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Winter Session: टीएमसी सांसद पर सदन के भीतर सिगरेट पीने का आरोप, जमकर हुआ हंगामा

Winter Session: टीएमसी सांसद पर सदन के भीतर सिगरेट पीने का आरोप, जमकर हुआ हंगामा
सदन में अनुराग ठाकुर

लोकसभा के शीतकालीन सत्र में उस समय हंगामा मच गया, जब भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने टीएमसी सांसद पर सदन के अंदर ई-सिगरेट पीने का आरोप लगाया। स्पीकर ओम बिरला ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया। यह विवाद संसद की मर्यादा, सदस्यों के आचरण और अनुशासन पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

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Dipali Kumari
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Winter Session: शीतकालीन सत्र आमतौर पर गंभीर विधायी कार्यों और राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस का समय माना जाता है, लेकिन इस बार लोकसभा का वातावरण उस क्षण भारी हो गया, जब सदन के भीतर एक ऐसी गतिविधि का आरोप लगा जिसकी कल्पना तक मुश्किल है। टीएमसी के एक सांसद पर सदन के भीतर ई-सिगरेट पीने का आरोप लगते ही पूरा सदन गूंज उठा, और इस घटना ने न केवल सदन की कार्यवाही को बाधित किया, बल्कि संसद की गरिमा पर भी सीधा प्रश्नचिह्न लगा दिया।

 सांसद अनुराग ठाकुर ने उठायी आवाज

प्रश्नकाल के दौरान भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने अचानक स्पीकर ओम बिरला का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वे टीएमसी के एक सांसद को सदन के अंदर ई-सिगरेट पीते हुए देख रहे हैं। यह सुनते ही सदन में उपस्थित सदस्यों के बीच हलचल बढ़ गई और विपक्षी सांसदों पर कार्रवाई की मांग तेज होने लगी। कुछ ही क्षणों में सदन की आवाज़ें मुद्दों पर नहीं, बल्कि शोर और आरोपों पर केंद्रित हो गईं।

स्पीकर ओम बिरला की सख्त प्रतिक्रिया

स्पीकर ओम बिरला ने इस मामले पर तुरंत संज्ञान लिया और कहा कि यदि कोई सदस्य सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, तो उस पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि लिखित शिकायत दी जाती है, तो जांच अवश्य कराई जाएगी।

देश में ई-सिगरेट प्रतिबंधित

अनुराग ठाकुर ने अपनी ओर से इस मुद्दे को बेहद संजीदगी से उठाया। उनका कहना था कि जब पूरे देश में ई-सिगरेट प्रतिबंधित है, तो संसद जैसे सर्वोच्च संस्थान में इस प्रकार की गतिविधि अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि सदन वह स्थान है जिसे देश का हर नागरिक सम्मान और आशा की दृष्टि से देखता है। यहां का हर व्यवहार आदर्श होना चाहिए, क्योंकि यह सिर्फ कानून बनाने की जगह नहीं, बल्कि नैतिक संदेश देने का मंच भी है।

सदन की मर्यादा पर फिर उठे बड़े सवाल

यह घटना सिर्फ एक विवाद नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के आचरण पर गहरा विमर्श खड़ा करती है। पिछले कुछ वर्षों में कई बार सदन के अंदर उठापटक, कुर्सियाँ फेंकने, पोस्टर लगाने जैसी घटनाएँ सुर्खियाँ बनी हैं। अब ई-सिगरेट जैसा आरोप इस सूची को और लंबा कर गया है।

ई-सिगरेट पर कानून क्या कहता है?

भारत में 2019 में ई-सिगरेट पर व्यापक प्रतिबंध लगाया गया था। इसके तहत—उत्पादन,आयात, बिक्री, भंडारण, विज्ञापन सभी पूर्णत: प्रतिबंधित हैं।
ऐसे में अगर संसद के भीतर ही इसका उपयोग पाया जाता है, तो यह न केवल नैतिक, बल्कि कानूनी उल्लंघन भी माना जाएगा।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।