एशियन यूथ गेम्स 2025 में भारतीय युवा खिलाड़ियों ने रचा इतिहास, जीते 48 पदक
युवा खिलाड़ियों के लिए एशियाई महाद्वीप का सबसे बड़ा खेल आयोजन एशियन यूथ गेम्स 2025 में भारत ने अपना अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन किया है। बहरीन की राजधानी मनामा में हुए इस खेल महाकुंभ में भारतीय युवा खिलाड़ियों ने कुल 48 पदक अपने नाम किए, जिसमें 13 स्वर्ण, 18 रजत और 17 कांस्य पदक शामिल हैं। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि भारतीय खेलों में युवा प्रतिभाओं के विकास और उन्हें मिल रहे बेहतर अवसरों की कहानी बयान करती है।
एशियन यूथ गेम्स की शुरुआत और उद्देश्य
एशियन यूथ गेम्स की स्थापना ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया ने की थी। इसका मुख्य उद्देश्य एशिया के युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अनुभव देना और उन्हें भविष्य के बड़े आयोजनों के लिए तैयार करना है। यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के सर्वांगीण विकास, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और खेल में उत्कृष्टता हासिल करने का मंच है।
2008 में ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया ने सिंगापुर को पहले एशियन यूथ गेम्स की मेजबानी सौंपी थी। 14 से 18 वर्ष की आयु के खिलाड़ियों के लिए यह विशेष आयोजन भारत समेत एशिया के सभी देशों के लिए अपनी युवा प्रतिभाओं को निखारने का सुनहरा अवसर बन गया है।
भारत की यात्रा: सिंगापुर 2009 से मनामा 2025 तक
सिंगापुर 2009: शुरुआती कदम
2009 में सिंगापुर में हुए पहले एशियन यूथ गेम्स में भारत ने पहली बार हिस्सा लिया। इस आयोजन में 9 खेलों में 1,321 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। भारतीय दल ने अपनी पहली ही उपस्थिति में कुल 11 पदक जीते, जिसमें पांच स्वर्ण, तीन रजत और तीन कांस्य पदक शामिल थे। पदक तालिका में 11वें स्थान के साथ भारत ने युवा खेलों में अपनी मजबूत शुरुआत की।
नानजिंग 2013: सुधार की दिशा
चीन के नानजिंग शहर में 2013 में हुए दूसरे संस्करण में आयोजन का दायरा काफी बढ़ गया। 16 खेलों में 2,314 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। भारत ने इस बार 14 पदक हासिल किए, जिसमें तीन स्वर्ण, चार रजत और सात कांस्य पदक शामिल थे। पदक तालिका में भारत 10वें स्थान पर रहा। यह प्रदर्शन भारत में युवा खेलों की बढ़ती विविधता और गहराई को दर्शाता था।
मनामा 2025: रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन
एक दशक से अधिक के अंतराल के बाद एशियन यूथ गेम्स का तीसरा संस्करण बहरीन की राजधानी मनामा में आयोजित हुआ। इस बार 45 देशों के 4,000 से अधिक युवा खिलाड़ियों ने 26 खेलों में हिस्सा लिया। भारत ने 229 खिलाड़ियों का दल भेजा, जिसमें 122 महिलाएं और 107 पुरुष शामिल थे।
भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 48 पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह 2009 के मुकाबले चार गुना और 2013 के मुकाबले तीन गुना से अधिक है। पदक तालिका में भारत छठे स्थान पर रहा, जो एशिया की शीर्ष खेल शक्तियों में देश की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
किन खेलों में चमके भारतीय सितारे
बीच रेसलिंग में शानदार शुरुआत
भारत ने बीच रेसलिंग में तीन स्वर्ण और दो रजत पदक जीतकर इस खेल में शीर्ष स्थान हासिल किया। यह पहली बार था जब भारतीय खिलाड़ियों ने इस खेल में इतना बेहतरीन प्रदर्शन किया।
कुश्ती में जारी रहा दबदबा
भारतीय कुश्ती की मजबूत परंपरा को आगे बढ़ाते हुए युवा पहलवानों ने तीन स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य पदक अपने नाम किए। यह प्रदर्शन भारत में कुश्ती के मजबूत आधार को दर्शाता है।
बॉक्सिंग में सबसे ज्यादा स्वर्ण
स्वर्ण पदकों की संख्या के लिहाज से बॉक्सिंग भारत के लिए सबसे सफल खेल रहा। युवा मुक्केबाजों ने चार स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया।
कबड्डी में दोहरी जीत
एशियन यूथ गेम्स में पहली बार शामिल हुए कबड्डी में भारत ने धमाकेदार शुरुआत की। लड़कों और लड़कियों दोनों की टीमों ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं हारा और स्वर्ण पदक जीते। यह भारत की राष्ट्रीय खेल विरासत का सम्मान था।
महिला खिलाड़ियों का दमदार योगदान
इस बार के एशियन यूथ गेम्स में सबसे खास बात यह रही कि भारतीय दल में महिला खिलाड़ियों की संख्या पुरुषों से अधिक थी। 229 खिलाड़ियों में से 122 महिलाएं थीं। यह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन में भारत के लिए एक ऐतिहासिक पल था।
महिला खिलाड़ियों ने केवल संख्या में ही आगे नहीं रहीं, बल्कि प्रदर्शन में भी शानदार योगदान दिया। कुल पदकों में आधे से अधिक और स्वर्ण पदकों में 69 प्रतिशत से अधिक योगदान महिला खिलाड़ियों का रहा। 77 पदक जीतने वाले खिलाड़ियों में से 46 महिलाएं और 31 पुरुष थे।
यह उपलब्धि खेलो इंडिया जैसी सरकारी योजनाओं और जमीनी स्तर पर महिला खिलाड़ियों को मिल रहे बेहतर अवसरों का परिणाम है।
प्रधानमंत्री और खेल जगत की सराहना
भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए कहा कि युवा खिलाड़ियों ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने खिलाड़ियों के उत्साह, संकल्प और कड़ी मेहनत की सराहना की और भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं।
भारतीय ओलंपिक संघ ने भी खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सम्मानित करने के लिए बड़ी नकद पुरस्कार राशि की घोषणा की है। स्वर्ण पदक विजेताओं को पांच लाख रुपये, रजत पदक विजेताओं को तीन लाख रुपये और कांस्य पदक विजेताओं को दो लाख रुपये दिए जाएंगे। चौथे स्थान पर रहने वाले खिलाड़ियों को भी 50 हजार रुपये मिलेंगे।
पदक विजेता खिलाड़ियों के प्रशिक्षकों को भी एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी। कबड्डी में स्वर्ण जीतने वाली लड़कों और लड़कियों की टीमों को 10-10 लाख रुपये दिए जाएंगे।
भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी.टी. उषा ने कहा कि युवा खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन भारतीय खेल का भविष्य और युवाओं में छिपी संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि संघ इस उभरती प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहायता देगा।
भविष्य की तैयारी
अगला एशियन यूथ गेम्स 2029 में उज्बेकिस्तान में आयोजित होगा। भारत की लगातार बढ़ती सफलता यह संकेत देती है कि सही दिशा में काम हो रहा है। युवा मामले और खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण और खेलो इंडिया जैसी योजनाएं युवा खिलाड़ियों के विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं।
टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम और राष्ट्रीय खेल महासंघों की सक्रिय भागीदारी से एक मजबूत खेल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हो रहा है। जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं और वैज्ञानिक तरीके से तैयारी का नतीजा अब दिखने लगा है।
एशियन यूथ गेम्स 2025 में भारत का प्रदर्शन केवल 48 पदकों की कहानी नहीं है। यह भारतीय खेलों में आ रहे बदलाव, युवा प्रतिभाओं को मिल रहे अवसरों और खासकर महिला खिलाड़ियों के सशक्तिकरण की कहानी है। यह उपलब्धि भविष्य के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है।
जिस तरह भारत ने 2009 के 11 पदकों से 2025 में 48 पदक तक का सफर तय किया है, वह आने वाले वर्षों में और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जगाता है। युवा खिलाड़ियों का यह उत्साह और संकल्प भारत को एशिया की शीर्ष खेल शक्तियों में शामिल कर रहा है। अगर यही गति बनी रही तो 2029 में भारत और भी ऊंचाई छू सकता है।