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कब है चैत्र पूर्णिमा? किस दिन रखा जायेगा व्रत, जानिए सभी सवालों के जवाब

कब है चैत्र पूर्णिमा? किस दिन रखा जायेगा व्रत, जानिए सभी सवालों के जवाब
आज रात चंद्रमा को दिया जायेगा अर्घ्य, जानिए चैत्र पूर्णिमा की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

चैत्र पूर्णिमा इस बार खास संयोग और उलझन लेकर आई है, जहां तिथि दो दिनों में बंटी हुई है। कब रखें व्रत और किस दिन करें स्नान-दान, इसे लेकर लोग असमंजस में हैं। साथ ही हनुमान जन्मोत्सव भी इसी बीच पड़ रहा है, जिससे इस बार का पर्व और भी रहस्यमयी बन गया है।

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Dipali Kumari
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Chaitra Purnima: आस्था और श्रद्धा का पर्व चैत्र पूर्णिमा इस बार खास संयोग लेकर आ रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह केवल पूर्णिमा का पर्व नहीं, बल्कि भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और संकटमोचन हनुमान जी की उपासना का भी महत्वपूर्ण अवसर है। इस बार की चैत्र पूर्णिमा दो दिनों में मनाई जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं के लिए तिथि और पूजा विधि को समझना जरूरी हो गया है।

क्यों खास है चैत्र पूर्णिमा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। वहीं, इसी दिन हनुमान जी का जन्म भी माना जाता है, इसलिए इस दिन हनुमान जन्मोत्सव का भी विशेष आयोजन होता है।

कब रखा जायेगा व्रत?

इस साल तिथियों के अनुसार 1 अप्रैल को व्रत वाली पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन पूर्णिमा तिथि पूरे दिन रहेगी, भले ही उदया तिथि में यह न हो। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करेंगे। इस दिन भरणी नक्षत्र और विष्कंभ योग का विशेष संयोग भी बन रहा है, जो पूजा-पाठ के लिए शुभ माना जाता है। हालांकि, भद्रा का साया भी दिनभर बना रहेगा, जिससे कुछ कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

2 अप्रैल को स्नान और दान वाली पूर्णिमा

वहीं 2 अप्रैल को स्नान और दान वाली पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन सुबह तक ही पूर्णिमा तिथि रहेगी और इसके बाद वैशाख मास की शुरुआत हो जाएगी। इसी दिन हनुमान जन्मोत्सव भी मनाया जाएगा। मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

ग्रहों की स्थिति

ग्रहों की स्थिति की बात करें तो इस दिन कई महत्वपूर्ण ग्रह अपनी-अपनी राशियों में स्थित रहेंगे। शुक्र मेष राशि में, सूर्य और शनि मीन राशि में, जबकि गुरु मिथुन राशि में रहेंगे। इसके अलावा मंगल का गोचर भी होने जा रहा है, जो धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।