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साध्वी प्रेम बाईसा की रहस्यमयी मौत, इंजेक्शन के 30 सेकंड बाद बुझ गई जिंदगी, न्याय की मांग तेज

साध्वी प्रेम बाईसा की रहस्यमयी मौत, इंजेक्शन के 30 सेकंड बाद बुझ गई जिंदगी, न्याय की मांग तेज
साध्वी प्रेम बाईसा की रहस्यमयी मौत, इंजेक्शन के 30 सेकंड बाद बुझ गई जिंदगी (Pic Credit- X @Ramesh_Chouhan0)

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की इंजेक्शन के 30 सेकंड बाद हुई मौत ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार, संत समाज और अनुयायी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया विवाद और अस्पताल की भूमिका ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

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Dipali Kumari
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Sadhvi Prem Baisa Death: राजस्थान के जोधपुर में साध्वी और प्रसिद्ध कथावाचक प्रेम बाईसा की अचानक हुई मौत ने न केवल उनके अनुयायियों को गहरे शोक में डुबो दिया है, बल्कि पूरे प्रदेश में कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। एक ऐसी साध्वी, जो पूरी तरह स्वस्थ बताई जा रही थी, इंजेक्शन लगने के महज कुछ सेकंड बाद दम तोड़ देती है — यह कहानी जितनी दर्दनाक है, उतनी ही रहस्यमयी भी।

इस घटना के बाद अस्पताल की भूमिका, दवा देने की प्रक्रिया, मेडिकल प्रोटोकॉल और पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। परिवार न्याय चाहता है, संत समाज सच्चाई की मांग कर रहा है और सोशल मीडिया पर बहस तेज होती जा रही है।

इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत, 30 सेकंड में सब खत्म

साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरम नाथ बताते हैं कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी। धार्मिक कार्यक्रमों के कारण व्यस्त जरूर रहती थी, लेकिन किसी भी तरह की गंभीर बीमारी नहीं थी। 28 जनवरी को उन्हें केवल हल्का जुकाम और गले में खराश की शिकायत हुई थी। पिता का कहना है कि उन्होंने अस्पताल चलने की बात कही, लेकिन साध्वी ने इसे मामूली समस्या बताते हुए घर पर ही डॉक्टर बुलाने को कहा।

कंपाउंडर घर पहुंचा, शुरुआती जांच की और इंजेक्शन लगाया। परिजनों के मुताबिक इंजेक्शन लगते ही हालात तेजी से बिगड़ने लगे। सांस लेने में दिक्कत, बेचैनी और अचानक कमजोरी ने पूरे परिवार को घबरा दिया। सब कुछ 30 सेकंड के भीतर हुआ।

अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित

घबराए परिजन साध्वी को तुरंत जोधपुर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यही वह पल था, जहां से सवालों की लंबी श्रृंखला शुरू होती है। क्या दवा से एलर्जिक रिएक्शन हुआ? क्या बिना टेस्ट इंजेक्शन दिया गया? क्या यह मेडिकल लापरवाही का मामला है? जवाब किसी के पास नहीं है।

पैतृक गांव पहुंचा पार्थिव शरीर

जब साध्वी प्रेम बाईसा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव परेऊ (बालोतरा) पहुंचा, तो पूरा गांव शोक में डूब गया। सैकड़ों ग्रामीण, अनुयायी और संत समाज के लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। महिलाएं भजन गा रही थीं, तो पुरुषों की आंखों में आंसू थे। हर चेहरा सवाल कर रहा था — आखिर ऐसा कैसे हुआ?

समाधि के साथ न्याय की मांग

परिजनों ने परंपरा के अनुसार साध्वी को समाधि देने का निर्णय लिया। लेकिन इस धार्मिक निर्णय के साथ ही न्याय की मांग और तेज हो गई। परिवार साफ कह रहा है कि वे किसी पर सीधा आरोप नहीं लगा रहे, लेकिन निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है।

“मरने के बाद मुझे न्याय मिलना चाहिए”

वीरम नाथ उस पल को याद कर भावुक हो जाते हैं, जब उनकी बेटी ने आखिरी बार कहा था — “मुझे जीते जी तो न्याय नहीं मिला, लेकिन मरने के बाद मुझे न्याय जरूर मिलना चाहिए।” ये शब्द इस पूरे मामले को और भी गंभीर बना देते हैं। यही वजह है कि परिवार अब किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है।

सोशल मीडिया विवाद और संत समाज की नाराजगी

मामले के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तरह-तरह की पोस्ट वायरल होने लगीं। निजी रिश्तों, भगवा और चरित्र को लेकर की गई टिप्पणियों ने संत समाज को आक्रोशित कर दिया है। मेवाड़ से पहुंचीं महामंडलेश्वर ईश्वरी नंद गिरी ने साफ कहा कि बिना सच्चाई जाने साधु-संतों की छवि खराब करना बेहद शर्मनाक है।

संत समाज ने मांग की है कि न केवल साध्वी की मौत की निष्पक्ष जांच हो, बल्कि सोशल मीडिया पर अनर्गल टिप्पणी करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि ऐसी बातें समाज में भ्रम और नफरत फैलाती हैं।

आश्रम से हटे सीसीटीवी, बढ़ा संदेह

साध्वी के समर्थक प्रेमराज चौधरी का कहना है कि हाल ही में आश्रम से सीसीटीवी कैमरे हटाए गए, जो कई सवाल खड़े करते हैं। कैमरे क्यों हटाए गए, इसका जवाब भी जांच का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत में पोस्टमॉर्टम से इनकार करना सही फैसला नहीं था।

जुलाई में वायरल हुआ था वीडियो

पिछले साल जुलाई में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें साध्वी अपने पिता से गले मिलती दिख रही थीं। इस वीडियो को लेकर विवाद हुआ और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। उस समय भी साध्वी मानसिक दबाव में थीं। अनुयायियों का कहना है कि उस घटना के बाद से वे लगातार तनाव में थीं।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।