भंडारा के अनिल जिभकाटे को राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
National Teacher Award 2025: महाराष्ट्र और नागपुर विभाग के लिए गर्व का क्षण तब आया जब भंडारा जिले के पवनी तालुका के विरली खंदार गांव के सुपुत्र अनिल रामदास जिभकाटे को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार / कौशलाचार्य पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित शिक्षक दिवस समारोह में महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया।
यह उपलब्धि विशेष इसलिए भी है क्योंकि नागपुर विभाग को वेल्डर ट्रेड से यह पुरस्कार पहली बार प्राप्त हुआ है।
नागपुर आईटीआई में सेवाएं
National Teacher Award 2025: अनिल जिभकाटे वर्तमान में संत जगनाडे महाराज शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था, नागपुर में शिल्प निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। वे महाराष्ट्र शासन के कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवोन्मेष विभाग के अंतर्गत संचालित व्यवसाय शिक्षण व प्रशिक्षण संचालनालय से जुड़े हैं।
ग्रामीण पृष्ठभूमि से आगे बढ़े अनिल जिभकाटे ने अपने कार्य से यह साबित किया कि सही मार्गदर्शन और नवीन शिक्षण पद्धति से विद्यार्थियों का भविष्य संवारा जा सकता है।
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डिजिटल शिक्षा में योगदान | National Teacher Award 2025
उन्होंने अब तक 935 से अधिक शैक्षणिक वीडियो ‘राज एजुकेशन’ यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए हैं, ताकि आईटीआई के प्रशिक्षणार्थियों को डिजिटल माध्यम से भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इसके अलावा वे छह पुस्तकों के लेखक भी हैं, जिनमें आधुनिक वेल्डिंग तकनीक और कौशल प्रशिक्षण से जुड़े विषय शामिल हैं।
प्रोजेक्ट और इनक्वायरी आधारित शिक्षा
National Teacher Award 2025: प्रशिक्षण के दौरान अनिल जिभकाटे ने प्रोजेक्ट आधारित और इनक्वायरी आधारित शिक्षण पद्धति को अपनाया। इसके जरिए उन्होंने सैकड़ों विद्यार्थियों को न केवल कौशलयुक्त बनाया बल्कि उन्हें रोजगार के अवसर भी दिलाए।
रोजगार और उद्योग से जुड़ाव
अनिल जिभकाटे अब तक 500 से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार दिलाने में सफल रहे हैं। उन्होंने तेलंगाना, पुणे और नागपुर की औद्योगिक कंपनियों से जुड़कर विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क प्रशिक्षण, स्पॉन्सरशिप और आधुनिक मशीनें उपलब्ध करवाईं। जरूरतमंद छात्रों के लिए उन्होंने पुस्तकें भी निःशुल्क वितरित कीं।
महाराष्ट्र के लिए गौरव
भारत सरकार ने उनके योगदान को मान्यता देते हुए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया। यह उपलब्धि न केवल नागपुर विभाग बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए गर्व की बात है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद अनिल जिभकाटे ने कहा कि यह सम्मान उन्होंने सभी शिल्प निदेशकों और प्रशिक्षणार्थियों को समर्पित किया है।