
मई में ही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, रात में भी नहीं मिल रही राहत
North India Heatwave: उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी और खतरनाक हीटवेव की चपेट में है। मई महीने के तीसरे सप्ताह में ही हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के कई शहरों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। भारतीय मौसम विभाग ने कई राज्यों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों को बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी गर्मी से तुरंत राहत मिलने की संभावना कम है। तेज धूप, गर्म हवाओं और उमस ने लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित कर दिया है। दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आ रही हैं और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।
दिल्ली से राजस्थान तक तप रही जमीन
दिल्ली-एनसीआर में लगातार तीसरे दिन तापमान 46 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया। वहीं राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में हालात और भी गंभीर बने हुए हैं। यूपी के बांदा और झांसी जैसे इलाकों में पारा 47 से 48 डिग्री तक पहुंच गया। बिहार और मध्य प्रदेश में भी लू के थपेड़ों ने लोगों को परेशान कर दिया है।रात के समय भी तापमान सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है, जिसके कारण लोगों को राहत नहीं मिल पा रही। गर्म हवाओं के कारण बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है और कई शहरों में बिजली कटौती की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और सांस संबंधी बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं।
आखिर क्यों पड़ रही है इतनी खतरनाक गर्मी?
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत में इस बार गर्मी का प्रकोप सामान्य से अधिक है। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। पश्चिमी विक्षोभ की कमी के कारण उत्तर भारत में ठंडी हवाएं नहीं पहुंच पा रही हैं। दूसरी ओर राजस्थान और पाकिस्तान की तरफ से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएं तापमान को लगातार बढ़ा रही हैं। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन भी बड़ी वजह माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में हीटवेव की अवधि और तीव्रता दोनों बढ़ी हैं। शहरों में तेजी से बढ़ता कंक्रीट और हरियाली की कमी भी तापमान को बढ़ाने में भूमिका निभा रही है।
चलती हैं गर्म और शुष्क हवाएं
इस भीषण गर्मी के बीच सबसे अधिक चर्चा “हीटवेव” को लेकर हो रही है। आम भाषा में इसे लू कहा जाता है। हीटवेव ऐसी स्थिति होती है जब किसी क्षेत्र का तापमान सामान्य से बहुत अधिक बढ़ जाता है और लगातार कई दिनों तक बना रहता है। भारत में मैदानी इलाकों में जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाए और सामान्य तापमान से कम से कम 4.5 डिग्री अधिक हो, तब उसे हीटवेव माना जाता है। यदि तापमान 47 डिग्री या उससे अधिक पहुंच जाए तो उसे गंभीर हीटवेव की श्रेणी में रखा जाता है। इस दौरान चलने वाली गर्म और शुष्क हवाएं शरीर के तापमान नियंत्रण तंत्र को प्रभावित करती हैं। शरीर में पानी की कमी होने लगती है और कई बार स्थिति जानलेवा भी बन जाती है।
सबसे ज्यादा खतरे में ये लोग
- डॉक्टरों के अनुसार हीटवेव का सबसे बड़ा खतरा हीट स्ट्रोक होता है। इसमें शरीर का तापमान तेजी से बढ़ जाता है और व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है।
- बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, दिल और ब्लड प्रेशर के मरीज तथा बाहर काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं।
- मजदूर, रिक्शा चालक, ट्रैफिक पुलिस और डिलीवरी कर्मचारी इस समय सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि उन्हें लंबे समय तक धूप में रहना पड़ता है।
- कई राज्यों में स्कूलों का समय बदला गया है और कुछ जगहों पर गर्मी की छुट्टियां समय से पहले घोषित कर दी गई हैं।
बचाव ही सबसे बड़ा हथियार
- विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी इंतजाम पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि लोगों को भी सतर्क रहना होगा।
- स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है।
- अधिक मात्रा में पानी पीना, ओआरएस, नींबू पानी और छाछ का सेवन करना जरूरी बताया गया है ताकि शरीर में पानी और नमक की कमी न हो।
- हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने और सिर को ढककर बाहर निकलने की सलाह दी गई है।
- खाली पेट धूप में निकलना खतरनाक हो सकता है।
- अगर किसी व्यक्ति को चक्कर आए, उल्टी हो, तेज बुखार महसूस हो या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
सरकार अलर्ट मोड पर, अस्पतालों से लेकर रेलवे स्टेशन तक विशेष इंतजाम
सरकार और स्थानीय प्रशासन भी हालात से निपटने के लिए कदम उठा रहे हैं। कई शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर पानी की व्यवस्था की जा रही है। अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और हीट स्ट्रोक से निपटने के लिए विशेष वार्ड तैयार किए गए हैं। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए अतिरिक्त पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। मौसम विभाग लगातार अपडेट जारी कर रहा है और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है।
भविष्य में और बढ़ सकता है खतरा, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
North India Heatwave: विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में हीटवेव की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। इसलिए केवल तात्कालिक उपायों से काम नहीं चलेगा। शहरों में हरियाली बढ़ाना, जल संरक्षण करना और पर्यावरण संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में गर्मी और भी अधिक खतरनाक रूप ले सकती है। फिलहाल उत्तर भारत के करोड़ों लोग तपती धूप और लू के बीच राहत भरी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।