। उन्हें यह जानकर खुशी हुई कि सरकार उनके लिए इतनी सारी योजनाएं चला रही है। अब उन्हें उम्मीद है कि वे इन योजनाओं का फायदा उठाकर अपनी जिंदगी बेहतर बना सकेंगे।

समाज को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि ग्रामीणों को उनके अधिकारों और योजनाओं से जोड़ने की एक सार्थक पहल साबित हुआ। जब लोग अपने अधिकार जानते हैं तो वे खुद को समाज का सक्रिय हिस्सा मानते हैं। इससे न केवल व्यक्ति बल्कि पूरा समाज मजबूत होता है। न्यायमूर्ति किलोर ने भी यही संदेश दिया कि कानूनी जागरूकता ही सच्चे सशक्त समाज की नींव है। आने वाले समय में इस तरह के और भी आयोजनों की जरूरत है ताकि हर गांव तक यह जागरूकता पहुंच सके।

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Asfi Shadab

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