7 जनवरी 2026 की सुबह दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में एक बड़ी कार्रवाई देखने को मिली। दिल्ली नगर निगम ने 17 से 32 बुलडोजर लगाकर फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास 38,000 वर्ग फुट में फैले अवैध निर्माणों को हटा दिया। यह कार्रवाई नवंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद की गई। इस दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें पांच पुलिसकर्मी हल्के रूप से घायल हो गए।
कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने नवंबर 2025 में आदेश दिया था कि मस्जिद के आसपास जो भी अवैध निर्माण है, उसे हटाया जाए। यह जमीन लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस की है और नगर निगम को पट्टे पर दी गई थी। मस्जिद कमेटी और दिल्ली वक्फ बोर्ड इस जमीन पर अपना मालिकाना हक साबित नहीं कर सके। इसी आधार पर कोर्ट ने सफाई की अनुमति दी।
किन निर्माणों को हटाया गया
इस कार्रवाई में कई तरह के अवैध निर्माण शामिल थे। इनमें एक बैंक्वेट हॉल, डायग्नोस्टिक सेंटर, सड़कें और फुटपाथ पर बने अवैध ढांचे शामिल थे। ये सभी निर्माण सार्वजनिक जमीन पर अवैध रूप से खड़े किए गए थे। नगर निगम की टीम ने सुबह-सुबह कार्रवाई शुरू की और पूरे दिन यह अभियान चला।
मुख्य मस्जिद को नहीं छुआ गया
यह ध्यान देने वाली बात है कि इस पूरी कार्रवाई में मुख्य मस्जिद को बिल्कुल भी नहीं छुआ गया। 8,000 वर्ग फुट में फैली मुख्य मस्जिद की इमारत सुरक्षित रही। कार्रवाई सिर्फ उन अवैध निर्माणों के खिलाफ थी जो सार्वजनिक जमीन पर बनाए गए थे।
RELIGIOUS SLOGANS PROPELLED STREET-OCRACY?
Amid cries of Allah Hu Akbar stone pelters attacked an instrument of the Indian State. Several policemen injured for doing their job. This riot took place 4 Kms from Parliament. pic.twitter.com/7QsTu9gYg7
— Rahul Shivshankar (@RShivshankar) January 7, 2026
पथराव और पुलिस कार्रवाई
जब नगर निगम की टीम ने अपना काम शुरू किया, तो कुछ लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया। विरोध के दौरान कुछ उपद्रवी तत्वों ने पुलिस पर पत्थर फेंके। इस पथराव में पांच पुलिसकर्मी हल्के रूप से घायल हो गए। हालांकि उनकी चोटें गंभीर नहीं थीं।
पुलिस ने कैसे संभाली स्थिति
स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इससे भीड़ तितर-बितर हो गई और कार्रवाई आगे बढ़ सकी। पुलिस ने पांच लोगों को हिरासत में लिया जिन्होंने पथराव किया था। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
कानूनी धाराएं लगाई गईं
पथराव करने वाले लोगों के खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इसमें सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों पर हमला करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी धाराएं शामिल हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता की प्रतिक्रिया
सामाजिक कार्यकर्ता प्रीत सिरोही ने इस कार्रवाई को सही बताया। उन्होंने कहा कि यह सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ न्याय है। उनके अनुसार, यह इलाका संवेदनशील है और यहां कानून का राज होना जरूरी है।
पिछली घटनाओं का इतिहास
तुर्कमान गेट इलाका दिल्ली का एक संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। अतीत में यहां कुछ आतंकी घटनाएं भी हो चुकी हैं। इसलिए यहां कानून व्यवस्था बनाए रखना बहुत जरूरी है। अवैध निर्माण से न सिर्फ सार्वजनिक जमीन का नुकसान होता है, बल्कि सुरक्षा के लिए भी यह चिंता का विषय है।
सार्वजनिक जमीन और अवैध कब्जे
दिल्ली में सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जे एक पुरानी समस्या है। कई जगहों पर लोगों ने सरकारी जमीन पर अपने निर्माण कर लिए हैं। ये निर्माण न सिर्फ कानून के खिलाफ हैं, बल्कि शहर की योजना में भी बाधा डालते हैं।
नगर निगम की जिम्मेदारी
दिल्ली नगर निगम की यह जिम्मेदारी है कि वह सार्वजनिक जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त रखे। समय-समय पर ऐसी कार्रवाइयां होती रहती हैं। लेकिन कई बार विरोध के कारण काम रुक जाता है। इस बार कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई पूरी की गई।
जनता का हित
ऐसी कार्रवाइयां जनहित में होती हैं। सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जा करने से आम लोगों को नुकसान होता है। सड़कें और फुटपाथ लोगों के आने-जाने के लिए होते हैं। जब इन पर अवैध निर्माण हो जाता है, तो जनता को परेशानी होती है।
भविष्य की योजना
इस कार्रवाई के बाद नगर निगम ने साफ कर दिया है कि वह सार्वजनिक जमीन पर किसी भी तरह के अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं करेगा। आगे भी ऐसी कार्रवाइयां होती रहेंगी। जो भी जमीन पर अवैध कब्जा करेगा, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
कानून का राज
यह कार्रवाई इस बात का उदाहरण है कि कानून सबके लिए एक समान है। चाहे कोई भी हो, अगर वह सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जा करता है, तो उसे हटाया जाएगा। कोर्ट के आदेश का पालन करना सरकार की जिम्मेदारी है।
स्थानीय लोगों की राय
स्थानीय लोगों में इस कार्रवाई को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोग इसे सही मानते हैं क्योंकि सार्वजनिक जमीन अब साफ हो गई है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि जिन दुकानदारों के ढांचे हटे हैं, उनकी आजीविका पर असर पड़ेगा।
तुर्कमान गेट की यह कार्रवाई दिखाती है कि सरकार सार्वजनिक जमीन को बचाने के लिए गंभीर है। कोर्ट के आदेश के बाद हुई इस कार्रवाई में 38,000 वर्ग फुट अवैध निर्माण हटाया गया। हालांकि कुछ लोगों ने विरोध किया और पथराव भी किया, लेकिन पुलिस ने स्थिति को संभाल लिया। मुख्य मस्जिद को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया। यह कार्रवाई इस बात का संदेश देती है कि कानून का राज सबसे ऊपर है और सार्वजनिक जमीन पर किसी का भी अवैध कब्जा नहीं चलेगा।