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मिडिल ईस्ट तनाव पर पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बातचीत, विपक्ष ने उठाए सवाल

मिडिल ईस्ट तनाव पर पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बातचीत, विपक्ष ने उठाए सवाल
मिडिल ईस्ट तनाव पर पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बातचीत (File Photo)

मध्य पूर्व तनाव के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत कर शांति की अपील की और हमलों की निंदा की। उन्होंने सुरक्षित शिपिंग मार्ग पर जोर दिया। वहीं कांग्रेस ने सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कूटनीतिक कदमों को लेकर आलोचना की है।

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Dipali Kumari
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PM Modi: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बातचीत कर हालात पर चिंता जताई और शांति की अपील की। बातचीत के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए ईद और नवरोज की शुभकामनाएं भी दीं।

होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवाजाही पर हुई बात

प्रधानमंत्री ने बातचीत में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और हालिया हमलों पर चिंता जताई। उन्होंने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा करते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा बढ़ता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला भी प्रभावित होती है। पीएम मोदी ने खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही की जरूरत पर जोर दिया, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम मार्ग है।

ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान सरकार के सहयोग की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि त्योहारों का यह समय क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि लेकर आएगा।

विपक्ष ने उठाये सवाल

हालांकि, इस मुद्दे पर देश की राजनीति भी गरमा गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की कूटनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाया और न ही युद्धविराम के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय रिश्तों का प्रभावी इस्तेमाल किया।

जयराम रमेश ने यह भी कहा कि इस संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर आर्थिक अस्थिरता बढ़ रही है, जिसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट और सख्त रुख अपनाने की मांग की।

युद्ध में हजारों लोगों की गयी जान

वहीं, जमीनी हालात लगातार चिंताजनक बने हुए हैं। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। लेबनान और ईरान जैसे देशों में हालात खासे गंभीर हैं।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।