संविधान की शक्ति से बदली जीवन कहानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन की कहानी साझा करते हुए कहा कि भारतीय संविधान की ताकत के कारण ही एक साधारण गरीब परिवार से आने वाला व्यक्ति देश के सर्वोच्च पद तक पहुंच सकता है। मोदी ने एक ब्लॉग के माध्यम से इस संदेश को व्यक्त किया है और इसमें उन्होंने पहली बार मतदान के लिए पात्र हो रहे नई पीढ़ी से विशेष अपील की है। प्रधानमंत्री का यह संदेश न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र के मूल आधार को भी रेखांकित करता है।
संविधान के प्रति प्रधानमंत्री की गहन श्रद्धा स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि 26 नवंबर हर भारतीय के लिए गौरवशाली दिन है क्योंकि इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने भारत के संविधान को अंगीकार किया था। मोदी ने यह भी कहा कि जब वे 2014 में पहली बार संसद भवन में प्रवेश कर रहे थे, तो उन्होंने लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर को सीढ़ियों पर सिर झुकाकर नमन किया। यह घटना प्रधानमंत्री के भारतीय संविधान के प्रति समर्पण और आस्था को प्रदर्शित करती है।
नई पीढ़ी को नागरिक जिम्मेदारी की सीख
प्रधानमंत्री मोदी ने नए मतदाताओं के लिए एक विशेष संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जो युवा 18 वर्ष की आयु पूरी करके मतदान के अधिकार प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें यह महसूस कराना चाहिए कि वे अब केवल छात्र या छात्रा नहीं हैं। उनकी भूमिका देश की नीति निर्माण की प्रक्रिया में एक सक्रिय सहभागी के रूप में परिवर्तित हो गई है। यह संदेश युवा नागरिकों को उनकी जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
मोदी का विचार है कि स्कूलों में हर वर्ष 26 नवंबर को पहली बार मतदान करने वाले युवाओं का सम्मान करने की एक परंपरा विकसित होनी चाहिए। यह पहल युवाओं में लोकतांत्रिक चेतना को जागृत करने का एक सुंदर तरीका है। जब हम इस तरह से युवाओं में जिम्मेदारी और गर्व का भाव जगाएंगे, तो वे जीवनभर लोकतंत्र के मूल्यों के प्रति समर्पित रहेंगे। यह समर्पण ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव बनता है।
संविधान निर्माताओं को समर्पित श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री ने अपने ब्लॉग में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद सहित सभी महान विभूतियों को याद किया है, जिन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने विशेष रूप से डॉक्टर बाबासाहेब अंबेडकर की भूमिका को स्वीकार किया, जिन्होंने असाधारण दूरदृष्टि के साथ इस ऐतिहासिक प्रक्रिया का निरंतर मार्गदर्शन किया। संविधान सभा में महिला सदस्यों की भूमिका को भी मोदी ने रेखांकित किया, जिन्होंने अपने प्रखर विचारों और दृष्टिकोण से भारतीय संविधान को समृद्ध बनाया।
गुजरात के मुख्यमंत्री के दौर की स्मृति
प्रधानमंत्री ने 2010 को याद किया जब गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने संविधान के 60 वर्ष पूरे होने पर संविधान गौरव यात्रा का आयोजन किया था। इस ऐतिहासिक यात्रा में संविधान की प्रतिकृति को एक हाथी पर रखकर भव्य जुलूस निकाला गया था। मोदी के अनुसार, जब संविधान के 75 वर्ष पूरे हुए, तो भारतीय सरकार के लिए यह एक ऐतिहासिक अवसर था। सरकार ने देशभर में विशेष अभियान चलाए और संसद का विशेष सत्र आयोजित किया, जो जन-भागीदारी का बड़ा उत्सव बन गया।
विशेष वर्ष में अतिरिक्त महत्व
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से इस वर्ष को महत्वपूर्ण बताया है क्योंकि यह वर्ष सरदार वल्लभभाई पटेल जी और भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती का है। सरदार पटेल जी के नेतृत्व और सूझबूझ ने देश का राजनीतिक एकीकरण सुनिश्चित किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, सरदार पटेल जी की प्रेरणा से ही उनकी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 की दीवार को गिराने का साहस किया। आर्टिकल 370 हटने के बाद वहां भारतीय संविधान पूरी तरह लागू हो गया और वहां के लोगों को संविधान प्रदत्त सभी अधिकार प्राप्त हुए।
भगवान बिरसा मुंडा जी का जीवन आज भी जनजातीय समुदाय के लिए न्याय, गरिमा और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने की प्रेरणा देता है। इसी वर्ष भारतीय राष्ट्रगान के संगीत आधार वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। वंदे मातरम हर दौर में भारतीयों के लिए प्रासंगिक रहा है और इसके शब्दों में भारतीयों के सामूहिक संकल्प की गूंज निरंतर सुनाई देती है। इसके अलावा, इस वर्ष श्री गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के 350वें वर्ष को भी मनाया जा रहा है, जिनका जीवन और शहादत की गाथा आज भी भारतीयों को प्रेरित करती है।
संविधान की निरंतर प्रासंगिकता
प्रधानमंत्री का मानना है कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक पवित्र ग्रंथ है जो निरंतर देश के विकास का सच्चा मार्गदर्शक बना हुआ है। उनका अनुभव यह है कि संविधान की मजबूत नींव पर ही भारत का लोकतांत्रिक ढांचा खड़ा है। मोदी का कहना है कि उनकी व्यक्तिगत यात्रा स्वयं संविधान की शक्ति का जीवंत उदाहरण है।
प्रधानमंत्री ने 2019 के चुनाव परिणामों के बाद संसद के सेंट्रल हॉल में जाते समय अपनी भावुक प्रतिक्रिया को साझा किया। उस समय उन्होंने सहज ही संविधान को सिर माथे लगा लिया था, जो उनकी गहन श्रद्धा और भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
संविधान दिवस का महत्व और भविष्य दृष्टि
26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने की परंपरा को 2015 में राष्ट्रीय डेमोक्रेटिक एलायंस की सरकार ने शुरू किया था। इसका उद्देश्य भारतीय संविधान के प्रति समर्पण और श्रद्धा को लोगों के मन में जागृत करना था। प्रधानमंत्री के नवीनतम संदेश से स्पष्ट है कि सरकार नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री की अपील का सार यह है कि नए मतदाता केवल एक वोट डालने वाले नहीं हैं, बल्कि वे देश के भविष्य के निर्माता हैं। जब तक लोग अपनी मतदान शक्ति को सही तरीके से समझ नहीं लेते और इसे गंभीरता से नहीं लेते, तब तक लोकतांत्रिक प्रक्रिया अधूरी है। प्रधानमंत्री का संदेश युवाओं को इसी जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करने का एक सराहनीय प्रयास है।
भारतीय संविधान की यात्रा अब तक 75 वर्ष से भी अधिक की हो चुकी है। इस दौरान इसने अनेक चुनौतियों का सामना किया है और लोकतंत्र को मजबूत करते हुए देश को आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री का संदेश इस ऐतिहासिक दस्तावेज के महत्व को रेखांकित करता है और युवा पीढ़ी को इसके संरक्षण की जिम्मेदारी देता है।
संविधान दिवस का यह वर्ष विशेष इसलिए भी है क्योंकि इसमें भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान नेताओं और समाज सुधारकों की स्मृति को मनाया जा रहा है। ये सभी महान व्यक्तित्व आज भी भारतीयों को एकता, न्याय और सशक्तिकरण के पथ पर चलने की प्रेरणा देते हैं। प्रधानमंत्री की अपील इन महान विभूतियों की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त करती है।