Petrol-Diesel Price: भारत में दिन की शुरुआत केवल सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है। सुबह 6 बजे जैसे ही देश की तेल विपणन कंपनियां ताजा दरें जारी करती हैं, वैसे ही करोड़ों लोगों की नजर इन रेट्स पर टिक जाती है। इसकी वजह साफ है—पेट्रोल और डीजल की कीमतें सीधे तौर पर आम आदमी की जेब, घर के बजट और रोजमर्रा की जरूरतों को प्रभावित करती हैं।
चाहे ऑफिस जाने वाला कर्मचारी हो, ऑटो या टैक्सी चालक हो, किसान हो या फिर फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी—हर कोई इन कीमतों से जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि पेट्रोल-डीजल के भाव अब सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि देश की आर्थिक नब्ज बन चुके हैं।
कैसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रोजाना बदली जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए टैक्स—इन सभी का सीधा असर पेट्रोल-डीजल के रेट पर पड़ता है।
तेल विपणन कंपनियां हर दिन इन कारकों का आकलन करती हैं और सुबह 6 बजे नई कीमतें जारी करती हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना है, ताकि उपभोक्ताओं को भ्रमित या गलत जानकारी न मिले।
आम आदमी की जेब पर सीधा असर
पेट्रोल और डीजल महंगे होते ही सबसे पहले असर परिवहन पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जियां, फल, दूध और रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो जाती हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल वाहन चालकों की चिंता नहीं रहतीं, बल्कि हर घर का मुद्दा बन जाती हैं।
यही वजह है कि लोग हर सुबह अपने शहर के रेट जानना जरूरी समझते हैं, ताकि वे अपने खर्चों की योजना उसी हिसाब से बना सकें।
आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव
18 जनवरी 2026 को देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के रेट इस प्रकार हैं—
- नई दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर है।
- मुंबई में पेट्रोल 104.21 रुपये और डीजल 92.15 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
- कोलकाता में पेट्रोल का भाव 103.94 रुपये और डीजल 90.76 रुपये है।
- चेन्नई में पेट्रोल 100.75 रुपये और डीजल 92.34 रुपये प्रति लीटर है।
- जयपुर में पेट्रोल 104.72 रुपये और डीजल 90.21 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
- लखनऊ में पेट्रोल 94.69 रुपये और डीजल 87.80 रुपये प्रति लीटर है।
इन आंकड़ों से साफ है कि अलग-अलग राज्यों में टैक्स की वजह से कीमतों में अंतर देखने को मिलता है।
पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें
मई 2022 के बाद से केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स में कटौती की थी। इसके बाद से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में काफी हद तक स्थिरता बनी हुई है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहता है, लेकिन सरकारों के हस्तक्षेप और नीति संतुलन के चलते भारतीय उपभोक्ताओं को अचानक बढ़ोतरी का झटका नहीं लगा है। यही वजह है कि पिछले दो सालों में पेट्रोल-डीजल के भाव लगभग एक जैसे बने हुए हैं।
कारोबार और महंगाई से सीधा रिश्ता
पेट्रोल और डीजल केवल ईंधन नहीं हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के पहिए इन्हीं से घूमते हैं। उद्योग, खेती, ट्रांसपोर्ट और सेवा क्षेत्र—हर जगह इनका इस्तेमाल होता है। अगर कीमतें बढ़ती हैं, तो महंगाई बढ़ना तय माना जाता है।
इसलिए सरकार और तेल कंपनियां कोशिश करती हैं कि कीमतों में अचानक बड़ा बदलाव न हो, ताकि बाजार में अस्थिरता न फैले।