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ओला के संस्थापक भाविश अग्रवाल पर आत्महत्या हेतु उकसाने का आरोप, एफआईआर दर्ज; शेयर में 4 प्रतिशत की गिरावट

ओला के संस्थापक भाविश अग्रवाल पर आत्महत्या हेतु उकसाने का आरोप, एफआईआर दर्ज; शेयर में 4 प्रतिशत की गिरावट
Ola Share Price – भाविश अग्रवाल पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप, शेयर में गिरावट (File Photo)
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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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ओला संस्थापक और वरिष्ठ अधिकारी पर मामला दर्ज

नई दिल्ली। भारतीय राइड-हेल्पिंग कंपनी ओला के संस्थापक और सीईओ भाविश अग्रवाल एक गंभीर कानूनी मामले में फंस गए हैं। बेंगलुरु पुलिस ने अग्रवाल और ओला के वरिष्ठ अधिकारी सुब्रत कुमार दास के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। यह घटना तब सामने आई जब कंपनी के एक कर्मचारी अरविंद ने कथित रूप से आत्महत्या की।

पुलिस के अनुसार, अरविंद ने अपने 28 पृष्ठों के नोट में कार्यस्थल पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। मृतक के परिवार ने इसके अलावा कंपनी में वित्तीय गड़बड़ियों का भी हवाला दिया।

एफआईआर में दर्ज नाम और धाराएँ

एफआईआर में भाविश अग्रवाल, सुब्रत कुमार दास, और हेड, व्हीकल होमोलोगेशन्स एंड रेगुलेशन सहित अन्य अधिकारियों के नाम दर्ज किए गए हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत यह केस दर्ज हुआ। शिकायतकर्ता अरविंद के भाई अश्विन कन्नन हैं, जिन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को रिपोर्ट किया।

क्या लगाए गए हैं आरोप

कंप्लेंट के अनुसार, कंपनी ने अरविंद की सैलरी और इंटेंसिव पेमेंट रोक दी थी। यह घटना 28 सितंबर को हुई, जब अरविंद ने कथित तौर पर अपने घर पर जहर लेकर जीवन समाप्त कर लिया। उन्हें तुरंत एक प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

अरविंद ने अपने नोट में स्पष्ट रूप से लिखा कि एचआर विभाग ने उनके बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने में शिथिलता बरती और कार्यस्थल पर लगातार उत्पीड़न किया गया।

परिवार की शिकायत और वित्तीय गड़बड़ी का आरोप

परिवार ने बताया कि अरविंद ने अपने डेथ नोट में न केवल मानसिक तनाव बल्कि 17.46 लाख रुपये की फाइनेंशियल गड़बड़ी का भी जिक्र किया। यह रकम कथित रूप से उनके सैलरी और इंटेंसिव पेमेंट में अनियमितताओं से संबंधित है।

कार्यस्थल उत्पीड़न का मामला

अरविंद के नोट में कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा वर्कप्लेस हैरेसमेंट का आरोप लगाया गया। उन्होंने उल्लेख किया कि HR विभाग उनके सवालों का स्पष्ट उत्तर नहीं दे रहा था और लगातार उन्हें मानसिक तनाव में रखा गया।

शेयर बाजार पर प्रभाव

इस मामले के प्रकाश में आने के तुरंत बाद सोमवार को ओला के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। बीएसई पर कंपनी का शेयर लगभग 4 प्रतिशत गिरकर 54.98 रुपये पर आ गया। विशेषज्ञों के अनुसार इस गिरावट का सीधा असर कंपनी की छवि और निवेशकों के भरोसे पर पड़ा है।

कानूनी प्रक्रिया और आगे की जांच

पुलिस ने मामला दर्ज कर अग्रवाल और सुब्रत कुमार दास सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन पूरी तरह हो।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस मामले का कंपनी की वित्तीय स्थिति, शेयर मूल्य और कर्मचारियों की मानसिक सुरक्षा पर लंबी अवधि में प्रभाव पड़ सकता है।

ओला जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में इस प्रकार के मामले का सामने आना न केवल कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है बल्कि निवेशकों और समाज के लिए भी चेतावनी है। आत्महत्या के आरोप और कार्यस्थल उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर कंपनियों को त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई करनी आवश्यक है।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।