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झारखंड के जमशेदपुर में बनने जा रहा भव्य जगन्नाथ मंदिर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 26 फरवरी को रखेंगी आधारशिला

झारखंड के जमशेदपुर में बनने जा रहा भव्य जगन्नाथ मंदिर
झारखंड के जमशेदपुर में बनने जा रहा भव्य जगन्नाथ मंदिर (Credit- Sharp Bharat)

जमशेदपुर में 26 फरवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू श्री जगन्नाथ मंदिर और आध्यात्मिक केंद्र की आधारशिला रखेंगी। 2.5 एकड़ में बनने वाला यह पत्थर का भव्य मंदिर शोध, संस्कृति और आध्यात्मिक अध्ययन का केंद्र बनेगा।

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Jagannath Temple Jamshedpur: झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर के लिए 26 फरवरी का दिन खास होने जा रहा है। इस दिन देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शहर में प्रस्तावित श्री जगन्नाथ मंदिर और आध्यात्मिक केंद्र की आधारशिला रखेंगी। इस अवसर पर विधिवत भूमि पूजन भी किया जाएगा, जिससे इस बहुप्रतीक्षित परियोजना की औपचारिक शुरुआत मानी जाएगी।

यह परियोजना सिर्फ एक धार्मिक संरचना भर नहीं है, बल्कि इसे आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक चेतना के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धर्मार्थ केंद्र न्यास के प्रबंध न्यासी एस.के. बेहरा के अनुसार, यह केंद्र आने वाले वर्षों में जमशेदपुर की पहचान को एक नई दिशा देगा।

भूमि पूजन से शुरू होगा एक बड़े सपने का सफर

एस.के. बेहरा ने बताया कि राष्ट्रपति के हाथों आधारशिला रखा जाना न्यास (ट्केरस्ट) लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। भूमि पूजन के साथ ही निर्माण कार्य को औपचारिक रूप से गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि अंतिम मंदिर संरचना को पूरी तरह आकार लेने में लगभग चार वर्ष का समय लग सकता है, लेकिन न्यास की प्राथमिकता आध्यात्मिक केंद्र को पहले शुरू करने की है, ताकि वहां अध्ययन, शोध और सांस्कृतिक गतिविधियां जल्द शुरू हो सकें।

सिर्फ मंदिर नहीं, विचार और शोध का केंद्र

इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसे केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रखा गया है। प्रस्तावित आध्यात्मिक केंद्र को शोधार्थियों, छात्रों और विद्वानों के लिए एक खुले मंच के रूप में विकसित किया जाएगा।

यहां आध्यात्मिक विज्ञान, भारतीय दर्शन, सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों पर अध्ययन और शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। न्यास का मानना है कि आज के समय में युवाओं को तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ नैतिक और वैचारिक दिशा देना भी उतना ही जरूरी है।

2.5 एकड़ में बनेगा पत्थर का भव्य मंदिर

मंदिर का निर्माण करीब 2.5 एकड़ क्षेत्र में किया जाएगा। यह पूरी तरह पत्थर से निर्मित होगा, जिससे इसकी भव्यता और टिकाऊपन दोनों सुनिश्चित हो सकें। मंदिर की वास्तुकला में पारंपरिक शिल्प और उत्कृष्ट कारीगरी की झलक देखने को मिलेगी।

गर्भगृह, मंडप और अन्य संरचनाओं को भारतीय मंदिर वास्तुकला के अनुरूप डिजाइन किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव मिल सके।

निर्माण कार्य को लेकर न्यास की स्पष्ट योजना

न्यास का कहना है कि निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। मंदिर और आध्यात्मिक केंद्र के कुछ हिस्सों को समय से पहले तैयार कर संचालन शुरू करने की योजना है। इसके लिए विशेषज्ञ वास्तुकारों और कारीगरों की मदद ली जा रही है।

एस.के. बेहरा के अनुसार, गुणवत्ता और परंपरा से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

राज्यपाल काल से जुड़ा है परियोजना का इतिहास

इस परियोजना का संबंध राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के झारखंड राज्यपाल काल से भी जुड़ा है। एस.के. बेहरा ने बताया कि जब वह राज्यपाल थीं, उसी समय इस परियोजना के लिए भूमि का मूल आवंटन हुआ था।

अब राष्ट्रपति के रूप में उनके हाथों आधारशिला रखा जाना इस परियोजना को नई ऊर्जा और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाला कदम माना जा रहा है।

जमशेदपुर के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर असर

इस मंदिर और आध्यात्मिक केंद्र के निर्माण से जमशेदपुर के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी बदलाव आने की उम्मीद है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

साथ ही, यह केंद्र शहर के युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर देगा।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।