NEET UG परीक्षा से पहले Telegram बैन पर विवाद, कंपनी पहुंची दिल्ली हाईकोर्ट

नीट यूजी पुनर्परीक्षा से पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। सरकार का कहना है कि यह कदम परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए उठाया गया है, जबकि टेलीग्राम ने फैसले को चुनौती दी है।
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Telegram Ban Delhi High Court: नीट यूजी परीक्षा से पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध का मामला अब दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम ने सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस ताजस करिया की बेंच के समक्ष होनी है, जिसने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है।
केंद्र सरकार ने टेलीग्राम पर लगाया अस्थायी प्रतिबंध
मालूम हो केंद्र सरकार ने कल 16 जून को फैसला लिया था कि 21 जून को होने वाली नीट यूजी पुनर्परीक्षा को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए टेलीग्राम की सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा। यह प्रतिबंध 22 जून तक लागू रहेगा। सरकार का मानना है कि परीक्षा से पहले सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए पेपर लीक या फर्जी सूचनाएं फैलने की आशंका रहती है, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
पेपर लीक रोकने के लिए बड़ा फैसला
गौरतलब है कि नीट यूजी परीक्षा पहले 3 मई को आयोजित की गई थी। हालांकि पेपर लीक की आशंकाओं और विवादों के कारण 12 मई को परीक्षा को स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने पुनर्परीक्षा की तारीख 21 जून तय की। इसी को ध्यान में रखते हुए एनटीए की सिफारिश पर सरकार ने टेलीग्राम की पहुंच सीमित करने का निर्णय लिया।
टेलीग्राम सीईओ पावेल डुरोव ने लगाया बड़ा आरोप
इस बीच टेलीग्राम के संस्थापक और सीईओ पावेल डुरोव ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि भारत में टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने के पीछे कुछ कॉरपोरेट हितों की भूमिका हो सकती है। ड्यूरोव ने आरोप लगाया कि रिलायंस समूह और व्हाट्सएप की पैरवी के चलते यह कदम उठाया गया है।
हालांकि दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े सूत्रों ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। सूत्रों का कहना है कि ड्यूरोव ने रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियों को लेकर भ्रम पैदा किया है और उनके आरोपों में कोई तथ्य नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, टेलीग्राम पर लगाया गया प्रतिबंध केवल परीक्षा की अवधि तक सीमित है और इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखना है।
अब इस पूरे मामले पर सभी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का फैसला यह तय करेगा कि परीक्षा अवधि के दौरान टेलीग्राम पर लगाया गया प्रतिबंध जारी रहेगा या उसमें कोई बदलाव किया जाएगा।

