लातूर में आयोजित एक रैली के दौरान ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर अपने विवादित बयान से सुर्खियां बटोर ली हैं। महाराष्ट्र के लातूर नगर निगम चुनाव को लेकर आयोजित इस जनसभा में उन्होंने न केवल चुनावी राजनीति पर तीखी टिप्पणी की, बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सीधा हमला बोला।
चुनाव में पैसे बांटने को लेकर विवादित बयान
ओवैसी ने अपने संबोधन में कहा कि जब भी उनकी पार्टी चुनाव मैदान में उतरती है, तो विरोधी राजनीतिक दल मतदाताओं के बीच पैसा बांटना शुरू कर देते हैं। उन्होंने कहा कि अगर एआईएमआईएम ने उम्मीदवार नहीं उतारे होते, तो शायद यह पैसा बांटा ही नहीं जाता। उन्होंने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि अगर कोई राजनीतिक दल पैसा बांट रहा है तो उसे ले लेना चाहिए, लेकिन अगर किसी को यह पैसा अनैतिक और हराम लगता है, तो उसका इस्तेमाल शौचालय बनाने में करना चाहिए।
यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दलों ने इस बयान को लेकर ओवैसी की आलोचना शुरू कर दी है, जबकि उनके समर्थकों का कहना है कि यह चुनावी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।
दलितों और मुसलमानों के हालात पर चिंता
एआईएमआईएम प्रमुख ने अपने भाषण में दलितों और मुसलमानों की स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा होने के बावजूद इन दोनों समुदायों तक विकास की रोशनी अभी तक नहीं पहुंची है। ओवैसी ने कहा कि हर समुदाय के पास राजनीतिक शक्ति है, लेकिन अफसोस की बात है कि अल्पसंख्यकों के पास मजबूत राजनीतिक नेतृत्व का अभाव है।
उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे अपनी राजनीतिक ताकत को पहचानें और मजबूत नेतृत्व खड़ा करें। उनका कहना था कि केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से ही समुदाय के हितों की रक्षा संभव है।
भाजपा की नीतियों पर हमला
ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी की नीतियों पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा राष्ट्रवाद की बात करती है, लेकिन देश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं, युवाओं के पास रोजगार नहीं है, और पार्टी केवल लव जिहाद जैसे मुद्दों को उछालकर लोगों का ध्यान भटकाने का काम करती है।
हैदराबाद के सांसद ने कहा कि वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति की जा रही है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि रोजगार, किसानों की समस्याएं और आम लोगों की बुनियादी जरूरतों को लेकर क्या किया जा रहा है।
पीएम मोदी और ट्रंप के रिश्ते पर सवाल
ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच के संबंधों पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ट्रंप के उन बयानों पर चुप हैं, जिनमें उन्होंने कहा था कि मोदी उन्हें खुश करने के लिए निर्णय लेते हैं। ओवैसी ने कहा कि यह देश की विदेश नीति के लिए शर्मनाक स्थिति है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत की विदेश नीति स्वतंत्र है या किसी अन्य देश के दबाव में काम कर रही है। यह बयान विदेश नीति को लेकर चल रही बहस में एक नया आयाम जोड़ता है।
माझी लाडकी बहिन योजना पर सवाल
महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी माझी लाडकी बहिन योजना को लेकर भी ओवैसी ने सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि इस योजना के लाभार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है। उन्होंने पूछा कि सरकार ने 9.30 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया है, और इस कर्ज को चुकाने की जिम्मेदारी किसकी होगी।
ओवैसी ने कहा कि सरकारी योजनाओं के नाम पर जनता को बेवकूफ बनाया जा रहा है, जबकि असल में इन योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच रहा है।
अजित पवार पर तंज
उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर भी ओवैसी ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने चाचा और राजनीतिक गुरु शरद पवार के प्रति वफादार नहीं रह सका, वह जनता के प्रति कैसे वफादार हो सकता है। यह टिप्पणी महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे पवार परिवार के आंतरिक विवाद की ओर इशारा करती है।
वक्फ संशोधन अधिनियम की आलोचना
ओवैसी ने वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर भी अपनी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून का दुरुपयोग मस्जिदों को बंद करने और सदियों पुरानी दरगाहों के स्वामित्व को चुनौती देने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना था कि यह कानून मुस्लिम समुदाय की धार्मिक संपत्तियों पर हमला है।
मुंबई ट्रेन बम धमाकों के मामले पर सवाल
ओवैसी ने 2006 के मुंबई ट्रेन बम धमाकों के एक आरोपी की जेल में हुई मौत पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में 11 मुसलमानों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्होंने बाद में बरी होने से पहले 19 साल जेल में बिताए। उनमें से एक की मौत हो गई, लेकिन कोई भी यह बताने को तैयार नहीं है कि उसकी मौत कैसे हुई।
उन्होंने न्याय व्यवस्था और जेल प्रशासन से सवाल किया कि निर्दोष साबित होने वाले लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों किया गया।
राजनीतिक संदेश
ओवैसी की यह रैली लातूर नगर निगम चुनाव के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उनके बयान न केवल स्थानीय मुद्दों को उठाते हैं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल पैदा करते हैं। उनकी पार्टी एआईएमआईएम महाराष्ट्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और आगे की राजनीति देखना दिलचस्प होगा। ओवैसी के बयानों ने एक बार फिर साबित किया है कि वे विवादों से नहीं डरते और अपनी बात को साफ शब्दों में रखने में विश्वास करते हैं।