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Budget 2026: दो लाख की पैन-आधार सीमा बढ़ाने की मांग, सोने की बढ़ती कीमतों के बीच एक्सपर्ट्स ने उठाई आवाज

Budget 2026: दो लाख रुपये की पैन-आधार सीमा बढ़ाने की मांग, जानें क्या हैं उद्योगों की उम्मीदें
Budget 2026: दो लाख रुपये की पैन-आधार सीमा बढ़ाने की मांग, जानें क्या हैं उद्योगों की उम्मीदें (File Photo)

Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 से पहले विशेषज्ञों ने सोने की खरीद के लिए पैन-आधार की दो लाख रुपये की सीमा बढ़ाने की मांग की है। 2016 से अपरिवर्तित यह सीमा सोने की बढ़ती कीमतों के कारण आसानी से पार हो जाती है। हेल्थकेयर, रियल एस्टेट और FMCG सहित विभिन्न क्षेत्रों ने सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखी हैं।

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देश का केंद्रीय बजट 2026 अब कुछ ही घंटों की दूरी पर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी यानी रविवार को अपना लगातार नौवां बजट पेश करने जा रही हैं। इस बार का बजट खास इसलिए भी है क्योंकि इसे वैश्विक अनिश्चितता और व्यापारिक चुनौतियों के बीच पेश किया जा रहा है। बजट पेश होने से पहले देश के अलग-अलग उद्योगों ने सरकार के सामने अपनी मांगें और उम्मीदें रखी हैं। इनमें से सबसे चर्चित मांग है सोने की खरीद के लिए पैन-आधार की सीमा को बढ़ाना।

देश के आर्थिक विशेषज्ञ और उद्योग जगत के लोग इस बजट में कई अहम घोषणाओं की उम्मीद कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2027 के लिए क्षेत्रीय आवंटन, आयकर नीति में बदलाव और निर्यात को बढ़ावा देने वाले कदमों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है।

सोने की खरीद के लिए पैन-आधार की सीमा बढ़ाने की मांग

सोने और आभूषण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सरकार से सोने की खरीद के लिए पैन या आधार की आवश्यकता वाली सीमा बढ़ाने की मांग की है। फिलहाल यह सीमा दो लाख रुपये है जो साल 2016 में तय की गई थी। उस समय सोने की कीमत आज के मुकाबले काफी कम थी। लेकिन पिछले आठ सालों में सोने की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं जिसकी वजह से दो लाख रुपये की सीमा अब बहुत कम लगने लगी है।

आज के समय में सोने के दाम इतने ज्यादा हैं कि थोड़े से सोने की खरीदारी में भी दो लाख रुपये की सीमा पार हो जाती है। इससे आम खरीदारों और छोटे सुनारों को दिक्कत होती है। हर छोटी खरीदारी के लिए पैन या आधार देना पड़ता है जो कई बार असुविधाजनक होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सीमा को कम से कम पांच लाख रुपये तक बढ़ाया जाना चाहिए ताकि असली ग्राहकों को परेशानी न हो और साथ ही बड़े लेनदेन में पारदर्शिता भी बनी रहे।

हेल्थकेयर क्षेत्र की प्रमुख मांगें

स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र ने भी इस बजट से कई उम्मीदें लगाई हैं। एसएस इनोवेशन्स इंटरनेशनल के संस्थापक और सीईओ डॉक्टर सुधीर श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में मेडिकल टेक्नोलॉजी और सर्जिकल रोबोटिक्स का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। देश में क्लिनिकल विशेषज्ञता, उन्नत इंजीनियरिंग क्षमता और लागत प्रभावी समाधान मौजूद हैं जो भारत को वैश्विक मेडिकल उपकरण निर्माण केंद्र बना सकते हैं।

मेडिकल उपकरणों पर GST में राहत की जरूरत

हेल्थकेयर उद्योग ने सरकार से घरेलू स्तर पर बनाए गए मेडिकल उपकरणों पर जीएसटी को कम करने की मांग की है। साथ ही अनुसंधान और विकास के लिए टैक्स प्रोत्साहन बढ़ाने, लंबी अवधि के लिए सस्ती पूंजी उपलब्ध कराने और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की भी जरूरत बताई गई है। इन कदमों से देश में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि सही नीतिगत ढांचे से भारत सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली मेडिकल टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकता है। सर्जिकल रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्वास्थ्य सेवा तकनीकों को तेजी से अपनाने की जरूरत है।

रियल एस्टेट सेक्टर की अपेक्षाएं

रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र ने भी बजट से कई उम्मीदें जताई हैं। ट्रांसलाइट के संस्थापक और प्रबंध निदेशक मयंक पाठक ने कहा कि भारत में बुनियादी ढांचे का विकास तो तेजी से हो रहा है लेकिन जमीन पर काम करते समय कई तरह की रुकावटें आती हैं जिन्हें दूर किया जा सकता है।

प्रोजेक्ट अप्रूवल में देरी की समस्या

परियोजना की मंजूरी में देरी, ठेकेदारों के लिए कार्यशील पूंजी की कमी और साइट पर सुरक्षा मानकों को ठीक से लागू न करना जैसी समस्याओं की वजह से इस क्षेत्र को महीनों और कभी-कभी सालों का नुकसान होता है। इस बजट में तीन व्यावहारिक कदमों की जरूरत है – तेज और पारदर्शी मंजूरी प्रणाली, ठेकेदारों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को बेहतर ऋण सुविधा और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा अनुपालन की दिशा में गंभीर नीतिगत कदम।

एडवांस्ड इंजीनियरिंग के लिए सहायता

सी3डी विजन सिस्टम के मैनेजिंग पार्टनर आशुतोष भटनागर ने कहा कि भारत की अगली विनिर्माण क्रांति केवल अधिक उत्पादन से नहीं बल्कि उन्नत इंजीनियरिंग से आएगी। थ्री-डी टेक्नोलॉजी, स्वचालन और तेज डिजाइन से उत्पादन चक्र में सुधार की जरूरत है।

इस बजट में अनुसंधान और विकास के लिए प्रोत्साहन को प्राथमिकता देनी चाहिए। जरूरी प्रोटोटाइपिंग और औद्योगिक घटकों के आयात में आने वाली दिक्कतों को कम करना चाहिए। उन्नत विनिर्माण भूमिकाओं के लिए कौशल विकास में निवेश करना चाहिए। अगली पीढ़ी के इंजीनियरिंग उपकरणों तक पहुंच से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए सटीकता, उत्पादकता और बाजार तक पहुंचने के समय में काफी सुधार हो सकता है।

आभूषण और रत्न क्षेत्र की मांगें

सोने और चांदी पर फिलहाल बेसिक कस्टम ड्यूटी 6 प्रतिशत है जिसमें 5 प्रतिशत बीसीडी और 1 प्रतिशत एआईडीसी शामिल है। केंद्रीय बजट 2026 में रत्न और आभूषण क्षेत्र प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने, निर्यात बढ़ाने और औपचारिकीकरण में तेजी लाने के लिए लक्षित नीतिगत उपायों की मांग कर रहा है।

सोने-चांदी पर आयात शुल्क और GST को तर्कसंगत बनाने की जरूरत

किसना डायमंड एंड गोल्ड ज्वैलरी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पराग शाह ने कहा कि सोने, चांदी और आभूषणों पर आयात शुल्क और जीएसटी को तर्कसंगत बनाना बहुत जरूरी है। यह एक कम मार्जिन वाला उद्योग है जो बढ़ती इनपुट लागत से जूझ रहा है। एक स्थिर और अनुमानित कर ढांचा मांग को बढ़ावा दे सकता है, निर्यात मूल्य निर्धारण में सुधार कर सकता है और अनौपचारिक व्यापार पर अंकुश लगा सकता है।

नए टैक्स सिस्टम के तहत आयकर स्लैब

फिलहाल आयकर की दरें और छूट बजट 2025 में किए गए बदलावों के अनुसार ही चल रही हैं। नए टैक्स सिस्टम में मध्यम आय वाले परिवारों पर बोझ कम किया गया है। चार लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं है। चार से आठ लाख रुपये की आय पर 5 प्रतिशत, आठ से बारह लाख पर 10 प्रतिशत, बारह से सोलह लाख पर 15 प्रतिशत, सोलह से बीस लाख पर 20 प्रतिशत, बीस से चौबीस लाख पर 25 प्रतिशत और चौबीस लाख से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत कर लगता है।

बाजार के जानकार इस बार के बजट से पूंजीगत लाभ पर संभावित राहत की उम्मीद कर रहे हैं। साथ ही वे सरकार से लेनदेन करों में वृद्धि न करने का आग्रह कर रहे हैं।

एफएमसीजी क्षेत्र की मांगें

रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली वस्तुएं बनाने वाले एफएमसीजी क्षेत्र ने भी बजट से बड़ी उम्मीदें रखी हैं। सरकार ने देश में खपत और मांग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। अब उद्योग से जुड़े लोग चाहते हैं कि इस साल भी खपत को और बढ़ावा देने के लिए सरकार बजट में बड़े एलान करे।

ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत पर फोकस

विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में खपत बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि यह एफएमसीजी की लगभग 60 प्रतिशत मांग को संचालित करता है। इन क्षेत्रों में लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने वाले कदम उठाए जाने चाहिए। रोजगार के अवसर बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि करने वाली योजनाओं की घोषणा हो सकती है।

बजट के दिन बाजार खुले रहेंगे

इस बार बजट के दिन यानी 1 फरवरी को शेयर बाजार खुले रहेंगे। एनएसई और बीएसई दोनों नियमित समय पर कारोबार करेंगे। बाजार के प्रतिभागी बजट को लेकर खास उम्मीदें नहीं रख रहे हैं। वे मुख्य रूप से पूंजीगत लाभ पर संभावित राहत को लेकर उत्सुक हैं।

आर्थिक विकास की संभावनाएं

आर्थिक सर्वेक्षण 2026 ने बजट के लिए आधार तैयार कर दिया है। इसमें वित्त वर्ष 2027 में भारत की अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। संभावित विकास लगभग 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

वैश्विक अनिश्चितता और व्यापारिक चुनौतियों के बीच यह बजट भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला साबित हो सकता है। विभिन्न क्षेत्रों की मांगों पर सरकार कितना ध्यान देती है, यह देखना होगा। सभी की निगाहें अब 1 फरवरी पर टिकी हैं जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यह महत्वपूर्ण बजट पेश करेंगी।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।