नागपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से जुड़ा एक अहम मुद्दा इन दिनों चर्चा में है। स्टेशन परिसर में ओला-उबर टैक्सी चालकों और स्थानीय ऑटो रिक्शा चालकों के बीच लगातार हो रहे विवाद ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। इस स्थिति को देखते हुए मध्य रेलवे के ZRUCC सदस्य और ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष नितिन सोलंके ने रेलवे प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की है।
नागपुर, जो देश का एक प्रमुख रेलवे जंक्शन है, हर दिन हजारों यात्रियों का आना-जाना होता है। ऐसे में स्टेशन परिसर में अव्यवस्था और विवाद यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
स्टेशन परिसर में बढ़ती अव्यवस्था
बीते कुछ समय से नागपुर रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार और संत्रा मार्केट की ओर टैक्सी और ऑटो चालकों के बीच झगड़े की घटनाएं बढ़ गई हैं। कई बार ये विवाद खुले झगड़े में बदल जाते हैं, जिससे स्टेशन परिसर में डर का माहौल बन जाता है। यात्रियों, खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह स्थिति काफी असुविधाजनक और असुरक्षित है।
यात्रियों का कहना है कि ट्रेन से उतरते ही उन्हें शांति और सुविधा मिलनी चाहिए, लेकिन स्टेशन के बाहर पहुंचते ही अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है।
प्रीपेड ऑटो सेवा बंद होने की परेशानी
नागपुर रेलवे स्टेशन पर पहले प्रीपेड ऑटो सेवा यात्रियों के लिए बड़ी राहत थी। लेकिन फिलहाल यह सेवा बंद है। इसके कारण कई ऑटो चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। नए शहर में आने वाले या पहली बार यात्रा करने वाले यात्री इस स्थिति में सबसे ज्यादा परेशान होते हैं।
प्रीपेड सेवा बंद होने के कारण यात्रियों को मजबूरी में ओला-उबर जैसी ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का सहारा लेना पड़ता है।
ओला-उबर टैक्सियों को रोकने की घटनाएं
जब ओला या उबर टैक्सी यात्री को लेने स्टेशन के पास आती है, तो कई बार स्थानीय ऑटो चालक उन्हें रोक देते हैं। इससे टैक्सी चालकों और ऑटो चालकों के बीच बहस और झगड़े हो जाते हैं। कई मामलों में टैक्सियों को स्टेशन के पास आने नहीं दिया जाता।
इस वजह से यात्रियों को भारी सामान के साथ काफी दूर पैदल चलना पड़ता है। बुजुर्ग और बीमार यात्रियों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो जाती है।
नितिन सोलंके की प्रमुख मांगें
इस गंभीर समस्या को लेकर नितिन सोलंके ने मध्य रेलवे के महाप्रबंधक, मुंबई और नागपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक को पत्र लिखकर समाधान की मांग की है। उन्होंने साफ कहा है कि यात्रियों की सुविधा रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अलग पिकअप और ड्रॉप ज़ोन की जरूरत
नितिन सोलंके की सबसे प्रमुख मांग यह है कि नागपुर रेलवे स्टेशन के दोनों प्रवेश द्वारों पर ओला-उबर टैक्सियों के लिए अलग और तय पिकअप व ड्रॉप ज़ोन बनाए जाएं। इससे टैक्सी और ऑटो चालकों के बीच होने वाले विवाद को रोका जा सकता है।
यदि टैक्सियों के लिए तय जगह होगी तो यात्रियों को भी पता रहेगा कि उन्हें कहां जाना है।
सूचना बोर्ड और सुरक्षा व्यवस्था
उन्होंने यह भी मांग की है कि स्टेशन परिसर में साफ और स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाए जाएं, ताकि यात्रियों को किसी तरह की उलझन न हो। इसके साथ ही RPF या रेलवे पुलिस की तैनाती बढ़ाई जाए, ताकि झगड़े और अव्यवस्था पर तुरंत नियंत्रण किया जा सके।
सुरक्षा बलों की मौजूदगी से स्टेशन परिसर में अनुशासन बना रहेगा।
प्रीपेड ऑटो सेवा दोबारा शुरू हो
नितिन सोलंके ने प्रीपेड ऑटो सेवा को तुरंत फिर से शुरू करने की भी मांग की है। इससे यात्रियों को तय किराए पर सुविधा मिलेगी और ऑटो चालकों की मनमानी पर भी रोक लगेगी।
यात्रियों का अधिकार और प्रशासन की जिम्मेदारी
नागपुर जैसे बड़े रेलवे जंक्शन पर यात्रियों का सुरक्षित और आसान सफर करना उनका अधिकार है। स्टेशन परिसर में भय और अव्यवस्था किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती। रेलवे प्रशासन को चाहिए कि वह इस समस्या को गंभीरता से ले और जल्द समाधान निकाले।
यदि समय रहते सही कदम उठाए गए, तो न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि स्टेशन की छवि भी बेहतर होगी।