कांग्रेस ने साधा केंद्र पर निशाना
33% Women Reservation Act: कांग्रेस ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के लागू होने में देरी को लेकर निशाना साधा है। यह वही कानून है जिसे सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से पारित किया था और जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। उस समय इसे देश के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा कदम बताया गया था, लेकिन इसके लागू होने की प्रक्रिया आज भी जारी है।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व कब मिलेगा
33% Women Reservation Act: कांग्रेस का कहना है कि कानून बनने के बाद भी इसे जमीन पर लागू नहीं किया गया, जिससे यह सवाल उठता है कि महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व कब मिलेगा। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने इस कानून को लागू करने के लिए दो शर्तें जोड़ दीं-राष्ट्रीय जनगणना और उसके बाद परिसीमन यानी चुनाव क्षेत्रों का पुनर्गठन। कांग्रेस के अनुसार, इन्हीं शर्तों ने पूरी प्रक्रिया को अनिश्चित समय के लिए टाल दिया।
2023 से राजनीतिक बहस शुरू
33% Women Reservation Act: यह विवाद नया नहीं है। 2023 में जब यह विधेयक संसद में लाया गया था, तभी से इस पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई थी। उस समय भी विपक्षी दलों ने यह सवाल उठाया था कि क्या इसे तुरंत लागू किया जा सकता है या फिर इसे भविष्य की प्रक्रियाओं पर निर्भर बनाया जाएगा। सरकार का रुख शुरू से यही रहा है कि बिना जनगणना और परिसीमन के सीटों का संतुलन तय करना संभव नहीं है, इसलिए इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

मोदी पर भड़के जयराम रमेश
33% Women Reservation Act: इसी पुराने विवाद को अब फिर से उठाते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कानून का राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं और मीडिया में लेखों के जरिए यह संदेश दे रहे हैं कि महिला आरक्षण के सबसे बड़े समर्थक वही हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह केवल राजनीतिक छवि बनाने की कोशिश है, जबकि वास्तविकता में कानून अभी तक लागू नहीं हुआ है।
जनगणना और परिसीमन से जोड़कर आगे बढ़ाया
33% Women Reservation Act: कांग्रेस ने यह भी दावा किया है कि 2023 में पार्टी ने संसद में इस कानून का समर्थन किया था और उसे 2024 से ही लागू करने की मांग की थी। लेकिन सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़कर आगे बढ़ाया, जिससे प्रक्रिया धीमी हो गई। पार्टी का आरोप है कि अब सरकार अपने ही रुख से अलग बयान दे रही है और इसे जल्दी लागू करने की बात कर रही है, जिसे कांग्रेस “यू-टर्न” के रूप में देखती है।
सीटों का पुनर्गठन भी लंबित है
33% Women Reservation Act: इस पूरे मुद्दे की जड़ भारत की चुनावी व्यवस्था से जुड़ी हुई है। देश में लोकसभा और विधानसभा सीटों का निर्धारण परिसीमन के जरिए होता है, जो हर जनगणना के बाद किया जाता है। आखिरी बड़ा परिसीमन कई साल पहले हुआ था और उसके बाद से नई जनगणना नहीं हुई है, इसलिए सीटों का पुनर्गठन भी लंबित है। इसी कारण सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण को लागू करने से पहले यह प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
बहाना नहीं चलेगा
33% Women Reservation Act: दूसरी ओर, विपक्ष का तर्क है कि जब कानून पारित हो चुका है तो उसे तुरंत लागू करने के रास्ते खोजे जाने चाहिए, ताकि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में देर न हो। कांग्रेस का कहना है कि जनगणना और परिसीमन को बहाना बनाकर इसे अनिश्चितकाल के लिए टाला जा रहा है।
संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य : सरकार
- सरकार की ओर से पहले भी यह स्पष्ट किया गया है कि यह कानून ऐतिहासिक है और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। लेकिन इसे लागू करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। सरकार का तर्क है कि बिना नई जनगणना और परिसीमन के आरक्षण लागू करने से सीटों का अनुपात और प्रतिनिधित्व असंतुलित हो सकता है।
- इस तरह यह पूरा मामला एक तरफ कानून के ऐतिहासिक महत्व को दिखाता है, तो दूसरी तरफ इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन की जटिलताओं को भी सामने लाता है। 2023 से लेकर 2026 तक यह मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है, जिसमें एक तरफ कांग्रेस इसे देरी और “यू-टर्न” बता रही है, तो दूसरी तरफ सरकार इसे संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा मानती है।
- फिलहाल स्थिति यह है कि कानून बन चुका है, लेकिन उसके लागू होने का समय अभी भी जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पर निर्भर है। यही वजह है कि यह मुद्दा समय-समय पर फिर से राजनीतिक रूप से गरम हो जाता है और इसे लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आती रहती हैं।