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संसद में हंगामे के बाद प्रधानमंत्री का भाषण रद्द, विपक्ष का जोरदार विरोध

No PM Modi Speech In Lok Sabha Today: संसद में हंगामे के बाद प्रधानमंत्री का भाषण रद्द, विपक्ष ने किया जोरदार विरोध
No PM Modi Speech In Lok Sabha Today: संसद में हंगामे के बाद प्रधानमंत्री का भाषण रद्द, विपक्ष ने किया जोरदार विरोध (Image Source: Sansad TV)

No PM Modi Speech In Lok Sabha Today: लोकसभा में विपक्ष के जोरदार विरोध के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण रद्द हो गया। राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित आत्मकथा पर बोलने से रोका गया। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की टिप्पणी से बढ़ा हंगामा। सदन दो बार स्थगित हुआ। कांग्रेस ने संसद के बाहर प्रदर्शन किया और आठ विपक्षी सांसद निलंबित हुए।

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संसद में हंगामा: प्रधानमंत्री का भाषण क्यों हुआ रद्द

No PM Modi Speech In Lok Sabha Today: नई दिल्ली में आज लोकसभा में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था, लेकिन विपक्ष के जोरदार विरोध के बाद सदन को स्थगित करना पड़ा। यह दिन का दूसरा स्थगन था। पहले भी सदन में हंगामे के कारण कार्यवाही रुकी थी। इस पूरे मामले की शुरुआत कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भाषण से जुड़े विवाद से हुई थी।

राहुल गांधी के भाषण पर क्या है पूरा मामला

राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला देकर सदन में बोलना चाहते थे। उन्होंने इस किताब के कुछ अंशों को अपने भाषण में शामिल करने की योजना बनाई थी। लेकिन इस पर विवाद खड़ा हो गया। सदन के नियमों के अनुसार, किसी सांसद को अप्रकाशित सामग्री का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती। इसी कारण राहुल गांधी को बोलने से रोका गया। विपक्ष ने इसे अपने नेता को चुप कराने की साजिश बताया और जोरदार विरोध शुरू कर दिया।

बीजेपी सांसद की टिप्पणी से बढ़ा तनाव

जब सदन में राहुल गांधी के मुद्दे पर चर्चा चल रही थी, तब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी एक अप्रकाशित किताब के बारे में बोलना चाहते हैं, तो वह गांधी परिवार को बेनकाब करने के लिए कई किताबें लेकर आए हैं। इसके बाद उन्होंने गांधी परिवार के सदस्यों के बारे में विभिन्न किताबों का जिक्र करना शुरू कर दिया। उन्होंने इन किताबों में लिखी बातों को सदन में पढ़कर सुनाने लगे।

सदन के नियम 349 का उल्लंघन

जब निशिकांत दुबे किताबों से पढ़ रहे थे, तो सदन की कुर्सी पर बैठे कृष्ण प्रसाद तेनेती ने उन्हें रोकने की कोशिश की। उन्होंने नियम 349 का हवाला दिया। यह नियम कहता है कि कोई भी सांसद सदन में किसी किताब, अखबार या पत्र से तब तक नहीं पढ़ सकता जब तक कि वह सदन के काम से सीधे जुड़ा न हो। लेकिन निशिकांत दुबे ने इस चेतावनी को नहीं माना और वे किताबों से पढ़ते रहे। इस पर विपक्षी सदस्यों ने जोरदार विरोध किया। पूरा सदन शोर-शराबे से गूंज उठा।

दिन में दूसरी बार स्थगित हुआ सदन

विरोध इतना तेज हो गया कि सदन में कोई कार्यवाही नहीं हो पाई। आखिरकार सदन को फिर से स्थगित करना पड़ा। यह दिन का दूसरा स्थगन था। इससे पहले दोपहर 2 बजे तक के लिए सदन को स्थगित किया गया था। पहला स्थगन भी राहुल गांधी के भाषण और नरवणे की आत्मकथा से जुड़े विवाद के कारण हुआ था। विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे।

संसद भवन के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन

सदन के स्थगन के बाद कांग्रेस के सांसदों ने संसद भवन के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने का मौका दिया जाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनके नेता को जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन कर रही है। प्रदर्शनकारी सांसदों ने नारे लगाए और अपनी मांगों को लेकर संसद भवन के बाहर धरना दिया।

राहुल गांधी ने स्पीकर को लिखा पत्र

राहुल गांधी ने कल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भी लिखा था। इस पत्र में उन्होंने अपनी चिंता जताई थी कि उन्हें बोलने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के खिलाफ है। राहुल गांधी ने अपने पत्र में स्पीकर से अनुरोध किया कि उन्हें सदन में अपनी बात रखने का मौका दिया जाए। लेकिन इसके बावजूद आज भी सदन में हंगामा जारी रहा।

आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन

इस पूरे विवाद के बीच आठ विपक्षी सांसदों को शीतकालीन सत्र के बाकी दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया। यह निलंबन कल किया गया था। विपक्ष ने इसे भी सरकार की तानाशाही बताया है। निलंबित सांसदों में विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्य शामिल हैं। इस कदम से विपक्ष में और गुस्सा बढ़ गया है। वे कह रहे हैं कि सरकार उन्हें चुप कराने के लिए हर हथकंडा अपना रही है।

विपक्ष और सरकार में बढ़ती खाई

No PM Modi Speech In Lok Sabha Today: यह घटना संसद में विपक्ष और सरकार के बीच बढ़ते तनाव को दिखाती है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा, जबकि सरकार का कहना है कि विपक्ष नियमों का उल्लंघन कर रहा है। इस टकराव के कारण संसद का काम प्रभावित हो रहा है। महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही है। जनता के सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं।

लोकतंत्र पर सवाल

इस पूरी घटना ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। संसद देश का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मंच है, जहां हर मुद्दे पर खुलकर बहस होनी चाहिए। लेकिन बार-बार के स्थगन और हंगामे से संसद की गरिमा प्रभावित होती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सभी दलों को मिलकर एक रास्ता निकालना चाहिए। संसद में स्वस्थ बहस होनी चाहिए, न कि नारेबाजी और हंगामा।

यह घटना दिखाती है कि भारतीय राजनीति में असहमति को कैसे संभाला जा रहा है। विपक्ष की आवाज सुनना लोकतंत्र का अहम हिस्सा है। साथ ही, सदन के नियमों का पालन भी जरूरी है। दोनों पक्षों को संवाद और समझौते के रास्ते खोजने होंगे। तभी संसद जनता की उम्मीदों पर खरी उतर सकेगी।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।