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संसद में राहुल गांधी और स्पीकर के बीच तीखी बहस, चीन के मुद्दे पर मचा बवाल

संसद में राहुल गांधी और स्पीकर के बीच तीखी बहस, चीन के मुद्दे पर मचा बवाल
Parliament Fight, Rahul Gandhi vs Speaker on China Issue: संसद में राहुल गांधी और स्पीकर ओम बिरला के बीच तीखी नोकझोंक (File Photo)

Parliament Fight, Rahul Gandhi vs Speaker on China Issue: लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने चीन और डोकलाम का मुद्दा उठाया। पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब का हवाला देने पर स्पीकर ओम बिरला ने नियम 349 का जिक्र करते हुए रोका। इस पर सदन में जोरदार बहस हुई और अखिलेश यादव ने राहुल का समर्थन किया। आखिरकार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

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Asfi Shadab
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लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान हुआ विवाद

Parliament Fight Rahul Gandhi vs Speaker on China Issue: संसद का बजट सत्र इन दिनों जोरों पर चल रहा है। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश की सुरक्षा और चीन से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे की किताब का हवाला देते हुए डोकलाम में चीनी सेना की मौजूदगी का जिक्र किया। इस पर सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह दोनों ने राहुल गांधी के बयान पर तुरंत आपत्ति जताई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के नियम 349 का जिक्र करते हुए राहुल गांधी को ऐसी किताब का उल्लेख न करने की हिदायत दी जो अभी प्रकाशित नहीं हुई है। लेकिन राहुल गांधी अपनी बात पर अड़े रहे और बार-बार वही मुद्दा उठाते रहे।

स्पीकर और राहुल गांधी के बीच तीखी नोकझोंक

जब सदन में बवाल बढ़ता गया तो राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला से सीधे सवाल किया। उन्होंने कहा कि अगर मैं यह नहीं कह सकता तो फिर आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या कहना है। इस सवाल पर स्पीकर ने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए साफ शब्दों में कहा कि मैं आपका सलाहकार नहीं हूं। आपको उसी विषय पर बात करनी चाहिए जिस पर यहां चर्चा चल रही है।

स्पीकर ने राहुल गांधी को समझाया कि वे ऐसी सामग्री का हवाला दे रहे हैं जो अभी तक प्रकाशित ही नहीं हुई है। रक्षा मंत्री ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है वह अभी छपी ही नहीं है। इसके अलावा जो मुद्दा उठाया जा रहा है उसका राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चल रही चर्चा से कोई सीधा संबंध नहीं है।

चीन पर चर्चा से रोकने वाला नियम कौन सा है

राहुल गांधी ने स्पीकर से सवाल किया कि आखिर कौन सा नियम हमें भारत और चीन के संबंधों पर बात करने से रोकता है। उन्होंने कहा कि चीन हमारे देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला है और इस पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। राहुल गांधी ने यह भी पूछा कि क्या राष्ट्रपति के अभिभाषण का विदेश नीति से कोई संबंध नहीं है।

स्पीकर ओम बिरला ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि आप विषय पर बात करें। आपको इस संबंध में कई बार नियमों से अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने साफ किया कि समस्या चीन की चर्चा करने में नहीं है बल्कि ऐसी किताब का हवाला देने में है जो अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है।

राहुल गांधी ने फिर उठाया मुद्दा

इसके बाद राहुल गांधी ने एक मैग्जिन में छपे लेख का हवाला देते हुए फिर से पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे के बयान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह जानकारी एक प्रकाशित पत्रिका में आई है इसलिए इस पर चर्चा की जा सकती है। लेकिन इस पर भी सत्ता पक्ष की ओर से जोरदार हंगामा हुआ।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फिर से आपत्ति जताई और कहा कि नेता प्रतिपक्ष को ऐसा करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा है और इस पर बिना जानकारी के बयान देना सही नहीं है।

अखिलेश यादव ने दिया राहुल गांधी का साथ

जब सदन में बहस गरमा गई तो समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव राहुल गांधी के समर्थन में खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि चीन का सवाल बहुत संवेदनशील है। अगर कोई सुझाव देश के हित में है तो विपक्ष के नेता को अपनी बात रखने देनी चाहिए।

अखिलेश यादव ने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया से लेकर मुलायम सिंह यादव तक का जिक्र करते हुए कहा कि हमें चीन से हमेशा सावधान रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन की नीयत कभी साफ नहीं रही है और हमें इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचना होगा।

संसदीय कार्य मंत्री ने जताई आपत्ति

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू ने कहा कि हम सबकी बात सुनने के लिए तैयार बैठे हैं। लेकिन जब सदन के अध्यक्ष व्यवस्था दे चुके हैं तब भी अगर वही बात बार-बार दोहराई जाए तो यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे में सदन की कार्यवाही कैसे चलेगी।

रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम सबके लिए बराबर हैं। अगर स्पीकर ने किसी नियम का हवाला दिया है तो उसका पालन करना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वे संसदीय मर्यादा का पालन करें और विषय पर ही बात करें।

सदन की कार्यवाही हुई स्थगित

सदन में लगातार हंगामा होता रहा। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच नोकझोंक चलती रही। राहुल गांधी अपनी बात पर अड़े रहे तो सरकार की ओर से भी किसी तरह की छूट देने से इनकार कर दिया गया। इस गतिरोध को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

यह पहली बार नहीं है जब संसद में चीन के मुद्दे पर बहस हुई हो। पहले भी कई बार विपक्ष ने चीन की सीमा पर घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र में उसकी हरकतों को लेकर सवाल उठाए हैं। लेकिन हर बार सरकार की ओर से कहा जाता है कि स्थिति नियंत्रण में है।

क्या है नियम 349

Parliament Fight Rahul Gandhi vs Speaker on China Issue: लोकसभा का नियम 349 कहता है कि सदस्य ऐसी किसी सामग्री का हवाला नहीं दे सकते जो प्रकाशित नहीं हुई है। इसके अलावा अगर कोई दस्तावेज गोपनीय है या उसकी प्रामाणिकता संदिग्ध है तो उसका जिक्र करने की अनुमति नहीं दी जाती। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि सदन में सिर्फ सत्यापित जानकारी के आधार पर ही चर्चा हो।

इस मामले में रक्षा मंत्री ने साफ कहा था कि जिस किताब का हवाला दिया जा रहा है वह अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है। ऐसे में उसके आधार पर कोई बयान देना संसदीय नियमों के खिलाफ है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा

संसद में हुए इस हंगामे की राजनीतिक गलियारों में जोरदार चर्चा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार चीन के मुद्दे पर चर्चा से बच रही है। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि नियमों का पालन करना जरूरी है और विपक्ष बिना किसी ठोस आधार के सिर्फ हंगामा कर रहा है।

विपक्ष के नेताओं का कहना है कि चीन देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है और इस पर खुलकर बहस होनी चाहिए। सरकार को देश को विश्वास में लेना चाहिए कि सीमा पर क्या हो रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि वह हर मामले में पारदर्शी है और देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा रहा।

यह घटना बताती है कि संसद में अभी भी कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच गहरे मतभेद हैं। बजट सत्र अभी चल रहा है और आने वाले दिनों में भी कई अहम मुद्दों पर चर्चा होनी है।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।