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Nagpur News: दीक्षाभूमि में कलाकारों ने बुद्ध के जीवन प्रसंगों को किया जीवंत

Buddha Jayanti Nagpur Deekshabhoomi cultural program: नागपुर दीक्षाभूमि में बुद्ध के जीवन प्रसंगों का भव्य मंचन
Buddha Jayanti Nagpur Deekshabhoomi cultural program: नागपुर दीक्षाभूमि में बुद्ध के जीवन प्रसंगों का भव्य मंचन (Photo source: Wikipedia)

Buddha Jayanti Nagpur Deekshabhoomi cultural program: नागपुर की दीक्षाभूमि में आयोजित 2570वीं बुद्ध जयंती महोत्सव के समापन पर कलाकारों ने गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़े कई ऐतिहासिक प्रसंगों का मंचन किया। अंगुलीमाल, आम्रपाली, माता रमाई और बाबासाहेब आंबेडकर के प्रेरणादायी दृश्य दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने। कार्यक्रम के जरिए शांति, करुणा और मानवता का संदेश दिया गया।

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दीक्षाभूमि में बुद्ध के विचारों का दिखा प्रभावशाली मंचन

Buddha Jayanti Nagpur Deekshabhoomi cultural program: नागपुर। दीक्षाभूमि पर आयोजित 2570वीं बुद्ध जयंती के तीन दिवसीय महोत्सव के समापन अवसर पर कलाकारों ने तथागत गौतम बुद्ध के जीवन के महत्वपूर्ण प्रसंगों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से मंचित किया।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति, भिक्खु-भिक्खुणी संघ और धम्मसेना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में “प्रबुद्ध हो मानव” शीर्षक से बुद्ध-भीम गीतों की प्रस्तुति दी गई।

जब सिद्धार्थ गौतम काषाय वस्त्र धारण कर मंच पर प्रकट हुए और कमल के फूल पर खड़े दिखाई दिए, तब उपस्थित उपासक-उपासिकाओं ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया। शांति, करुणा और मैत्री का संदेश देने वाले बुद्ध के जीवन की झलकियां दर्शकों के सामने सजीव हो उठीं।

अंगुलीमाल और आम्रपाली के प्रसंगों ने दर्शकों को किया भावुक

लगभग ढाई हजार वर्ष पुराने स्वरूप में साकार किए गए प्रसंगों में अंगुलीमाल का हिंसक जीवन से रूपांतरण और बुद्ध की शरण में आना विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। आम्रपाली के जीवन में बुद्ध के विचारों से आए परिवर्तन को भी मंच पर दर्शाया गया — जिसमें वह सांसारिक जीवन त्यागकर भिक्खुणी बनती हैं और धर्म प्रचार में जीवन समर्पित करती हैं।

इसके अतिरिक्त माता रमाई का त्याग, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रेरणादायी प्रसंग भी मंच पर जीवंत किए गए।

महोत्सव में महाराष्ट्र भर से बड़ी संख्या में उपासक-उपासिकाएं सम्मिलित हुए और इस सांस्कृतिक-धार्मिक आयोजन ने दीक्षाभूमि पर बुद्ध जयंती की परंपरा को नई ऊँचाई दी।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।