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पेटीएम के शेयरों में 10 फीसदी की बड़ी गिरावट, जानिए क्या है वजह

पेटीएम के शेयरों में 10 फीसदी की बड़ी गिरावट, जानिए क्या है वजह
Paytm Share Price Crash: पेटीएम के शेयरों में 10 फीसदी की गिरावट, आरबीआई योजना खत्म होने की खबर से मची खलबली (File Photo)

पेटीएम के शेयरों में शुक्रवार को 10 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई। मुख्य वजह आरबीआई की पीआईडीएफ योजना के दिसंबर 2025 के बाद बंद होने की खबरें हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे कंपनी को 200 करोड़ रुपये का सालाना नुकसान हो सकता है। हालांकि, इन्वेस्टेक ब्रोकरेज ने शेयर पर 'बाय' रेटिंग देते हुए 1,550 रुपये का लक्ष्य रखा है।

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Asfi Shadab
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देश की जानी-मानी डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम के शेयरों में शुक्रवार को भारी गिरावट देखने को मिली। वन 97 कम्युनिकेशंस, जो कि पेटीएम की मूल कंपनी है, के शेयरों में करीब 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। बीएसई पर पेटीएम के शेयर 9.99 फीसदी गिरकर 1,134.85 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर पहुंच गए। पिछले पांच कारोबारी सत्रों में से चार सत्रों में यह शेयर गिरावट का सामना कर रहा है।

इस तेज गिरावट की मुख्य वजह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई की एक योजना से जुड़ी खबरें हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरबीआई पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड यानी पीआईडीएफ योजना को दिसंबर 2025 के बाद आगे नहीं बढ़ा सकता है। हालांकि, अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

पीआईडीएफ योजना क्या है और क्यों है जरूरी

पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड आरबीआई की एक खास पहल है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के पिछड़े और कम सेवा वाले इलाकों में डिजिटल पेमेंट की सुविधाओं को मजबूत करना है। इस योजना के तहत प्वाइंट ऑफ सेल यानी पीओएस डिवाइस और क्यूआर कोड लगाने में सब्सिडी दी जाती है।

इस योजना से पेटीएम जैसी कंपनियों को काफी फायदा हुआ है, खासकर छोटे शहरों और गांवों में अपना कारोबार बढ़ाने में। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह योजना बंद होती है, तो पेटीएम को सालाना करीब 200 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। यह रकम सीधे कंपनी के ईबिटडा यानी कमाई में जुड़ती है।

बाजार विशेषज्ञों की राय

बाजार के जानकारों का मानना है कि पीआईडीएफ योजना का बंद होना पेटीएम के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है। इससे कंपनी की विकास दर पर असर पड़ सकता है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में, जहां कंपनी अपना विस्तार कर रही थी।

हालांकि, सभी विशेषज्ञ इतने नकारात्मक नहीं हैं। इन्वेस्टेक ब्रोकरेज फर्म ने पेटीएम के शेयरों पर ‘बाय’ रेटिंग दी है।

इन्वेस्टेक की सकारात्मक सिफारिश

इन्वेस्टेक ब्रोकरेज ने पेटीएम के शेयरों पर कवरेज शुरू करते हुए ‘बाय’ रेटिंग के साथ 1,550 रुपये का लक्ष्य मूल्य दिया है। यह गुरुवार के बंद भाव से 23 फीसदी ऊपर है।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि पेटीएम कई ऐसे बाजारों में काम करती है जहां सिर्फ 2-3 बड़ी कंपनियां हैं। इनमें यूपीआई पी2एम, पेमेंट गेटवे, साउंडबॉक्स डिवाइस और मर्चेंट लोन वितरण शामिल हैं। पेटीएम की तकनीकी क्षमता और व्यापारियों के साथ गहरे संबंध इसे लंबे समय में मजबूत बनाते हैं।

इन्वेस्टेक का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 से 2028 के बीच पेटीएम का शुद्ध राजस्व 23 फीसदी की दर से बढ़ेगा। ईबिटडा मार्जिन वित्त वर्ष 2028 तक 24 फीसदी तक पहुंच सकता है, जो अभी 8 फीसदी है।

तकनीकी विश्लेषण में क्या कहते हैं एक्सपर्ट

लक्ष्मीश्री इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड अंशुल जैन का कहना है कि वन 97 कम्युनिकेशंस के शेयरों पर आरबीआई के नए घटनाक्रमों के बाद दबाव बढ़ गया है। शेयर की कीमत 1,271 रुपये के महत्वपूर्ण स्तर को पार नहीं कर पा रही है।

उनका कहना है कि यह स्तर पहले एक मजबूत सपोर्ट के रूप में काम कर रहा था, लेकिन अब यह टूट गया है। यह अस्थायी उतार-चढ़ाव नहीं बल्कि ढांचागत कमजोरी को दर्शाता है। बिकवाली का दबाव जारी है और दैनिक तथा साप्ताहिक चार्ट में निचले स्तर बन रहे हैं।

जैन के मुताबिक, अगला निचला स्तर 1,097 रुपये के आसपास हो सकता है, जहां कुछ मांग देखने को मिल सकती है। जब तक शेयर 1,271 रुपये के ऊपर स्थिर नहीं होता, तब तक जोखिम ज्यादा रहेगा।

पेटीएम शेयर का इतिहास

पिछले एक महीने में पेटीएम के शेयर 12 फीसदी गिरे हैं, जबकि तीन महीने में 8 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि, छह महीने में शेयर 11 फीसदी बढ़े हैं और एक साल में 40 फीसदी की छलांग लगाई है। पिछले तीन सालों में शेयर ने 118 फीसदी का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है।

फिर भी, पेटीएम का शेयर अपने आईपीओ मूल्य 2,150 रुपये से अब भी 45 फीसदी से ज्यादा नीचे कारोबार कर रहा है। दोपहर 12:50 बजे तक पेटीएम का शेयर 6.14 फीसदी गिरकर 1,183.50 रुपये पर था।

निवेशकों के लिए क्या है सीख

पेटीएम के शेयरों में आई यह गिरावट निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। किसी भी सरकारी योजना या नियामक फैसले का असर कंपनियों पर कितना गहरा हो सकता है, यह इससे समझा जा सकता है। फिनटेक कंपनियां आरबीआई और सरकारी नीतियों पर काफी निर्भर होती हैं।

हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय मौके के रूप में भी देखा जा सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो कंपनी के मजबूत व्यापार मॉडल और तकनीकी क्षमताओं पर भरोसा रखते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक सरकार और आरबीआई की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें। अगर पीआईडीएफ योजना बढ़ती है तो शेयरों में तेजी आ सकती है। लेकिन अगर योजना बंद होती है, तो शेयरों में और गिरावट की संभावना है।

बाजार में अनिश्चितता का माहौल है और ऐसे में सतर्क रहना जरूरी है। पेटीएम एक मजबूत कंपनी है, लेकिन नियामक जोखिम हमेशा बने रहते हैं।


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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।