जरूर पढ़ें

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पीयूष गोयल ने कहा कृषि और डेयरी क्षेत्र रहेंगे सुरक्षित

India-US Trade Deal: पीयूष गोयल ने बताया कृषि और डेयरी क्षेत्र के लिए फायदेमंद
India-US Trade Deal: पीयूष गोयल ने बताया कृषि और डेयरी क्षेत्र के लिए फायदेमंद (Image Source: AIR)

India-US Trade Deal: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की पूरी सुरक्षा करता है। अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर शुल्क घटाकर 18% किया। यह एमएसएमई, कामगारों और उद्योग के लिए नए अवसर लाएगा और विकसित भारत 2047 की यात्रा को मजबूत करेगा।

Updated:

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते को दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। लोकसभा में दिए गए अपने बयान में मंत्री गोयल ने कहा कि यह समझौता भारत को 2047 तक विकसित भारत बनाने की यात्रा में एक अहम पड़ाव साबित होगा। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि इस व्यापार समझौते के दौरान भारत अपने संवेदनशील क्षेत्रों, खासकर कृषि और डेयरी के हितों की सफलतापूर्वक रक्षा करने में सक्षम रहा है।

व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि

पीयूष गोयल ने बताया कि इस साल 2 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच कई द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर टेलीफोन पर बातचीत हुई थी। इन वार्ताओं के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर अमेरिका में लगने वाले शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की। यह दर अमेरिका द्वारा कई अन्य देशों पर लगाए गए शुल्क की तुलना में काफी कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

मंत्री गोयल ने स्पष्ट किया कि यह समझौता एक साल तक चली कई दौर की बातचीत के बाद संपन्न हुआ। इस दौरान द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कई प्रमुख क्षेत्रों को अंतिम रूप दिया गया। यह समझौता दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच बढ़ते जुड़ाव को दर्शाता है।

कृषि और डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा

केंद्रीय मंत्री ने सदन को बताया कि भारत सरकार ने इस समझौते में कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की है। भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां की बड़ी आबादी खेती और डेयरी उत्पादन पर निर्भर है। इसलिए सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि व्यापार समझौते से इन क्षेत्रों को किसी भी तरह का नुकसान न हो।

डेयरी उद्योग भारत में लाखों परिवारों की आजीविका का साधन है। छोटे और सीमांत किसान इस क्षेत्र से जुड़े हैं। समझौते में इन क्षेत्रों की सुरक्षा यह दर्शाती है कि सरकार अपने नागरिकों के हितों को सर्वोपरि रखती है।

एमएसएमई और उद्योग जगत के लिए नए अवसर

पीयूष गोयल ने व्यापार समझौते के फायदों के बारे में बताते हुए कहा कि यह समझौता छोटे और मध्यम उद्यमों, एमएसएमई, कुशल कामगारों और उद्योग जगत के लिए नए अवसर खोलेगा। भारत का एमएसएमई क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यह क्षेत्र रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अमेरिकी बाजार में कम शुल्क दर से भारतीय एमएसएमई को अपने उत्पाद बेचने में आसानी होगी। इससे इन उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने का मौका मिलेगा। कुशल भारतीय कामगारों के लिए भी यह समझौता नई संभावनाएं लेकर आएगा।

शुल्क में कमी का महत्व

अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्क को 18 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है। यह दर कई अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है। इससे भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।

कम शुल्क का मतलब है कि भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में सस्ते होंगे। इससे भारतीय वस्तुओं की मांग बढ़ेगी। निर्यात बढ़ने से भारत की विदेशी मुद्रा आय में भी इजाफा होगा। यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है।

विकसित भारत 2047 की ओर कदम

पीयूष गोयल ने कहा कि यह व्यापार समझौता भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत का सपना देखा है, जिसमें देश आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी रूप से आगे बढ़े।

व्यापार और निर्यात को बढ़ावा देना इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जरूरी है। अमेरिका जैसे बड़े बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ने से देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और जनता की आय में वृद्धि होगी।

विपक्ष का हंगामा और सरकार का जवाब

मंत्री पीयूष गोयल ने यह बयान विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच दिया। विपक्ष ने व्यापार समझौते पर कई सवाल उठाए। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि यह समझौता पूरी तरह से भारत के हित में है और किसी भी क्षेत्र के साथ समझौता नहीं किया गया है।

सरकार ने यह भी कहा कि समझौते की शर्तें पूरी तरह से पारदर्शी हैं। देश के संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षा देते हुए व्यापार को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता रही है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार संबंध और मजबूत होंगे।

दोनों देशों के संबंधों में मजबूती

भारत और अमेरिका के बीच संबंध सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश रणनीतिक, सुरक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में भी साथ मिलकर काम कर रहे हैं। यह व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का प्रतीक है।

अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार में और वृद्धि होगी। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने से वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक संदेश जाएगा।

भविष्य की संभावनाएं

इस व्यापार समझौते से भारतीय अर्थव्यवस्था को कई तरह से फायदा होगा। निर्यात बढ़ने से उत्पादन में वृद्धि होगी। इससे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के बेहतर मौके मिलेंगे।

सरकार का मानना है कि यह समझौता आने वाले समय में भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने में मदद करेगा। विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए ऐसे कदम बेहद जरूरी हैं। व्यापार समझौते से देश की वैश्विक छवि भी मजबूत होगी।

यह समझौता सिर्फ एक व्यापारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भारत के आत्मनिर्भर और विकसित बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। सरकार ने देश के हर वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए इस समझौते को अंतिम रूप दिया है। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।