नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को लेकर अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने सीधे तौर पर हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर पीएमओ ने दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम कर रही 19 विभिन्न एजेंसियों से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। इस कदम से साफ संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार दिल्ली की गंभीर समस्याओं को लेकर अब पहले से ज्यादा गंभीर है।
दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने 25 नवंबर को सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों को पत्र भेजकर उनसे प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी मांगी है। इन पत्रों में स्पष्ट तौर पर पूछा गया है कि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए क्या-क्या प्रयास किए गए हैं और उनके क्या परिणाम रहे हैं।
पीएम मोदी की प्रतिबद्धता का असर
पिछले दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी जनसभाओं में यह बात साफ कर दी थी कि दिल्ली की हर समस्या पर उनकी नजर रहेगी। उन्होंने कहा था कि भाजपा की सरकार बनने के बाद दिल्ली की हर समस्या के समाधान पर वह व्यक्तिगत रूप से निगरानी रखेंगे। चुनाव में भाजपा की जीत के बाद अब प्रधानमंत्री अपनी इस प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
दिल्ली की जनता ने भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा जताया और उन्हें सत्ता में लाया। अब प्रधानमंत्री कार्यालय राजधानी की सभी प्रमुख समस्याओं पर पैनी नजर रख रहा है। प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या को हल करने के लिए अब सीधे पीएमओ की निगरानी में काम हो रहा है।
टास्क फोर्स का गठन
प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस टास्क फोर्स की 23 अक्टूबर को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें दिल्ली के प्रदूषण को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए गए थे।
इस बैठक में सभी संबंधित विभागों को साफ तौर पर कहा गया कि वे जमीनी स्तर पर ठोस काम करें और उसकी सही जानकारी उपलब्ध कराएं। यह पहल दिल्ली के प्रदूषण नियंत्रण में एक नया मोड़ साबित हो सकती है।
हवा-हवाई जानकारी नहीं चलेगी
सूत्रों के मुताबिक, टास्क फोर्स की बैठक में यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया था कि विभाग केवल कागजी कार्रवाई या हवा-हवाई जानकारी देने से बचें। उन्हें समस्या की असली स्थिति और उसे हल करने के लिए जमीनी स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की सही तस्वीर पेश करनी होगी।
यह भी कहा गया कि अगर किसी समस्या को हल करने में कोई अड़चन आ रही है, तो उसकी सही जानकारी दी जाए ताकि प्रधानमंत्री कार्यालय के स्तर पर उस अड़चन को दूर किया जा सके। यह दृष्टिकोण प्रदूषण नियंत्रण में एक नई उम्मीद जगा रहा है।
विभागों ने शुरू की रिपोर्ट तैयारी
दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा मांगी गई एक्शन टेकन रिपोर्ट को लेकर सभी विभाग और एजेंसियां अपना काम तेजी से कर रही हैं। कुछ विभागों ने अपनी रिपोर्ट पर्यावरण विभाग को पहले ही सौंप दी है। बाकी विभागों की रिपोर्ट भी जल्द ही आने की उम्मीद है।
इन सभी रिपोर्टों को एकत्र करने के बाद पर्यावरण विभाग इन्हें संकलित करके प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजेगा। इससे पीएमओ को दिल्ली के प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों की पूरी तस्वीर मिल सकेगी।
किन एजेंसियों से मांगी गई है रिपोर्ट
प्रधानमंत्री कार्यालय ने कुल 19 विभागों और एजेंसियों से रिपोर्ट मांगी है। इनमें दिल्ली नगर निगम, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, दिल्ली विकास प्राधिकरण, और दिल्ली यातायात पुलिस शामिल हैं।
इसके अलावा राजस्व विभाग, दिल्ली परिवहन विभाग, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली परिवहन निगम, दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम, दिल्ली विकास बोर्ड, एनबीसीसी, और दिल्ली छावनी बोर्ड से भी जानकारी मांगी गई है।
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन, दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं ढांचागत विकास निगम और एनसीआरटीसी भी इस सूची में शामिल हैं। ये सभी एजेंसियां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दिल्ली के प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी हुई हैं।
प्रदूषण नियंत्रण में चुनौतियां
दिल्ली में प्रदूषण एक जटिल समस्या है जिसमें कई कारक शामिल हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण, और पराली जलाने जैसे कारण मिलकर राजधानी की हवा को जहरीला बना देते हैं।
खास तौर पर सर्दियों के मौसम में दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है। इससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है और कई तरह की बीमारियां बढ़ जाती हैं। इसलिए प्रधानमंत्री कार्यालय का यह हस्तक्षेप बेहद जरूरी और समय पर है।
आगे की राह
प्रधानमंत्री कार्यालय की इस पहल से दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों में नई गति आने की उम्मीद है। सभी एजेंसियों से विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद पीएमओ उन कमियों की पहचान कर सकेगा जो प्रदूषण नियंत्रण में बाधा बन रही हैं।
इसके बाद जरूरी कदम उठाकर इन कमियों को दूर किया जा सकेगा। साथ ही जो विभाग अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें और मजबूत बनाया जा सकेगा। यह समन्वित प्रयास दिल्ली की हवा को साफ करने में मददगार साबित हो सकता है।
सभी विभागों और एजेंसियों को अब अपनी जवाबदेही समझनी होगी। प्रधानमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी में काम करने से लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। दिल्ली के लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें साफ हवा में सांस लेने का मौका मिलेगा।