Rashtra Bharat Logo

वंदे मातरम् ने अंग्रेजों की चाल रोकी, प्रधानमंत्री मोदी बोले– बंगाल की एकता ने देश को संभाला

वंदे मातरम् ने अंग्रेजों की चाल रोकी, प्रधानमंत्री मोदी बोले– बंगाल की एकता ने देश को संभाला
PM Modi Speech on Vande Mataram: पीएम मोदी बोले कि अंग्रेज बंगाल को तोड़कर देश को कमजोर करना चाहते थे (Image: Screengrab - X/@narendramodi)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर कहा कि अंग्रेजों ने 1905 में बंगाल को बांटकर भारत को कमजोर करने की चाल चली, लेकिन वंदे मातरम् ने लोगों को एकजुट कर दिया। यह गीत स्वदेशी आंदोलन की ताकत बना और अंग्रेजों की नीति को चुनौती देता रहा, इसलिए अंग्रेजों ने उस पर रोक भी लगाई।

Updated:
·by
Asfi Shadab
Asfi Shadab
Share:

विषयसूची

वंदे मातरम् की गूंज और देश की एकता

लोकसभा में सोमवार को वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा शुरू हुई। इस चर्चा की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब अंग्रेज भारत को कमजोर करने की पूरी कोशिश कर रहे थे, तब वंदे मातरम् ने पूरे देश को एक सूत्र में बांधे रखा।

प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 1905 में अंग्रेजों ने बंगाल को दो हिस्सों में बाँट दिया था। अंग्रेजों को लगता था कि यदि बंगाल टूट गया, तो भारत भी टूट जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वंदे मातरम् उस कठिन समय में देश की हिम्मत बनकर खड़ा रहा।

अंग्रेजों की योजना और बंगाल को चुनने का कारण

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेज समझ गए थे कि भारत में उनका टिके रहना आसान नहीं है। इसलिए उन्होंने यह रास्ता चुना कि भारत को बांटकर राज किया जाए। अंग्रेजों का मानना था कि यदि भारत के लोग एक-दूसरे से लड़ेंगे, तो वे लंबे समय तक राज कर सकेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि अंग्रेजों ने बंगाल को इसलिए चुना क्योंकि उस समय बंगाल देश का बौद्धिक केंद्र था। बंगाल की सोच, बंगाल की शक्ति और बंगाल की प्रेरणा पूरे भारत को दिशा देती थी। अंग्रेज इसी शक्ति को कमजोर करना चाहते थे।

1905 का विभाजन और वंदे मातरम् की भूमिका

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1905 में अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया। यह कदम भारत की एकता पर चोट था। लेकिन वंदे मातरम् उस समय एक चट्टान की तरह खड़ा रहा। गली-गली, गाँव-गाँव और शहर-शहर में वंदे मातरम् का स्वर गूंजता रहा।

वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा की आवाज था। लोगों ने इसे केवल गाने के रूप में नहीं, बल्कि अपने संघर्ष और अपने आत्मविश्वास का प्रतीक बना लिया था।

स्वदेशी आंदोलन और देश की नई चेतना

प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल विभाजन के बाद पूरे देश में एक बड़ा स्वदेशी आंदोलन खड़ा हुआ। यह आंदोलन अंग्रेजों के खिलाफ एक शांत लेकिन मजबूत जवाब था। लोग विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करने लगे। स्थानीय चीजों को अपनाने लगे। इस परिवर्तन ने अंग्रेजों पर दबाव बढ़ाया।

वंदे मातरम् इस पूरे आंदोलन की प्रेरणा बना रहा। यह गीत लोगों को साहस देता था। युवाओं को आगे बढ़ने का हौसला मिलता था। महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में इस आंदोलन का नेतृत्व किया और इतिहास में खास जगह बनाई।

अंग्रेजों का डर और वंदे मातरम् पर रोक

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंग्रेज वंदे मातरम् की शक्ति को समझ गए थे। बंकिमचंद्र चटर्जी, जिन्हें बंकिम बाबू कहा जाता है, ने यह गीत रचा। यह गीत बंगाल से उठकर पूरे भारत में फैल गया और अंग्रेजों की नीतियों को चुनौती देने लगा।

अंग्रेज इतने घबरा गए कि उन्होंने वंदे मातरम् पर कानूनी रोक लगा दी। गाने पर सजा, छापने पर सजा और यहां तक कि बोलने पर भी सजा का कानून बना दिया गया। यह दिखाता है कि इस गीत ने अंग्रेजों को किस हद तक परेशान किया था।

पीएम मोदी ने कहा कि यह गीत भारत की आजादी के संघर्ष में एक मजबूत शक्ति बन चुका था। महिलाएं भी बड़ी बहादुरी से आगे आईं। प्रधानमंत्री ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि अनेक महिलाएं केवल वंदे मातरम् के लिए जेल जाने को तैयार थीं।

वंदे मातरम्: एकता का सूत्र

प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् ने भारत की एकता को मजबूती दी। अंग्रेज जहां देश को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे, वहीं वंदे मातरम् ने लोगों को जोड़ने का काम किया।

उन्होंने कहा कि यह गीत केवल आजादी के समय की स्मृति नहीं है, बल्कि आज भी यह गीत देश की एकता और शक्ति का प्रतीक है।

आगे राज्यसभा में चर्चा

लोकसभा में इस विषय पर 10 घंटे की चर्चा तय की गई है। मंगलवार को राज्यसभा में भी राष्ट्रगीत पर चर्चा होगी, जिसकी शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे।

यह पूरा कार्यक्रम इस बात का प्रतीक है कि वंदे मातरम् ने देश को सदा एकजुट रखा और आज भी वही भावना देश के अंदर जीवित है।

Rashtra Bharat
Rashtra Bharat पर पढ़ें ताज़ा खेल, राजनीति, विश्व, मनोरंजन, धर्म और बिज़नेस की अपडेटेड हिंदी खबरें।

Asfi Shadab

Asfi Shadab

असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।