नागपुर में लुप्त होती भारतीय हस्तकलाओं पर विचारगोष्ठी का आयोजन
Nagpur handicraft exhibition Mrignaini: नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के हिंदी मोर भवन, सीताबर्डी में उपक्रम चौपाल के तहत “लुप्त होती भारतीय हस्तकलाएं” विषय पर एक विचारगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का संयोजन श्री विजय तिवारी ने किया, जबकि सहसंयोजन श्री हेमंत कुमार पांडे ने संभाला।
मध्य प्रदेश हथकरघा निगम के क्षेत्रीय व्यवस्थापक श्री एम.एल. शर्मा मुख्य अतिथि रहे। “मृगनयनी” हस्तकला प्रदर्शनी के आयोजक श्री सुमेर सिंह विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती की वंदना से हुआ। संयोजक श्री विजय तिवारी ने अतिथियों का परिचय कराते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। विशेष अतिथि श्री सुमेर सिंह ने बताया कि “मृगनयनी” प्रदर्शनी का उद्देश्य हस्तशिल्प कलाकारों और श्रमजीवियों को प्रोत्साहित करना है।
विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन में कलाकारों के संरक्षण और हस्तकला को बढ़ावा देने पर हुई चर्चा
सहसंयोजक श्री हेमंत कुमार पांडे ने सिंधु सभ्यता से लेकर भारतीय चित्रकला, मूर्तिकला, मंदिर वास्तु, वस्त्र, आभूषण, संगीत और नृत्यकला तक हस्तकला की समृद्ध परंपरा का विस्तार से उल्लेख किया। पंडित धीरज दुबे ने ज्योतिष और हस्तरेखा के आधार पर कला के प्रति रुचि का संबंध स्पष्ट किया। मदन गोपाल वाजपेई और एडवोकेट जगत बाजपेई ने हस्तकला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसकी वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि श्री एम.एल. शर्मा ने ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जीवित हस्तकलाओं के संरक्षण के लिए चल रही सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि “मृगनयनी” हस्तकला प्रदर्शनी 10 से 19 मार्च 2026 तक आयोजित होगी। अंत में डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी ने सभी अतिथियों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
“मृगनयनी” प्रदर्शनी में भाग लेकर नागपुरवासी देशभर के हस्तशिल्प कलाकारों की कला को सीधे देख और खरीद सकेंगे।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र