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नागपुर से तेलंगाना तक मवेशी तस्करी का खुलासा, 38 बैल बचाए गए और 43 लाख का माल जब्त

नागपुर से तेलंगाना तक मवेशी तस्करी का खुलासा, 38 बैल बचाए गए और 43 लाख का माल जब्त
Nagpur Cattle Smuggling: नागपुर से तेलंगाना तक मवेशी तस्करी का बड़ा खुलासा, 38 बैल बचाए (File Photo)

Nagpur Cattle Smuggling: महाराष्ट्र के नागपुर से तेलंगाना की ओर मवेशी तस्करी का बड़ा मामला सामने आया। पुलिस और पशु कल्याण विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 38 बैलों को बचाया गया। करीब 43.30 लाख रुपये का माल जब्त किया गया। तस्कर इन्हें कसाईखाने ले जा रहे थे। बचाए गए मवेशियों को पशु चिकित्सालय में उपचार के लिए भेजा गया है।

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Asfi Shadab
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Nagpur Cattle Smuggling: नागपुर जिले से तेलंगाना की ओर मवेशियों की तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस और पशु कल्याण विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 38 बैलों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाया गया है। इस पूरे ऑपरेशन में करीब 43.30 लाख रुपये की सामग्री जब्त की गई है। यह कार्रवाई राज्य में बढ़ती पशु तस्करी के खिलाफ एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

कैसे हुई तस्करी की कोशिश

सूत्रों के अनुसार, तस्कर इन मवेशियों को नागपुर से तेलंगाना ले जा रहे थे। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने रास्ते में ही गाड़ी को रोका। जांच में पता चला कि इन बैलों को कसाईखानों में ले जाया जा रहा था। तस्कर रात के अंधेरे का फायदा उठाकर सीमा पार करने की कोशिश कर रहे थे। गाड़ी में मवेशियों को बेहद खराब हालत में रखा गया था, जिससे कई बैल घायल भी हो गए थे।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

पुलिस को जब तस्करी की भनक लगी तो तुरंत नाकाबंदी की गई। अधिकारियों ने बताया कि ट्रक चालक और साथियों ने गाड़ी रोकने के बाद भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। तस्करों के पास से नकली कागजात भी मिले हैं। पुलिस ने बताया कि यह गिरोह काफी समय से इस इलाके में सक्रिय था और कई बार मवेशियों की तस्करी कर चुका है।

बैलों को सुरक्षित जगह भेजा गया

Nagpur Cattle Smuggling: बचाए गए सभी 38 बैलों को पशु चिकित्सालय में भेजा गया है। वहां उनका इलाज चल रहा है। कई बैल कमजोर हालत में थे और कुछ को चोटें भी आई थीं। पशु कल्याण विभाग के अधिकारियों ने इन मवेशियों की देखभाल का पूरा इंतजाम किया है। जल्द ही इन्हें गौशाला में भेजा जाएगा जहां इनकी सही देखरेख हो सकेगी।

राज्य में बढ़ती तस्करी की समस्या

महाराष्ट्र के कई हिस्सों से मवेशियों की तस्करी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। तस्कर गांवों से मवेशी चुराकर या सस्ते दामों में खरीदकर दूसरे राज्यों में बेच देते हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान होता है। पुलिस ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि ऐसे तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले में गिरफ्तार तस्करों से पूछताछ जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि इनसे पूरे गिरोह का पता चल जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में ऐसी तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी और गश्त बढ़ा दी जाएगी।

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।