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गुजरात में ढहा निर्माणाधीन पुल, मलबे में दबे मजदूर, मची चीख-पुकार

गुजरात में ढहा निर्माणाधीन पुल, मलबे में दबे मजदूर, मची चीख-पुकार
वलसाड में ढहा निर्माणाधीन पुल (Pic Credit- X)

वलसाड में औरंगा नदी पर बन रहा पुल निर्माण के दौरान ढह गया। गर्डर टूटने से मचान गिरा और पांच मजदूर मलबे में दबे। चार को बचा लिया गया, एक की तलाश जारी है। ग्राम पंचायत ने खंभा खिसकने को हादसे का कारण बताया। निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर जांच शुरू हुई है।

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Dipali Kumari
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Bridge Collapsed in Gujrat: गुजरात के वलसाड जिले से ऐसी घटना सामने आई है जिसने एक बार फिर देश में निर्माणाधीन अवसंरचनाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। औरंगा नदी पर बन रहा पुल अचानक ढह गया, जब उसका गर्डर निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया। यह हादसा केवल एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही निर्माण लापरवाही की वह परत है जिसे अक्सर कागज़ों की सफ़ाई छिपा देती है। सुबह करीब 9 बजे हुई इस दुर्घटना ने निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी मचा दी, क्योंकि गिरते ढांचे के साथ काम कर रहे मजदूर उसी मलबे का हिस्सा बन गए।

गर्डर टूटने के साथ मचान भी ढही, मजदूर मलबे में दबे

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुल के दो खंभों के बीच स्लैब निर्माण के लिए मचान तैयार किया जा रहा था। तभी अचानक एक गर्डर में दरार आई और पूरा ढांचा भरभराकर गिर पड़ा। करीब पांच मजदूर इस मलबे के बीच दब गए। इनमें से कुछ मजदूरों की चीखें दूर तक सुनाई दे रही थीं। राहत दल के पहुंचने में कुछ ही मिनट लगे, लेकिन टूटते ढांचे के बीच फंसे मजदूर मानो समय से लड़ रहे थे।

राहत कार्य तेज, चार मजदूरों को बचाया गया

वलसाड अग्निशमन विभाग और स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति का आकलन किया। मलबा हटाने का कार्य शुरू होते ही टीमों ने एक-एक कर मजदूरों को बाहर निकालना शुरू किया। चार मजदूरों को बचाकर अस्पताल पहुंचाया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, सभी घायल मजदूरों की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। स्थानीय प्रशासन ने अस्पताल में विशेष चिकित्सा प्रबंधन की व्यवस्था भी की है।

एक मजदूर अब भी लापता, खोज अभियान जारी

घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक कर्मचारी अब तक लापता है। आशंका है कि वह भारी मलबे के नीचे दबा हो सकता है।
अग्निशमन दल और पुलिसकर्मी युद्धस्तर पर खोज अभियान चला रहे हैं। रात के समय भी राहत कार्य जारी रखने की तैयारी की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की देरी से मजदूर के जीवन को खतरा न बढ़े।

ग्राम पंचायत ने खंभा खिसकने को बताया हादसे का कारण

परदी-संधपोर ग्राम पंचायत के सरपंच भोलाभाई पटेल ने बताया कि पुल के अंतिम हिस्से में लोहे की छड़ों की पटिया डाली जा रही थी। तभी एक खंभा अपनी मूल स्थिति से खिसक गया और पूरी संरचना ढह गई। यह बयान एक गंभीर संकेत है कि या तो निर्माण की तकनीक में खामी थी या फिर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। ऐसी संभावना भी जताई जा रही है कि उपयोग में लाए जा रहे सामग्रियों की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं थी।

स्थानीय लोग दहशत में

हादसे के बाद आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे। कई ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने कहा कि पुल का काम कई दिनों से धीमा और अव्यवस्थित तरीके से चल रहा था। स्थानीय लोगों का कहना था कि मजदूर अक्सर बिना हेलमेट, बिना सुरक्षा बेल्ट और बिना किसी सुरक्षा निगरानी के काम करते देखे जा रहे थे।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।