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शेयर बाजार में भारी गिरावट, दो दिन में डूबे 14 लाख करोड़, सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम

शेयर बाजार में भारी गिरावट, दो दिन में डूबे 14 लाख करोड़, सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम
शेयर बाजार में भारी गिरावट, दो दिन में डूबे 14 लाख करोड़, सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम

शेयर बाजार में लगातार गिरावट से निवेशकों को भारी नुकसान हो रहा है। दो दिनों में करीब 14 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति घट गई है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

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Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले दो दिनों से बाजार में लगातार भारी गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है। कल गुरुवार को जहां निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, वहीं आज शुक्रवार को भी बाजार में गिरावट जारी रही और करीब 8 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई। इस तरह सिर्फ दो दिनों में ही निवेशकों को लगभग 14 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।

बैंक निफ्टी में भी बड़ी गिरावट

बाजार में गिरावट का असर बीएसई के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पर भी पड़ा है। अब यह घटकर करीब 432 लाख करोड़ रुपये रह गया है। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स करीब 1300 अंक टूटकर 74,730 के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं निफ्टी 50 भी करीब 453 अंक गिरकर 23,185 के स्तर पर पहुंच गया। बैंकिंग सेक्टर भी इस गिरावट से बच नहीं पाया और बैंक निफ्टी में भी 1300 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखी गई।

करीब 27 शेयरों में गिरावट

सेंसेक्स की टॉप 30 कंपनियों में से ज्यादातर के शेयर लाल निशान में रहे। करीब 27 शेयरों में गिरावट देखने को मिली, जबकि सिर्फ तीन शेयर ही बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। टाटा स्टील, बीईएल, इंडिगो और एलएंडटी जैसी कंपनियों के शेयरों में करीब 6 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।

क्या है गिरावट की बड़ी वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी है। खबर है कि ईरान ने दो तेल टैंकरों पर हमला किया है, जिसके बाद दुनिया भर में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।

बाजार पर एक और दबाव विदेशी निवेशकों की बिकवाली का भी है। आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। वहीं निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली बैठक पर भी टिकी हुई है, जिसमें ब्याज दरों को लेकर फैसला लिया जा सकता है।

Disclaimer: यह लेख केवल जानकारी और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। इसे किसी भी प्रकार की निवेश सलाह या सिफ़ारिश न समझें। शेयर बाज़ार में निवेश जोखिमपूर्ण है। कृपया निवेश से पहले सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें और केवल SEBI-रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार से परामर्श करें। इस लेख के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय या हानि की ज़िम्मेदारी लेखक/प्रकाशक की नहीं होगी।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।