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NEET-UG 2026 पर सुप्रीम कोर्ट में नई PIL, NTA को भंग करने की मांग

NEET-UG 2026 पर सुप्रीम कोर्ट में नई PIL, NTA को भंग करने की मांग
NEET-UG 2026 पर सुप्रीम कोर्ट में नई PIL, NTA को भंग करने की मांग

NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और सिस्टम फेलियर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नई PIL दायर हुई है। याचिका में NTA को भंग कर नई वैधानिक संस्था बनाने की मांग की गई है। 22 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य और परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की गई है।

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NEET: देशभर के लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी NEET-UG 2026 परीक्षा एक बार फिर विवादों में घिर गई है। परीक्षा संचालन में कथित गड़बड़ियों और सिस्टम फेलियर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नई जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इस याचिका में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे मौजूदा स्वरूप में पूरी तरह खत्म करने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी जैसे मामले लगातार सामने आए हैं। इससे छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर हुआ है। खासकर NEET जैसी परीक्षा, जो लाखों छात्रों के डॉक्टर बनने के सपने से जुड़ी है, उसमें बार-बार विवाद होना बेहद गंभीर मामला है।

 NTA को  भंग करने की मांग

याचिका में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि NTA को सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत रजिस्टर्ड संस्था के रूप में भंग किया जाए। इसके बदले संसद में कानून बनाकर एक स्वायत्त वैधानिक निकाय (Statutory Body) की स्थापना की जाए, जो सीधे तौर पर संसद के प्रति जवाबदेह हो और जिसके पास स्पष्ट कानूनी अधिकार और सख्त पारदर्शिता नियम हों।

विशेष समिति बनाने की अपील

याचिका में यह भी कहा गया है कि आने वाले समय में राष्ट्रीय परीक्षाओं को जीरो-लीक और पूरी ईमानदारी के साथ कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक विशेष समिति बनाई जाए। यह समिति परीक्षा प्रणाली में सुधार और नई व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया पर नजर रखे।

पेपर लीक से परेशान अभ्यर्थी

दरअसल, NEET-UG देश में मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का एकमात्र माध्यम है। हर साल 22 लाख से अधिक छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल सीधे छात्रों के भविष्य और मानसिक दबाव से जुड़े हैं। कई छात्र सालों की मेहनत और कोचिंग के बाद इस परीक्षा में बैठते हैं। अभिभावक भी बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए अपनी जमा पूंजी तक खर्च कर देते हैं।

याचिका में यह भी दलील दी गई है कि परीक्षा में गड़बड़ियां छात्रों के संविधान प्रदत्त अधिकारों अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन हैं। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट पर टिकी है कि वह इस मामले में क्या बड़ा फैसला सुनाता है।

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Dipali Kumari

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