महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसे नेता का चले जाना किसी भी प्रदेश के लिए बहुत बड़ा नुकसान होता है जो अपने अनुभव, दूरदर्शिता और जनता के प्रति समर्पण के लिए जाना जाता हो। अजित पवार का असामयिक निधन महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसी रिक्तता छोड़ गया है जिसे भरना लगभग असंभव है। विधान परिषद के सदस्य डॉ. परिणय फुके ने अजितदादा को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें युवा विधायकों का मार्गदर्शक बताया है।
महाराष्ट्र की मिट्टी को समझने वाले जननेता
अजित पवार महाराष्ट्र की मिट्टी के कण-कण को जानते थे। प्रदेश की जनता की समस्याओं की गहरी और सटीक समझ रखने वाले इस जननेता ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में आम लोगों की सेवा को सर्वोपरि रखा। उनकी यह खासियत थी कि वे हर वर्ग के लोगों से जुड़े रहते थे। किसान हो या मजदूर, व्यापारी हो या युवा, सभी के लिए उनका दरवाजा हमेशा खुला रहता था।
डॉ. फुके ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा कि अजितदादा ने युवा विधायकों के लिए हमेशा एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। विधानमंडल में उनकी उपस्थिति युवा नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत थी। उनकी सलाह और मार्गदर्शन से कई युवा राजनेताओं ने राजनीति की बारीकियां सीखीं।
प्रशासन पर मजबूत पकड़
अजित पवार की एक बड़ी खूबी यह थी कि उन्हें प्रशासन की गहरी समझ थी। सरकारी तंत्र कैसे काम करता है, किस विभाग को किस तरह से निर्देश देने चाहिए, जनता की समस्याओं का तुरंत समाधान कैसे निकाला जाए—इन सभी मामलों में वे माहिर थे। उनकी इस क्षमता के कारण ही महाराष्ट्र में कई विकास योजनाएं सफलतापूर्वक लागू हो सकीं।
डॉ. फुके ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब भी परिषद में विधायक के रूप में जनता के सवालों या विकास कार्यों के लिए निधि की जरूरत पड़ी, तब-तब वे अजितदादा से मिले। उन्होंने जनकल्याण के लिए कभी भी निधि देने में संकोच नहीं किया। यह उनकी जनता के प्रति प्रतिबद्धता को साफ तौर पर दिखाता है।
कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन देने वाले नेता
राजनीति में कार्यकर्ता किसी भी दल की रीढ़ होते हैं। अजित पवार इस बात को अच्छी तरह समझते थे। वे अपने कार्यकर्ताओं को निरंतर प्रोत्साहन देते थे। चाहे छोटा कार्यकर्ता हो या बड़ा नेता, सभी के लिए उनका व्यवहार समान था। उनकी इस सादगी और सहजता ने हजारों लोगों का दिल जीता।
कार्यकर्ताओं के बीच उनकी लोकप्रियता इसलिए भी थी क्योंकि वे हमेशा मैदान में रहते थे। जनता के बीच जाना, उनकी समस्याएं सुनना और समाधान निकालना—यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। इसी कारण वे सिर्फ एक राजनेता नहीं बल्कि जननेता कहलाए।

विनोदी स्वभाव से वातावरण को हल्का करने की कला
अजितदादा की एक और खासियत थी उनका विनोदी स्वभाव। गंभीर से गंभीर बैठक में भी वे अपनी हाजिरजवाबी और हास्य से माहौल को हल्का-फुल्का कर देते थे। यह उनकी व्यक्तित्व की अनूठी पहचान थी। राजनीति के तनावपूर्ण माहौल में उनका यह गुण सभी को राहत देता था।
डॉ. फुके ने कहा कि अजितदादा अब हमारे बीच नहीं हैं—इस बात पर आज भी विश्वास नहीं होता। उनकी मुस्कान, उनका हंसना-हंसाना और उनका साथ—यह सब अब सिर्फ यादों में रह गया है।
महाराष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति
अजित पवार जैसे सशक्त, अनुभवी और दूरदर्शी नेता का असामयिक चले जाना महाराष्ट्र के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। इतने वर्षों के अनुभव से परिपक्व नेतृत्व को खोना किसी भी राज्य के लिए दुखद होता है। उनके जाने से महाराष्ट्र में एक ऐसी रिक्तता उत्पन्न हुई है जिसकी भरपाई शायद कभी संभव नहीं होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार की अनुपस्थिति महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत कर सकती है। उनके जैसा संतुलित और अनुभवी नेतृत्व मिलना मुश्किल होगा।
युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत
अजितदादा का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपने कठिन परिश्रम, ईमानदारी और लगन से राजनीति में वह मुकाम हासिल किया जो बहुत कम लोग कर पाते हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि सच्ची सेवा और समर्पण से ही असली सफलता मिलती है।
डॉ. फुके जैसे युवा विधायकों के लिए अजितदादा हमेशा एक आदर्श रहे। उनके मार्गदर्शन में कई युवा नेताओं ने राजनीति की बारीकियां सीखीं और जनसेवा का असली मतलब समझा।
विरासत जो हमेशा जीवित रहेगी
अजित पवार का कार्य और योगदान आने वाले अनेक वर्षों तक महाराष्ट्र की स्मृति में जीवित रहेगा। उन्होंने जो विकास कार्य किए, जो योजनाएं लागू कीं, जिन लोगों की मदद की—वह सब उनकी विरासत है। यह विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।
महाराष्ट्र के लिए यह सचमुच एक काला दिन है। एक ऐसे नेता को खोना जो प्रदेश की धड़कन था, बहुत बड़ा सदमा है। पूरा महाराष्ट्र इस समय शोक में डूबा हुआ है।
श्रद्धांजलि और संवेदना
डॉ. परिणय फुके ने अजितदादा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे उनके परिवार के दुख में शामिल हैं। इस कठिन घड़ी में पूरा महाराष्ट्र उनके परिवार के साथ खड़ा है। अजितदादा की आत्मा को शांति मिले और उनका परिवार इस दुख को सहने की शक्ति पाए—यही प्रार्थना है।
अजित पवार का जाना महाराष्ट्र की राजनीति में एक युग का अंत है। लेकिन उनके विचार, उनके आदर्श और उनकी सेवा भावना हमेशा जीवित रहेगी। वे शारीरिक रूप से भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और उनका काम हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।