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हिंगोली शहर में घातक चीनी मांजे से एक घायल

हिंगोली शहर में घातक चीनी मांजे से एक घायल
Chinese Manja Accident Hingoli: हिंगोली में चीनी मांजे से एक व्यक्ति घायल, प्रशासनिक लापरवाही उजागर

हिंगोली में मकर संक्रांति पर प्रतिबंधित चीनी मांजे से एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। खटकाली बाईपास निवासी प्रवीण शिखरे जिला न्यायालय मार्ग से गुजरते समय नायलॉन मांजे की चपेट में आए। सर्वोच्च न्यायालय के प्रतिबंध के बावजूद शहर में खुलेआम चीनी मांजे की बिक्री हुई। यह घटना पुलिस और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है।

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Asfi Shadab
Asfi Shadab
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हिंगोली शहर में मकर संक्रांति के पावन पर्व पर एक बार फिर प्रतिबंधित चीनी मांजे ने अपना खतरनाक रूप दिखाया। 15 जनवरी को शहर में पतंगबाजी के दौरान एक युवक घातक नायलॉन मांजे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना प्रशासन और पुलिस की लापरवाही को साफ तौर पर उजागर करती है।

देश भर में चीनी मांजे को मानव जीवन के लिए घातक मानते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा रखा है। लेकिन हिंगोली शहर में पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता का फायदा उठाकर दुकानदार खुलेआम इसकी बिक्री करते रहे। इसका दुखद परिणाम सामने आया जब खटकाली बाईपास निवासी प्रवीण शिखरे जिला न्यायालय मार्ग पर जिला परिषद की पानी की टंकी के पास से गुजर रहे थे, तभी अचानक नायलॉन मांजा उनके शरीर से टकराया और वे बुरी तरह जख्मी हो गए।

मकर संक्रांति का उत्साह और लापरवाही

मकर संक्रांति के दिन सुबह से ही पूरे शहर में पतंगबाजी का माहौल था। हर गली, हर मोहल्ले की छतों पर रंग-बिरंगी पतंगें आसमान में लहरा रही थीं। डीजे की तेज आवाज के बीच युवाओं का जोश चरम पर था। लोग पतंग काटने की होड़ में एक दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन इस उत्साह में कई लोग यह भूल गए कि वे जिस मांजे का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह किसी की जान भी ले सकता है।

पतंगबाजों ने बड़े पैमाने पर नायलॉन मांजे का उपयोग किया। यह मांजा सामान्य सूती धागे से बिलकुल अलग होता है। इसे कांच के बारीक टुकड़ों और रसायनों से तैयार किया जाता है, जो इसे बेहद तेज और मजबूत बना देता है। यह मांजा इतना खतरनाक होता है कि यह चलती गाड़ी में बैठे व्यक्ति की गर्दन तक काट सकता है।

चीनी मांजे की बिक्री पर सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब देश भर में चीनी मांजे पर पाबंदी है, तो फिर हिंगोली शहर में इसकी बिक्री कैसे हो रही थी। हर साल मकर संक्रांति से पहले प्रशासन और पुलिस दुकानदारों को चेतावनी देते हैं। कुछ छापेमारी भी की जाती है। लेकिन यह सब केवल दिखावा साबित होता है।

स्थानीय दुकानदार चोरी-छिपे चीनी मांजे की बिक्री करते रहते हैं। खरीदार भी सस्ते और मजबूत मांजे के लालच में इसे खरीद लेते हैं। उन्हें यह नहीं लगता कि यह मांजा किसी की जान ले सकता है या किसी को गंभीर चोट पहुंचा सकता है।

हिंगोली नगर पालिका और पुलिस प्रशासन ने इस बार भी चीनी मांजा बेचने और इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। कुछ जगहों पर छापे भी मारे गए। लेकिन यह प्रयास पूरी तरह नाकाम साबित हुए। दुकानों से लेकर फुटपाथ तक पर चीनी मांजे की खुली बिक्री होती रही।

नायलॉन मांजे से होने वाले खतरे

नायलॉन मांजा एक बेहद खतरनाक चीज है। यह इतना मजबूत होता है कि सामान्य हाथों से आसानी से नहीं टूटता। जब पतंग कटती है तो पतंगबाज अपना मांजा बचाने के लिए तेजी से उसे खींचने लगता है। इस दौरान यह मांजा रास्ते से गुजर रहे लोगों के लिए जानलेवा साबित होता है।

अगर यह मांजा किसी के गले से टकरा जाए तो गहरी चोट लग सकती है। कई मामलों में तो लोगों की गर्दन कट जाने से मौत भी हो चुकी है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह और भी खतरनाक है। तेज रफ्तार में जाते समय अगर गले में यह मांजा फंस जाए तो गंभीर हादसा हो सकता है।

पतंग लूटने वाले बच्चे और युवा भी इस मांजे की चपेट में आते हैं। जब वे कटी हुई पतंग को पकड़ने के लिए मांजा खींचते हैं तो उनके हाथों में गहरी कटने लगती है। कई बार तो हाथ की उंगलियां तक कट जाती हैं।

देशभर में हजारों दुर्घटनाएं

देश के विभिन्न हिस्सों में चीनी मांजे से हर साल हजारों दुर्घटनाएं होती हैं। कई लोगों की जान चली जाती है तो कई गंभीर रूप से घायल होते हैं। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने चीनी मांजे के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था।

लेकिन जमीनी स्तर पर इस आदेश का पालन नहीं हो रहा है। छोटे शहरों और कस्बों में तो स्थिति और भी खराब है। वहां प्रशासन की ओर से कोई गंभीर कार्रवाई नहीं की जाती। नतीजा यह होता है कि हर साल त्योहारों के समय ऐसी दुर्घटनाएं होती रहती हैं।

प्रशासनिक लापरवाही का सवाल

हिंगोली में हुई यह घटना प्रशासनिक लापरवाही का साफ उदाहरण है। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई की गई होती तो यह दुर्घटना टल सकती थी। पुलिस और नगर पालिका को चाहिए था कि वे त्योहार से पहले ही चीनी मांजे की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा देते।

लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कुछ दिखावटी कार्रवाइयां की गईं और फिर सब कुछ सामान्य हो गया। दुकानदारों ने खुलेआम चीनी मांजे की बिक्री जारी रखी। पतंगबाजों ने भी सभी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया।

अब सवाल यह है कि इस घटना के बाद क्या कार्रवाई होगी। क्या दोषी दुकानदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे या फिर यह मामला भी दबा दिया जाएगा। अगर इस बार भी गंभीरता नहीं दिखाई गई तो अगले साल फिर ऐसी ही घटनाएं होंगी।

जनता में जागरूकता की जरूरत

प्रशासन की जिम्मेदारी के साथ-साथ जनता को भी जागरूक होने की जरूरत है। लोगों को समझना चाहिए कि चीनी मांजा केवल उनके लिए ही नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए खतरनाक है। थोड़े से मनोरंजन के लिए किसी की जान खतरे में डालना कहां तक उचित है।

पतंग उड़ाना हमारी परंपरा का हिस्सा है। लेकिन इसके लिए सुरक्षित सूती धागे का इस्तेमाल करना चाहिए। चीनी मांजे का विकल्प मौजूद है। बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले सूती मांजे उपलब्ध हैं जो पर्यावरण और मनुष्यों दोनों के लिए सुरक्षित हैं।

हिंगोली में हुई यह घटना एक चेतावनी है। यह बताती है कि प्रतिबंध लगाना ही काफी नहीं है, उसे सख्ती से लागू करना भी जरूरी है। प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। साथ ही लोगों को जागरूक करना होगा कि वे चीनी मांजे का इस्तेमाल न करें।

अगर इन सभी स्तरों पर गंभीरता दिखाई जाए तो ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। त्योहार खुशियां मनाने के लिए होते हैं, किसी के दुख का कारण बनने के लिए नहीं। आइए, मिलकर संकल्प लें कि हम सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से त्योहार मनाएंगे।

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Asfi Shadab

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।