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मंगलुरु पुलिस ने किया अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी का भंडाफोड़, 11 गिरफ्तार

मंगलुरु पुलिस ने किया अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी का भंडाफोड़, 11 गिरफ्तार
Mangaluru Cyber Fraud: नेपाल से चल रहे करोड़ों के निवेश घोटाले का भंडाफोड़, 11 गिरफ्तार (File Photo)

Mangaluru Cyber Fraud: मंगलुरु सिटी पुलिस ने नेपाल से संचालित अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया। 11 भारतीय गिरफ्तार, 16 भारतीय और कई चीनी नागरिक शामिल। 624 बैंक खाते, 4580 शिकायतें मिलीं। एक खाते में 167 करोड़ का लेनदेन। सोशल मीडिया पर निवेश का झांसा देकर रोजाना 60 लाख से 1 करोड़ की ठगी।

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Asfi Shadab
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अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी का बड़ा खुलासा

Mangaluru Cyber Fraud: कर्नाटक के मंगलुरु शहर में पुलिस ने एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मंगलुरु सिटी साइबर, इकोनॉमिक और नारकोटिक्स (CEN) क्राइम पुलिस ने 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो नेपाल से संचालित एक बड़े निवेश धोखाधड़ी रैकेट का हिस्सा थे। यह गिरोह भारतीय नागरिकों को निशाना बनाकर सैकड़ों करोड़ रुपये की ठगी कर रहा था।

पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा है, जिसमें 16 भारतीय और कई चीनी नागरिक शामिल हैं। मंगलुरु पुलिस ने 11 भारतीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि नेपाल पुलिस ने इस गिरोह में शामिल चीनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पांच भारतीय आरोपी फरार हैं और पुलिस उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रही है।

जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों से जब्त किए गए मोबाइल फोन और लैपटॉप की जांच की। इस जांच में 624 बैंक खातों की जानकारी मिली। ये खाते देश भर में NCRP पोर्टल पर दर्ज 4,580 से अधिक शिकायतों से जुड़े हुए हैं। सिर्फ एक बैंक खाते में 167 करोड़ रुपये के लेनदेन की पहचान की गई है। वर्तमान मामले में CEN पुलिस स्टेशन में दर्ज केस में लगभग 30.70 करोड़ रुपये धोखेबाजों द्वारा इस्तेमाल किए गए 10 बैंक खातों के माध्यम से ट्रांसफर किए गए थे। बाकी 623 बैंक खातों की जानकारी अभी भी इकट्ठा की जा रही है।

मंगलुरु CEN पुलिस स्टेशन में आईटी एक्ट की धारा 66(सी) और 66(डी) तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 308(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता को 10 अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करके 1.38 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। तकनीकी विश्लेषण और जांच से पुष्टि हुई कि धोखाधड़ी नेपाल से संचालित होते हुए आरोपियों द्वारा की गई थी, जिसके बाद गिरोह को गिरफ्तार किया गया।

गिरोह की कार्यप्रणाली

पुलिस ने बताया कि धोखेबाजों का एक समूह नेपाल से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से बैंक खाताधारकों और एजेंटों को भर्ती करके काम कर रहा था। वे ठगी से कमाए गए पैसे को कई खातों के माध्यम से ट्रांसफर करते थे, फिर उसे USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेज देते थे। दूसरा समूह कंबोडिया और अन्य देशों से काम कर रहा था, जो सोशल मीडिया के माध्यम से निवेशकों से संपर्क करता था और उन्हें ज्यादा रिटर्न का लालच देता था। विदेश में रहने वाले भारतीयों का इस्तेमाल पीड़ितों से स्थानीय भाषाओं में बात करने के लिए किया जाता था। नेपाल स्थित टीम पूरे पैसे के प्रवाह को नियंत्रित करती थी।

इस विशेष मामले में इस्तेमाल किए गए 10 बैंक खातों में लगभग 128 शिकायतें और 36 FIR देश भर में NCRP पोर्टल पर दर्ज हैं।

कैसे जुटाए जाते हैं बैंक खाते

पुलिस ने यह भी बताया कि धोखेबाज किस तरह बैंक खाते जुटाते हैं। नकली कंपनी के नाम का इस्तेमाल करते हुए वे इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर कॉर्पोरेट और करंट खाते, USDT से INR एक्सचेंज ऑपरेटर, मैनेजमेंट ऑपरेटर और OTP वर्कर की तलाश का विज्ञापन देते हैं। पीड़ितों को 5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन के साथ फ्लाइट टिकट, कैब बुकिंग और रहने की सुविधा का वादा किया जाता है। उन्हें दुबई और नेपाल जैसे देशों में लुभाया जाता है, जहां उनके सिम कार्ड का इस्तेमाल धोखेबाजों के फोन में नेट बैंकिंग चलाने और खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। फिर पैसे को USDT में बदलकर रोजाना विदेशी संचालकों को भेज दिया जाता है।

निवेशकों को फंसाने का तरीका

पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी कंबोडिया और दुबई से भारतीय नागरिकों से अनजान व्हाट्सएप नंबर और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क करते हैं। शुरुआत में विश्वास जीतने के लिए नकली ऐप्स का इस्तेमाल करके ज्यादा रिटर्न दिखाया जाता है। बाद में पीड़ितों को मुनाफा निकालने के लिए ज्यादा रकम निवेश करने के लिए राजी किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें भारी नुकसान होता है। अनुमान है कि यह गिरोह निवेश धोखाधड़ी के माध्यम से रोजाना 60 लाख से 1 करोड़ रुपये तक भारतीयों को ठग रहा है।

डिजिटल गुलामी की चेतावनी

पुलिस ने डिजिटल गुलामी को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने बताया कि युवा नौकरी तलाशने वालों को नकली नौकरी के विज्ञापन और एजेंटों के माध्यम से टूरिस्ट वीजा पर विदेश लुभाया जाता है। उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं, उन्हें बंद कर दिया जाता है और अपनी मातृभाषा में मासूम निवेशकों को धोखा देने के लिए मजबूर किया जाता है। अकेले दक्षिण कन्नड़ जिले में ऐसे छह पीड़ितों को बचाया जा चुका है और उनकी शिकायतों के आधार पर मामले दर्ज किए गए हैं।

खाताधारकों के लिए कड़ी चेतावनी

पुलिस ने चेतावनी दी है कि जो लोग कमीशन के लिए अपने बैंक खाते देते हैं, उन्हें भी आरोपी माना जाएगा और मुख्य संचालकों से पहले गिरफ्तार किया जाएगा, जो अक्सर विदेश से घोटाले का संचालन करते हैं।

जांच के हिस्से के रूप में लैपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कई डेबिट और क्रेडिट कार्ड सहित जब्त की गई वस्तुओं का विवरण दर्ज किया गया है।

पुलिस का बड़ा अभियान

Mangaluru Cyber Fraud: यह मामला देश में बढ़ते साइबर अपराधों का एक बड़ा उदाहरण है। मंगलुरु पुलिस की इस कार्रवाई से न केवल एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, बल्कि साइबर अपराध से निपटने में भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पुलिस अब बाकी फरार आरोपियों को पकड़ने और बाकी बैंक खातों की पूरी जानकारी जुटाने में जुटी हुई है।

नागरिकों के लिए सतर्कता जरूरी

इस मामले से यह साफ हो गया है कि साइबर धोखाधड़ी का जाल कितना बड़ा और संगठित है। लोगों को सोशल मीडिया पर आने वाले अनजान संदेशों और निवेश के बड़े वादों से सावधान रहना चाहिए। किसी भी तरह के संदिग्ध निवेश प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले पूरी जांच करनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति ऐसी धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए।

यह मामला यह भी दिखाता है कि साइबर अपराधी किस तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करते हैं और विभिन्न देशों से अपने अपराध को अंजाम देते हैं। इसलिए इस तरह के अपराधों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है। मंगलुरु पुलिस और नेपाल पुलिस के बीच हुए समन्वय ने इस मामले को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है।

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।