Chaitra Purnima: आस्था और श्रद्धा का पर्व चैत्र पूर्णिमा इस बार खास संयोग लेकर आ रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह केवल पूर्णिमा का पर्व नहीं, बल्कि भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और संकटमोचन हनुमान जी की उपासना का भी महत्वपूर्ण अवसर है। इस बार की चैत्र पूर्णिमा दो दिनों में मनाई जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं के लिए तिथि और पूजा विधि को समझना जरूरी हो गया है।
क्यों खास है चैत्र पूर्णिमा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। वहीं, इसी दिन हनुमान जी का जन्म भी माना जाता है, इसलिए इस दिन हनुमान जन्मोत्सव का भी विशेष आयोजन होता है।
कब रखा जायेगा व्रत?
इस साल तिथियों के अनुसार 1 अप्रैल को व्रत वाली पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन पूर्णिमा तिथि पूरे दिन रहेगी, भले ही उदया तिथि में यह न हो। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करेंगे। इस दिन भरणी नक्षत्र और विष्कंभ योग का विशेष संयोग भी बन रहा है, जो पूजा-पाठ के लिए शुभ माना जाता है। हालांकि, भद्रा का साया भी दिनभर बना रहेगा, जिससे कुछ कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
2 अप्रैल को स्नान और दान वाली पूर्णिमा
वहीं 2 अप्रैल को स्नान और दान वाली पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन सुबह तक ही पूर्णिमा तिथि रहेगी और इसके बाद वैशाख मास की शुरुआत हो जाएगी। इसी दिन हनुमान जन्मोत्सव भी मनाया जाएगा। मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
ग्रहों की स्थिति
ग्रहों की स्थिति की बात करें तो इस दिन कई महत्वपूर्ण ग्रह अपनी-अपनी राशियों में स्थित रहेंगे। शुक्र मेष राशि में, सूर्य और शनि मीन राशि में, जबकि गुरु मिथुन राशि में रहेंगे। इसके अलावा मंगल का गोचर भी होने जा रहा है, जो धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।