Delhi Accident News: देश की राजधानी दिल्ली में एक बार फिर लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। जनकपुरी इलाके में जल बोर्ड के खुले और पानी से भरे गड्ढे में गिरने से एक बाइक सवार युवक की मौत हो गई। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की उस अनदेखी का उदाहरण है, जिसमें आम आदमी की जान सबसे सस्ती साबित होती है।
मृतक युवक का नाम कमल बताया गया है, जो कैलाशपुरी का रहने वाला था। वह रोज की तरह अपने दफ्तर से घर लौट रहा था, लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
रोहिणी से घर लौटते वक्त हुआ हादसा
परिजनों के मुताबिक कमल रोहिणी स्थित अपने दफ्तर से देर रात घर के लिए निकला था। रास्ते में वह लगातार अपने परिवार के संपर्क में था। फोन पर बात हो रही थी और सब कुछ सामान्य लग रहा था। लेकिन अचानक संपर्क टूट गया।
जब देर रात तक कमल घर नहीं पहुंचा, तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। पहले सोचा गया कि शायद कहीं रुक गया होगा या फोन की बैटरी खत्म हो गई होगी, लेकिन समय बीतने के साथ बेचैनी भी बढ़ती चली गई।
रात भर तलाश, सुबह मिला दिल दहला देने वाला सच
कमल के घर न पहुंचने पर परिजन और रिश्तेदार उसे ढूंढने निकल पड़े। आसपास के इलाकों, संभावित रास्तों और जान-पहचान वालों से पूछताछ की गई, लेकिन पूरी रात कोई सुराग नहीं मिला।
सुबह करीब 7:30 बजे पुलिस का फोन आया। कॉल सुनते ही परिवार को अनहोनी की आशंका हो गई। जब वे मौके पर पहुंचे, तो देखा कि कमल अपनी बाइक के साथ जल बोर्ड के गहरे गड्ढे में गिरा हुआ था। गड्ढा पानी से भरा हुआ था, जिससे बाहर निकलने का कोई मौका नहीं मिला।
खुले गड्ढे बने मौत का कारण
स्थानीय लोगों का कहना है कि जनकपुरी इलाके में जल बोर्ड का यह गड्ढा लंबे समय से खुला पड़ा था। न तो वहां कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था और न ही बैरिकेडिंग की गई थी। रात के अंधेरे में सड़क पर चलते समय गड्ढा दिखाई देना लगभग नामुमकिन था।
आशंका जताई जा रही है कि बाइक फिसलने के बाद कमल सीधे गड्ढे में जा गिरा और पानी भरा होने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
सवालों के घेरे में जल बोर्ड और प्रशासन
इस हादसे के बाद एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर खुले गड्ढों की जिम्मेदारी कौन लेगा। हर साल राजधानी में ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां सड़क पर बने गड्ढे, खुले नाले या अधूरे निर्माण कार्य लोगों की जान ले लेते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जल बोर्ड और संबंधित विभागों ने इस गड्ढे को न तो ढका और न ही कोई सुरक्षा इंतजाम किए। अगर समय रहते सावधानी बरती गई होती, तो शायद आज एक परिवार उजड़ने से बच सकता था।
पुलिस जांच में जुटी, परिवार सदमे में
फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। यह भी देखा जा रहा है कि गड्ढा कब और किस वजह से खोदा गया था और क्यों इसे खुला छोड़ दिया गया।
कमल के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। घर में मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम है। परिजन सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि अगर प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी निभाई होती, तो क्या आज कमल जिंदा नहीं होता?
आम लोगों की सुरक्षा पर फिर सवाल
यह हादसा सिर्फ कमल की मौत की कहानी नहीं है, बल्कि दिल्ली की सड़कों पर चल रहे हर आम आदमी की चिंता का विषय है। रोजमर्रा की जिंदगी में दफ्तर से घर लौटना अब सुरक्षित नहीं रह गया है।
खुले गड्ढे, टूटी सड़कें और बिना चेतावनी के चल रहे काम यह साबित करते हैं कि शहरी व्यवस्था में आम नागरिक की सुरक्षा आज भी प्राथमिकता नहीं बन पाई है।