मनरेगा में फेस पहचान आधारित हाजिरी प्रणाली लागू होने से काम में आएगी पारदर्शिता
MGNREGA face authentication attendance NMMS Nagpur: नागपुर, 10 अप्रैल। महाराष्ट्र में मनरेगा योजना के अंतर्गत मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया अब पूरी तरह तकनीक आधारित हो गई है। राज्य में फेस ऑथेंटिकेशन आधारित NMMS (National Mobile Monitoring System) प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। यह जानकारी मनरेगा आयुक्त डॉ. भरत बास्टेवाड ने दी।
कैसे काम करेगी यह प्रणाली?
इस व्यवस्था के तहत ग्राम रोजगार सेवक कार्यस्थल पर पहुंचकर एनएमएमएस (NMMS) मोबाइल ऐप के जरिए प्रत्येक मजदूर की फोटो लेंगे और फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करेंगे। इस प्रणाली में भाग लेने के लिए मजदूरों का ई-केवाईसी (e-KYC) पूर्ण होना अनिवार्य है।
जहां इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां मस्टर रोल पहले से डाउनलोड कर ऑफलाइन तरीके से भी उपस्थिति दर्ज की जा सकती है। नेटवर्क उपलब्ध होने पर इसे बाद में अपलोड किया जा सकेगा। उपस्थिति अपलोड करने के लिए एक निश्चित समयसीमा तय की गई है, जिसका सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ाई से पालन करना होगा।
तकनीकी बाधा आने पर क्या होगा?
नेटवर्क समस्या, डिवाइस खराबी या अन्य तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज न हो पाने की स्थिति में विशेष छूट (exemption) का प्रावधान रखा गया है। ऐसे मामलों में ग्राम पंचायत, प्रोग्राम ऑफिसर (PO) और जिला कार्यक्रम समन्वयक (DPC) की मंजूरी के बाद वैकल्पिक तरीके से उपस्थिति दर्ज की जा सकेगी।
क्या होगा फायदा?
डॉ. बास्टेवाड के अनुसार इस नई प्रणाली से मजदूरों को समय पर और सही भुगतान सुनिश्चित होगा। साथ ही फर्जी हाजिरी और गलत बिलों पर प्रभावी रोक लगेगी, जिससे केवल वास्तविक श्रमिकों को ही उनके परिश्रम का उचित लाभ मिल सकेगा।
राज्य सरकार द्वारा इस प्रणाली के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी जिला अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र