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Delhi Blast: लाल किला के पास धमाके में i-20 कार का सुराग, कनॉट प्लेस और मयूर विहार में दिखी थी गाड़ी

Delhi Blast: लाल किला के पास धमाके में i-20 कार का सुराग, कनॉट प्लेस और मयूर विहार में दिखी थी गाड़ी
Delhi Blast: लाल किला के पास धमाके में i-20 कार का सुराग, कनॉट प्लेस और मयूर विहार में दिखी थी गाड़ी (File Photo)

Delhi Blast 2025 में लाल किला के पास आई-20 कार में हुए विस्फोट से दिल्ली दहल उठी। जांच में पता चला कि कार पहले कनॉट प्लेस और मयूर विहार में दिखी थी। 10 लोगों की मौत, 26 घायल, एनआईए ने जांच शुरू की और जैश-ए-मोहम्मद के हाथ होने की आशंका जताई गई।

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Asfi Shadab
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Delhi Blast: लाल किला के पास विस्फोट से हिली राजधानी, जांच में मिला अहम सुराग

दिल्ली की शांति सोमवार शाम उस वक्त भंग हो गई जब लाल किला के पास खड़ी एक आई-20 कार में अचानक जोरदार धमाका हुआ। इस धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया और राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

विस्फोट में इस्तेमाल कार पहले दो जगहों पर दिखी

प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि धमाके में इस्तेमाल की गई आई-20 कार को धमाके से पहले राजधानी के दो प्रमुख इलाकों—कनॉट प्लेस और मयूर विहार—में देखा गया था। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने पुष्टि की है कि यह वाहन कई घंटों तक इन इलाकों में घूमता रहा।

पुलिस के अनुसार, आतंकी उमर नबी ने इस कार को पार्किंग में करीब तीन घंटे तक खड़ा रखा, जिसके बाद शाम 6:52 बजे इसमें विस्फोट हुआ। विस्फोट इतना तीव्र था कि आसपास खड़े वाहनों के परखच्चे उड़ गए और कई दुकानों के शीशे टूट गए।

10 लोगों की मौत, 26 घायल

इस धमाके में अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि 26 लोग घायल हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है।

जैश-ए-मोहम्मद का हाथ होने की आशंका

सूत्रों के अनुसार, इस हमले के पीछे पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ बताया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया है कि फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े प्रोफेसर उमर नबी बट ने इस विस्फोट की योजना बनाई थी। प्राथमिक जांच रिपोर्ट में इसे आतंकी हमला घोषित किया गया है।

एनआईए ने संभाली जांच

Delhi Blast: गृह मंत्रालय के आदेश के बाद इस पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी गई है। दिल्ली पुलिस और एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लैब) की टीम भी जांच में सहयोग कर रही है।
प्रारंभिक जांच में यह पाया गया है कि विस्फोटक सामग्री में अमोनियम नाइट्रेट, ईंधन तेल और डेटोनेटर जैसे घटकों का इस्तेमाल किया गया है।

धमाका बाकी विस्फोटों से अलग

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, लाल किला के बाहर हुआ यह धमाका दिल्ली में अब तक हुए अन्य धमाकों से बिल्कुल भिन्न है।
पहले हुए विस्फोटों में लोहे की कीलें या टुकड़े मिलते थे, लेकिन इस बार ऐसे कोई अवशेष नहीं मिले। इससे संकेत मिल रहा है कि धमाके में इस्तेमाल विस्फोटक अत्याधुनिक और रासायनिक प्रकृति का था।

जांच एजेंसियां उलझी रासायनिक मिश्रण में

विस्फोट में किस प्रकार के रासायनिक मिश्रण का प्रयोग किया गया, यह अब तक रहस्य बना हुआ है। फोरेंसिक टीमें इस दिशा में काम कर रही हैं और केमिकल विश्लेषण जारी है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि विस्फोट का सबसे ज्यादा प्रभाव कार के पीछे के हिस्से पर पड़ा। उसके पीछे खड़े लगभग 10-12 वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।

राजधानी की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

दिल्ली जैसे उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में इस तरह का आतंकी हमला न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि सुरक्षा तंत्र की कमजोरियों को भी उजागर करता है।
लाल किला, जो न केवल ऐतिहासिक धरोहर है बल्कि प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का केंद्र भी रहता है, उसके पास ऐसा धमाका होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

जनता में भय और चिंता का माहौल

विस्फोट के बाद आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोग रात भर अपने घरों में सतर्क रहे। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।