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चांदी ने रचा इतिहास, एमसीएक्स पर 2 लाख रुपये पार, जानिए 11 बड़ी वजहें

Silver Price Today: चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट, जानिए कितना सस्ता हुआ सिल्वर
Silver Price Today: चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट, जानिए कितना सस्ता हुआ सिल्वर

चांदी ने भारतीय बाजार में इतिहास रच दिया। MCX पर पहली बार 2 लाख रुपये के पार पहुंचकर 2,01,388 रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बनाया। अजय केड़िया ने इस तेजी के पीछे 11 बड़े कारण बताए जिनमें सप्लाई की कमी, वैश्विक भंडार में गिरावट, चीन के निर्यात नियंत्रण, बढ़ती औद्योगिक मांग और अमेरिकी फेड की दर कटौती शामिल हैं।

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भारतीय बाजार में चांदी ने एक नया इतिहास रच दिया है। शुक्रवार 12 दिसंबर को चांदी की कीमतों ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊंचाइयां छू लीं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी पहली बार 2 लाख रुपये के जादुई आंकड़े को पार कर गई। MCX पर चांदी ने 2,01,388 रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बनाया। वहीं IBJA पर भी चांदी 1,95,180 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। पिछले एक दिन में ही कीमत में 8192 रुपये की जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली।

यह उछाल अचानक नहीं आया है। केड़िया एडवाइजरी के फाउंडर और डायरेक्टर अजय केड़िया ने बताया कि चांदी में इस रिकॉर्ड तेजी के पीछे एक या दो नहीं बल्कि कुल 11 बड़े कारण काम कर रहे हैं। आइए एक-एक करके समझते हैं कि आखिर क्यों चांदी इतनी तेजी से भाग रही है।

चांदी की कीमतों में तेजी के 11 बड़े कारण

सप्लाई में लगातार कमी

चांदी की कीमतों में उछाल की सबसे बड़ी वजह बाजार में लगातार बढ़ता स्ट्रक्चरल डेफिसिट है। आसान शब्दों में कहें तो सप्लाई यानी आपूर्ति की कमी पिछले कई वर्षों से बनी हुई है। मांग बढ़ रही है लेकिन सप्लाई उतनी नहीं बढ़ पा रही। यही कारण है कि कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

वैश्विक भंडार में भारी गिरावट

लंदन में चांदी का भंडार 2021 के सबसे ऊंचे स्तर से लगातार गिरता आ रहा है। 2025 में यह कई सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि दुनिया में फिजिकल चांदी की उपलब्धता बहुत कम हो गई है। जब किसी चीज की उपलब्धता कम होती है तो उसकी कीमत अपने आप बढ़ने लगती है।

चीन के निर्यात नियंत्रण का असर

चीन ने 2026 से चांदी के निर्यात पर नियंत्रण लगाने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद पूरी दुनिया की इंडस्ट्रीज और व्यापारियों ने अपना स्टॉक बढ़ाना शुरू कर दिया है। सभी को डर है कि 2026 के बाद चीन से चांदी मिलना मुश्किल हो जाएगी। इसलिए सभी पहले से ही ज्यादा चांदी खरीद रहे हैं। इस प्री-बाइंग की वजह से मांग बढ़ गई है और कीमतें भी ऊपर चली गई हैं।

औद्योगिक मांग में जबरदस्त वृद्धि

चांदी की माइनिंग यानी खनन और रीसाइक्लिंग पिछले 10 साल से लगभग एक जैसी बनी हुई है। लेकिन दूसरी तरफ चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है। सोलर पैनल बनाने में, इलेक्ट्रॉनिक्स में, इलेक्ट्रिक गाड़ियों में और सेमीकंडक्टर्स में चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। यानी डिमांड तो बढ़ी लेकिन सप्लाई वही रही। इसी वजह से कीमतें ऊपर जा रही हैं।

लगातार पांचवें साल घाटा

साल 2025 में चांदी का बाजार लगातार पांचवे साल भी घाटे में रहने वाला है। इस बार यह कमी 125 मिलियन औंस यानी करीब 35 लाख किलोग्राम रहने का अनुमान है। साल 2021 से अब तक कुल कमी 800 मिलियन औंस यानी करीब 2.26 करोड़ किलोग्राम के पास पहुंच चुकी है। यह बहुत बड़ा आंकड़ा है और इससे साफ होता है कि बाजार में चांदी की कितनी कमी है।

अमेरिकी फेड की ब्याज दर में कटौती

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। अब ब्याज दर 3.50 से 3.75 फीसदी के बीच है। जब ब्याज दरें कम होती हैं तो सोना और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश बढ़ जाता है। लोग बैंक में पैसा रखने की बजाय सोना-चांदी खरीदना पसंद करते हैं। इससे भी चांदी की कीमतों को सहारा मिला है।

चीन में भंडार 10 साल के निचले स्तर पर

शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज में चांदी का स्टॉक 2015 के बाद सबसे कम स्तर पर आ गया है। शंघाई गोल्ड एक्सचेंज पर ट्रेडिंग की मात्रा भी 9 साल के निचले स्तर पर है। इसका मतलब है कि चीन में भी चांदी की उपलब्धता बहुत टाइट यानी सीमित है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा धातु उपभोक्ता देश है। वहां भंडार कम होना पूरी दुनिया के बाजार पर असर डालता है।

चीन के रिकॉर्ड निर्यात

अक्टूबर 2024 में चीन ने 660 टन से ज्यादा चांदी का निर्यात किया। यह अब तक का सबसे बड़ा मासिक निर्यात है। इसका बड़ा हिस्सा लंदन भेजा गया ताकि वहां की भारी सप्लाई कमी को कुछ राहत मिल सके। लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में निर्यात के बावजूद बाजार की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।

लंदन में तरलता की समस्या

चीन से भारी मात्रा में चांदी आने के बाद भी लंदन में बॉरोइंग कॉस्ट यानी उधार लेने की लागत ऊंची बनी हुई है। इसका मतलब है कि बाजार में तरलता का दबाव अभी भी बना हुआ है। जब तक यह दबाव कम नहीं होता, कीमतों में तेजी बनी रह सकती है।

अमेरिका की नई नीति का खतरा

अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने हाल में चांदी को क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिजों की सूची में शामिल किया है। इससे बाजार में यह आशंका बढ़ गई है कि अमेरिका चांदी पर नए टैरिफ यानी शुल्क लगा सकता है या इस पर रणनीतिक नियंत्रण ला सकता है। यह भी चांदी की कीमतों को ऊपर ले जाने वाला एक बड़ा कारक है।

LBMA में होल्डिंग में बढ़ोतरी

नवंबर में लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन की वॉल्ट यानी तिजोरी में चांदी की होल्डिंग बढ़कर 27,187 टन हो गई। यह पिछले महीने से 3.5 फीसदी ज्यादा है। गोल्ड होल्डिंग भी बढ़कर 8,907 टन पहुंच गई। इसका मतलब है कि बड़े निवेशक अभी भी कीमती धातुओं में पैसा लगा रहे हैं। यह भी कीमतों को सहारा दे रहा है।

आगे क्या होगा

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सप्लाई की स्थिति में सुधार नहीं होता, चांदी में तेजी का रुझान जारी रह सकता है। कई विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 में चांदी की कीमतें 2.40 लाख रुपये प्रति किलो के पार भी जा सकती हैं। हालांकि निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सोच-समझकर निवेश करें।

यह साफ है कि चांदी के दामों में यह रिकॉर्ड उछाल किसी एक वजह से नहीं आया है। वैश्विक स्तर पर सप्लाई में कमी, बढ़ती औद्योगिक मांग, चीन की नीतियां, अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती और लगातार बने रहने वाले घाटे जैसी कुल 11 बड़ी वजहों का संयुक्त असर है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि चांदी के दाम किस दिशा में जाते हैं।


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Asfi Shadab

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