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Viral Video:10 मिनट में खाना या सेहत से समझौता? सुपरफास्ट डिलीवरी के पीछे छिपा खौफनाक सच आया सामने

10 मिनट में खाना या सेहत से समझौता? सुपरफास्ट डिलीवरी के पीछे छिपा खौफनाक सच आया सामने
10 मिनट में खाना या सेहत से समझौता? सुपरफास्ट डिलीवरी के पीछे छिपा खौफनाक सच आया सामने

10 मिनट में खाना पहुंचाने वाले सिस्टम की सच्चाई वायरल वीडियो से सामने आई है। वीडियो में दिखा कि कई क्लाउड किचन पहले से बना फ्रोजन खाना गर्म करके भेजते हैं। इस खुलासे ने ताज़गी, सेहत और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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10 Minute Food Delivery Viral Video: आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में “10 मिनट में डिलीवरी” सुनते ही मन खुश हो जाता है। ऑफिस से लौटते हुए, अचानक भूख लगने पर या देर रात जब किचन में जाने का मन न हो, तब यह सुविधा किसी वरदान से कम नहीं लगती। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इस चमकदार सुविधा के पीछे की एक ऐसी सच्चाई दिखा रहा है, जिसने आम लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

हम में से ज़्यादातर लोग यही मानते हैं कि जब ऑनलाइन खाना ऑर्डर किया जाता है, तो वह ताज़ा बनता है और फिर सीधे हमारे घर तक पहुंचता है। लेकिन वायरल वीडियो में दिखाई गई तस्वीरें इस सोच को झकझोर देती हैं। वीडियो में बड़े-बड़े फ्रोजन शेल्फ़, पहले से तैयार दाल, चावल, कढ़ी, पराठे और यहां तक कि मिठाइयों के स्टॉक साफ दिखाई दे रहे हैं। ऑर्डर मिलते ही इन्हें बस गर्म किया जाता है और पैक कर दिया जाता है।

वायरल वीडियो ने क्या दिखाया?

इस वीडियो को एक शख्स ने सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसने खुद एक ऐसे किचन के अंदर की झलक दिखाई जहां 10 मिनट में डिलीवरी का दावा किया जाता है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि खाना बनाने की प्रक्रिया उस समय शुरू नहीं होती जब ग्राहक ऑर्डर करता है, बल्कि सब कुछ पहले से तैयार और फ्रोजन अवस्था में रखा गया होता है।

दाल, चावल, कढ़ी, पराठे और रसमलाई जैसी चीजें बड़े कंटेनरों में स्टोर की जाती हैं। जैसे ही ऑर्डर आता है, इन्हें माइक्रोवेव या गैस पर गर्म किया जाता है, पैकिंग होती है और डिलीवरी बॉय रवाना हो जाता है। यही वजह है कि 10 मिनट में खाना आपके दरवाज़े तक पहुंच पाता है।

 

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क्लाउड किचन का बढ़ता चलन

दरअसल, यह पूरा सिस्टम “क्लाउड किचन” मॉडल पर आधारित है। क्लाउड किचन ऐसे किचन होते हैं, जहां बैठकर खाने की सुविधा नहीं होती। ये सिर्फ ऑनलाइन ऑर्डर के लिए काम करते हैं। कम जगह, कम स्टाफ और पहले से तैयार खाने की वजह से इनकी लागत भी कम होती है और डिलीवरी तेज़।

यह मॉडल व्यापार के लिहाज से तो फायदेमंद है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह ग्राहकों की सेहत के लिए भी उतना ही सही है? जब खाना लंबे समय तक फ्रोजन रखा जाता है, तो उसकी ताज़गी और पोषण पर असर पड़ना तय है।

सेहत को लेकर बढ़ती चिंता

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कुछ लोग इसे भविष्य की ज़रूरत बता रहे हैं, तो कई लोग नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं। एक यूज़र ने लिखा कि “हम फ्रेश खाना समझकर ऑर्डर करते हैं, लेकिन हमें गरम किया हुआ पुराना खाना मिल रहा है।” वहीं एक अन्य यूज़र का कहना था कि “क्लाउड किचन में यही सिस्टम चलता है, इसमें नया क्या है?”

असल चिंता इस बात की है कि उपभोक्ता को यह साफ तौर पर नहीं बताया जाता कि खाना ताज़ा बना है या पहले से तैयार किया गया है। जब लोग रोज़ाना इस तरह का खाना खाने लगते हैं, तो इसका असर पाचन, इम्युनिटी और ओवरऑल सेहत पर पड़ सकता है।

सुविधा बनाम सच्चाई

यह मानना गलत नहीं होगा कि 10 मिनट में डिलीवरी की सुविधा ने हमारी आदतें बदल दी हैं। अब हम इंतज़ार नहीं करना चाहते। लेकिन इस जल्दबाज़ी में हम यह पूछना भूल जाते हैं कि हम क्या खा रहे हैं और कैसे खा रहे हैं।

अगर खाना पहले से बना हुआ है और सिर्फ गर्म करके दिया जा रहा है, तो उसमें प्रिज़रवेशन, स्टोरेज और हाइजीन का सवाल अपने आप खड़ा हो जाता है। क्या हर बार खाना सही तापमान पर स्टोर किया गया? क्या बार-बार गर्म करने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित नहीं होती? ये सवाल अब आम लोगों के मन में उठने लगे हैं।

उपभोक्ता के तौर पर हमारी जिम्मेदारी

इस वायरल वीडियो ने सिर्फ एक किचन की सच्चाई नहीं दिखाई, बल्कि हमें भी आईना दिखाया है। हमें सुविधाओं के साथ-साथ जागरूक भी होना होगा। ऑर्डर करते समय रेस्टोरेंट की जानकारी देखना, रिव्यू पढ़ना और कभी-कभी घर का सादा खाना चुनना भी ज़रूरी है।

सुपरफास्ट डिलीवरी सिस्टम पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन इसमें पारदर्शिता और सेहत का ध्यान रखना उतना ही ज़रूरी है। आखिरकार, स्वाद से ज्यादा अहम हमारी सेहत है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।